क्या विजय दिवस पर मनोज सिन्हा समेत कई नेताओं ने 1971 के युद्ध में शहीद जवानों को नमन किया?

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क्या विजय दिवस पर मनोज सिन्हा समेत कई नेताओं ने 1971 के युद्ध में शहीद जवानों को नमन किया?

सारांश

हर साल 16 दिसंबर को विजय दिवस मनाया जाता है, जब भारत ने पाकिस्तान को 1971 में हराया। मनोज सिन्हा और अन्य नेताओं ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी, याद दिलाते हुए कि उनके बलिदान ने राष्ट्र की दिशा को बदला। इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है जब हम उन वीरों की याद करते हैं जिन्होंने देश के लिए जान दी।

Key Takeaways

  • विजय दिवस का महत्व और शहीदों की सेवा को याद करना।
  • 1971 के युद्ध में मिली ऐतिहासिक विजय।
  • शहीदों के बलिदान को श्रद्धांजलि देना।
  • बांग्लादेश का जन्म और दक्षिण एशिया का नया नक्शा।
  • हर साल 16 दिसंबर को मनाने की परंपरा।

नई दिल्ली, 16 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। देशभर में मंगलवार का दिन विजय दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। यह वही खास दिन है जब 1971 में भारत ने पाकिस्तान को करारी शिकस्त देकर बांग्लादेश को आजाद कराया था। इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी ने युद्ध के दौरान ड्यूटी पर अपनी जान गंवाने वाले बहादुर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

मनोज सिन्हा के हवाले से उनके कार्यालय ने एक्स पर लिखा, "विजय दिवस पर मैं 1971 के युद्ध के बहादुर नायकों और शहीदों को श्रद्धांजलि देता हूँ। उनके सर्वोच्च बलिदान, शानदार वीरता और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण ने भारत को निर्णायक जीत दिलाई। देश उनकी सेवा और बलिदान के लिए हमेशा उनका आभारी रहेगा।"

सुरिंदर चौधरी के हवाले से उनके कार्यालय ने एक्स पर पोस्ट किया, "गहरे सम्मान और कृतज्ञता के साथ हम विजय दिवस पर 1971 में भारत की निर्णायक जीत में हमारे सशस्त्र बलों की वीरता और सर्वोच्च बलिदान को याद करते हैं। उनकी वीरता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।"

सत शर्मा, जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष ने एक्स पोस्ट में लिखा, "1971 के युद्ध में अपने अदम्य साहस, शौर्य और बलिदान से ऐतिहासिक विजय का गौरवशाली अध्याय लिखने वाले मां भारती के वीर सैनिकों को शत-शत नमन।"

1971 के युद्ध में भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान पर एक ऐतिहासिक विजय हासिल की थी। इस युद्ध में 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। इस जीत ने दक्षिण एशिया का नया नक्शा भी बनाया और एक नए राष्ट्र यानी बांग्लादेश को जन्म दिया। विजय दिवस के रूप में आज पूरा देश उस दिन को याद कर रहा है।

भारत हर साल 16 दिसंबर को विजय दिवस के रूप में मनाता है, जिसके बाद पूर्वी पाकिस्तान आजाद हुआ और एक नया देश बांग्लादेश बना। यह तारीख ढाका में भारतीय सेना के सामने 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों के सरेंडर की भी याद दिलाती है, जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य सरेंडर था।

Point of View

बल्कि हमारी राष्ट्रीय पहचान को भी मजबूत किया। विजय दिवस का यह दिन हर भारतीय के लिए गर्व का अवसर है।
NationPress
15/02/2026

Frequently Asked Questions

विजय दिवस कब मनाया जाता है?
विजय दिवस हर साल 16 दिसंबर को मनाया जाता है।
1971 के युद्ध में कितने पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया?
1971 के युद्ध में 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया।
विजय दिवस का महत्व क्या है?
विजय दिवस का महत्व हमारे शहीदों के बलिदान को मान्यता देना और राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए उनकी वीरता को याद करना है।
इस दिन को कैसे मनाया जाता है?
इस दिन समारोह, श्रद्धांजलियाँ और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करके मनाया जाता है।
क्या विजय दिवस पर कोई विशेष कार्यक्रम होते हैं?
हाँ, विजय दिवस पर विभिन्न जगहों पर कार्यक्रम और समारोह आयोजित किए जाते हैं, जिसमें शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
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