क्या विजय की फिल्म 'जना नायकन' को सेंसर बोर्ड से मंजूरी नहीं मिलेगी?
सारांश
Key Takeaways
- फिल्म 'जना नायकन' की रिलीज पर अनिश्चितता है।
- मद्रास हाईकोर्ट में सेंसर सर्टिफिकेट पर सुनवाई चल रही है।
- निर्माताओं ने सभी सेंसर बोर्ड के निर्देशों का पालन किया था।
- फिल्म का बजट लगभग 500 करोड़ रुपए है।
- फिल्म को 22 देशों में रिलीज किया जाएगा।
चेन्नई, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अभिनेता विजय की नई तमिल फिल्म ‘जना नायकन’ की सेंसर सर्टिफिकेट प्रक्रिया में अचानक एक बड़ी बाधा उत्पन्न हो गई है। फिल्म की 9 जनवरी को होने वाली रिलीज से पहले इस मुद्दे पर मद्रास हाईकोर्ट में सुनवाई की गई।
मामला यह है कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने अचानक फिल्म का सेंसर सर्टिफिकेट रोक दिया और इसे नई रिव्यू कमेटी के पास दोबारा जांच के लिए भेज दिया। पहले, सेंसर बोर्ड की क्षेत्रीय समिति ने कुछ दृश्य हटाने और कुछ संवाद म्यूट करने के बाद फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट देने की सिफारिश की थी।
अब रिव्यू कमेटी के पास दोबारा जांच के लिए भेजे जाने से इस फिल्म की रिलीज के बारे में अनिश्चितता उत्पन्न हो गई है।
‘जना नायकन’ का निर्देशन एच. विनोथ ने किया है और इसे केवीएन प्रोडक्शंस ने निर्मित किया है। फिल्म में विजय के साथ पूजा हेगड़े और ममिता बैजू भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म लगभग 500 करोड़ रुपए में बनी है और इसे 22 देशों में चार भाषाओं में 5,000 से अधिक सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना है।
यह फिल्म इसलिए भी चर्चा का विषय है क्योंकि इसे राजनीति में कदम रखने से पहले विजय की अंतिम बड़ी फिल्म माना जा रहा है।
कोर्ट में फिल्म निर्माताओं की ओर से वरिष्ठ वकील सतीश परासरन और वकील विजयन सुब्रमणियन ने बताया कि सेंसर सर्टिफिकेट के लिए आवेदन 18 दिसंबर को किया गया था।
फिल्म देखने के बाद 22 दिसंबर को क्षेत्रीय सेंसर बोर्ड ने कुछ दृश्य हटाने और संवाद म्यूट करने के निर्देश दिए और यू/ए सर्टिफिकेट देने की सिफारिश की।
निर्माताओं ने सेंसर बोर्ड के सभी निर्देशों का पालन करते हुए आवश्यक बदलाव किए, लेकिन जब सर्टिफिकेट मिलने की बारी आई, तो केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की चेयरपर्सन ने ईमेल भेजकर बताया कि फिल्म के कुछ दृश्य और संवाद को लेकर शिकायत मिली है, इसलिए फिल्म को रिव्यू कमेटी के पास भेजा गया है।
निर्माताओं ने इस फैसले को कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि फिल्म अभी रिलीज नहीं हुई है और न ही कहीं सार्वजनिक रूप से दिखाई गई है, ऐसे में किसी तीसरे पक्ष की शिकायत का कोई आधार नहीं बनता।
निर्माताओं के वकील ने दलील दी कि रिलीज से ठीक पहले सर्टिफिकेट रोकना अनुचित और गलत है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान होगा। उन्होंने कोर्ट से तुरंत सेंसर सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश देने की मांग की।
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एआरएल सुंदरासन ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि कानून के सामने सभी फिल्में समान हैं, चाहे उनका बजट बड़ा हो या स्टार पावर ज्यादा। उन्होंने बताया कि फिल्म के कुछ दृश्य धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से सवाल किया कि जब फिल्म को पहले ही यू/ए सर्टिफिकेट देने की सिफारिश हो चुकी थी, तो अचानक उसे रिव्यू के लिए क्यों भेजा गया।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मद्रास हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और कहा है कि ‘जना नायकन’ को सेंसर सर्टिफिकेट देने से जुड़ा फैसला 9 जनवरी को सुनाया जाएगा, उसी दिन जिस दिन फिल्म रिलीज होने वाली है।
इस वजह से फिलहाल फिल्म की थिएटर रिलीज अधर में लटकी हुई है।