क्या 'विकसित भारत-जी राम जी' योजना से 15 दिनों में काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता मिलेगा?
सारांश
Key Takeaways
- विकसित भारत-जी राम जी योजना में मजदूरों को 125 दिन का रोजगार मिलेगा।
- केंद्र और राज्य सरकार के बीच खर्च का बंटवारा 60:40 होगा।
- मजदूरों को एक सप्ताह के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
- 15 दिनों में काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता मिलेगा।
- इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना है।
सहरसा, 10 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा विधायक नीरज कुमार सिंह उर्फ बबलू ने 'विकसित भारत-जी राम जी' योजना के फायदों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि इस योजना में किए गए परिवर्तनों का मुख्य उद्देश्य मजदूरों और किसानों को सीधे लाभ पहुँचाना है, ताकि उन्हें रोजगार, समय पर भुगतान और सामाजिक सुरक्षा मिल सके।
भाजपा विधायक ने बताया कि पहले इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को केवल 100 दिन का रोजगार मिलता था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। इससे ग्रामीण परिवारों को अधिक दिनों तक काम मिलेगा और उनकी आमदनी में वृद्धि होगी। यह निर्णय खासतौर पर उन परिवारों के लिए राहत लेकर आया है, जो पूरी तरह से मजदूरी पर निर्भर हैं।
नीरज कुमार सिंह ने यह भी बताया कि योजना के खर्च के बंटवारे में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। पहले इस योजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी, लेकिन अब इसे 60:40 के अनुपात में बांटा गया है। इसके तहत 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देगी, जबकि 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार की होगी। इससे योजना के बेहतर क्रियान्वयन में राज्यों की भागीदारी भी बढ़ेगी।
उन्होंने मजदूरों को होने वाली सबसे बड़ी परेशानी का जिक्र करते हुए कहा कि पहले मजदूरी का भुगतान समय पर नहीं हो पाता था, जिससे मजदूरों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता था। नई व्यवस्था में इस समस्या को दूर कर दिया गया है। अब मजदूरों को काम पूरा होने के एक सप्ताह के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा ताकि उन्हें इंतजार न करना पड़े।
विधायक ने आगे कहा कि अगर किसी मजदूर को 15 दिनों के भीतर काम नहीं मिलता है तो सरकार उसे बेरोजगारी भत्ता भी देगी। इससे मजदूरों को अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी और उन्हें आर्थिक तंगी से राहत मिलेगी। इस योजना से किसानों और मजदूरों दोनों को बड़ा फायदा होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है और इसी सोच के साथ यह योजना लाई गई है ताकि किसान और मजदूर आत्मनिर्भर बन सकें और गांवों में विकास की रफ्तार तेज हो।