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क्या शीतकालीन सत्र में 13 बिल तय होने पर विपक्ष नाराज है? फौजिया खान ने कहा- चर्चा का समय नहीं छोड़ा गया

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क्या शीतकालीन सत्र में 13 बिल तय होने पर विपक्ष नाराज है? फौजिया खान ने कहा- चर्चा का समय नहीं छोड़ा गया

सारांश

संसद के शीतकालीन सत्र में 13 बिलों की स्वीकृति ने विपक्ष के बीच चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। एनसीपी की फौजिया खान ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि इससे सार्थक चर्चा की संभावना समाप्त हो गई है। क्या सरकार विपक्ष की आवाज दबाना चाहती है?

मुख्य बातें

शीतकालीन सत्र के दौरान 13 बिलों की स्वीकृति विपक्ष के लिए चिंता का विषय है।
सरकार पर दुरुपयोग और चर्चा का समय नहीं देने के आरोप हैं।
महत्वपूर्ण मुद्दों जैसे स्वच्छ हवा और सुरक्षा पर चर्चा की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। संसद के शीतकालीन सत्र को लेकर विपक्ष की चिंताएं गहरा गई हैं। एनसीपी (एससीपी) की राज्यसभा सदस्य फौजिया खान ने कहा कि संसद का मुख्य उद्देश्य जनता की समस्याओं को उठाना और उन पर चर्चा करना है, लेकिन सरकार की ओर से पहले से ही 15 दिनों के सत्र के लिए 13 बिल तय कर दिए जाने से सार्थक बहस की गुंजाइश ही नहीं बचती।

फौजिया खान ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि हमारा काम जनता के हित के मुद्दे उठाना और उनके प्रश्नों को संसद तक पहुँचाना है, लेकिन यदि सरकार इतने कम समय में इतने बिल लाती है, तो फिर चर्चा कैसे संभव होगी? जिन मुद्दों को हम सत्र के दौरान उठाना चाहते हैं, उन्हें उठाने का समय ही नहीं मिलता।

उन्होंने कहा कि विपक्ष नागरिकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों जैसे स्वच्छ हवा, सुरक्षा और मौलिक अधिकार पर चर्चा करना चाहता है।

उन्होंने कहा कि हर नागरिक का अधिकार है कि वह साफ हवा में सांस ले, लेकिन देश के कई हिस्सों में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। नागरिकों का अधिकार है कि वे आतंकवादी हमलों से सुरक्षित रहें, लेकिन हमले लगातार जारी हैं। ऐसे में संसद में इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, परंतु सरकार चर्चा के लिए समय ही नहीं दे रही है।

सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाना चाहती है और चर्चा का दायरा सीमित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि यदि संसद में चर्चा का अवसर ही नहीं मिलेगा, तो फिर संसद का उद्देश्य क्या रह जाएगा?

इस बीच, नेशनल हेराल्ड केस में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज किए जाने पर भी फौजिया खान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह लोकतंत्र की स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शीतकालीन सत्र में 13 बिलों का क्या महत्व है?
ये बिल महत्वपूर्ण मुद्दों को संबोधित करते हैं, लेकिन विपक्ष का कहना है कि समय की कमी के कारण सार्थक चर्चा नहीं हो पा रही है।
फौजिया खान ने सरकार के खिलाफ क्या आरोप लगाए हैं?
उन्होंने सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने और चर्चा का समय सीमित करने का आरोप लगाया है।
राष्ट्र प्रेस
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