क्या विश्व पुस्तक मेले में अमित शाह ने ज्ञानार्जन के लिए पुस्तकों को सर्वोत्तम बताया?
सारांश
Key Takeaways
- ज्ञान का सबसे अच्छा माध्यम पुस्तकें हैं।
- पढ़ाई की आदत को बनाए रखना चाहिए।
- बच्चों को स्वतंत्रता सेनानियों से प्रेरित होना चाहिए।
- सशस्त्र सेनाओं की ताकत को समझना आवश्यक है।
- पुस्तक मेले का महत्व और इसकी सांस्कृतिक भूमिका।
नई दिल्ली, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में भाग लिया। उन्होंने इस मौके पर कहा कि ज्ञान प्राप्त करने का सबसे प्रभावशाली साधन पुस्तकें हैं और सभी को उम्र की परवाह किए बिना पढ़ते रहना चाहिए।
अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि ज्ञान की प्राप्ति का सबसे उत्तम साधन पुस्तकें हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि पढ़ने की आदत तेजी से कम हो रही है और उनका मानना है कि पुस्तकें, चाहे वे डिजिटलमुद्रित, ज्ञान का सबसे प्रभावशाली माध्यम हैं।
उन्होंने विश्व पुस्तक मेले में राष्ट्रीय पुस्तक ट्रस्ट के वंदे मातरम पवेलियन का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि राष्ट्र वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है, और यह पवेलियन हमारे राष्ट्रीय गीत की गौरवशाली गाथा को प्रदर्शित करता है, जिसने स्वतंत्रता सेनानियों को औपनिवेशिक शासन के खिलाफ देशभक्ति की भावना से प्रेरित किया।
गृह मंत्री ने बच्चों को ‘आनंद मठ’ की प्रतियां भेंट कीं। उन्होंने बताया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह साहित्यिक कृति लाखों भारतीयों को स्वतंत्रता संग्राम छेड़ने के लिए प्रेरित करती है। हमने बच्चों को 'आनंद मठ' की प्रतियां भेंट कीं ताकि वे स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों से प्रेरित हो सकें।
उन्होंने सरदार पटेल के जीवन और योगदान पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और ऑपरेशन सिंदूर पवेलियन का भी दौरा किया। उन्होंने लिखा कि यह भारत की सशस्त्र सेनाओं की अजेय शक्ति और प्रधानमंत्री मोदी की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रमाण है।
इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह के साथ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी उपस्थित थे। गृह मंत्री कई प्रकाशन स्टॉलों पर गए और किताबों तथा व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की।