क्या डब्ल्यूबीएसएससी शिक्षक भर्ती घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई?
सारांश
Key Takeaways
- सुप्रीम कोर्ट का आदेश भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
- 2016 की भर्ती में अनियमितताओं के चलते कई नियुक्तियां रद्द की गई थीं।
- अभ्यर्थियों को केवल मेरिट के आधार पर ही अवसर दिया जाएगा।
नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल के एसएससी शिक्षक भर्ती घोटाले से संबंधित मामले में एक महत्वपूर्ण विकास सामने आया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने 2016 के वेटिंग लिस्ट वाले शिक्षकीय उम्मीदवारों को नई भर्ती में शामिल करने के कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्णय पर रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह आदेश केवल उन उम्मीदवारों के लिए है, जो मेरिट के आधार पर चयनित हुए थे और जिन पर कोई दाग नहीं था। अदालत ने यह भी बताया कि जिन अभ्यर्थियों का चयन ही नहीं हुआ, उन्हें उम्र में छूट देना भर्ती प्रक्रिया की मूल भावना और पारदर्शिता को नुकसान पहुंचा सकता है।
2016 में पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन (डब्ल्यूबीएसएससी) द्वारा आयोजित शिक्षक भर्ती में कई गड़बड़ियों का खुलासा हुआ था। जांच में ओएमआर शीट्स में छेड़छाड़, रैंक जंपिंग, फर्जी नियुक्तियां और कैश-फॉर-जॉब्स जैसे गंभीर आरोप लगे थे। इन अनियमितताओं के कारण कलकत्ता हाईकोर्ट ने अप्रैल 2024 में लगभग 25,753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द कर दी थीं। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले की पुष्टि की।
हालांकि, 12 दिसंबर को कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक नया आदेश जारी किया, जिसमें पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन को निर्देश दिया गया कि नई भर्ती प्रक्रिया में 2016 की पैनल की वेटिंग लिस्ट में शामिल कुछ शिक्षकीय उम्मीदवारों को इंटरव्यू में शामिल होने का मौका दिया जाए, हालांकि कुछ सख्त शर्तें भी निर्धारित की गईं।
जस्टिस अमृता सिन्हा की बेंच ने स्पष्ट किया कि यह राहत सीमित दायरे में दी जा रही है। केवल दो प्रकार के उम्मीदवार ही इसके पात्र होंगे: पहला, वे जो वेटिंग लिस्ट में थे लेकिन उम्र सीमा पार कर चुके थे; दूसरा, वे जिन्होंने स्वयं हाईकोर्ट से नई भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति मांगी है।
फिर भी, सोमवार को मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है।