पश्चिम बंगाल विधानसभा के शौचालय में मिला कैंटीन कर्मचारी का शव, सुरक्षा पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा परिसर में सोमवार, 2 नवंबर 2026 की सुबह एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब इमारत के भीतर एक शौचालय में कैंटीन कर्मचारी उमेश चंद्र दास का शव बरामद किया गया। इस घटना ने न केवल कोलकाता के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी, बल्कि इस अत्यंत संवेदनशील और उच्च-सुरक्षा वाले सरकारी परिसर की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटनाक्रम: कैसे मिला शव
पुलिस और विधानसभा सूत्रों के अनुसार, सोमवार सुबह दास के सहकर्मियों ने उन्हें विधानसभा परिसर के एक शौचालय में बेहोशी की हालत में पाया। सहकर्मियों ने तत्काल विधानसभा अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों को इसकी सूचना दी, जिसके बाद हरे स्ट्रीट पुलिस स्टेशन को खबर पहुँचाई गई।
पुलिस दल तुरंत मौके पर पहुँचा और विधानसभा सुरक्षा गार्डों के सहयोग से दास को शौचालय से बाहर निकाला गया। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने जाँच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मृतक की पहचान और पृष्ठभूमि
पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान उमेश चंद्र दास के रूप में हुई है, जो पिछले 15 वर्षों से पश्चिम बंगाल विधानसभा में एक अस्थायी कैंटीन कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। दीर्घकालिक सेवा के बावजूद उनकी स्थायी नियुक्ति नहीं हो पाई थी — एक तथ्य जो राज्य सरकार की अस्थायी कर्मचारी नीति पर भी ध्यान खींचता है।
पुलिस की प्रतिक्रिया और जाँच
कोलकाता पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त (डिटेक्टिव डिपार्टमेंट) कुणाल अग्रवाल ने पुष्टि की कि मामले की विस्तृत जाँच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा, 'यह घटना कैसे हुई, इसकी जाँच की जा रही है। होमिसाइड डिपार्टमेंट के जासूस मौके पर पहुँच चुके हैं। हमने जाँच शुरू कर दी है।'
जाँचकर्ता विधानसभा परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रहे हैं और दास के सहकर्मियों से पूछताछ कर रहे हैं, ताकि मौत से पहले की घटनाओं की कड़ी जोड़ी जा सके। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
मौत का कारण अभी अज्ञात
अधिकारियों के अनुसार, दास की मौत के सटीक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। जाँचकर्ता यह निर्धारित करने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या मौत किसी चिकित्सीय स्थिति के कारण हुई या इसमें कोई अन्य परिस्थिति भी शामिल थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण का पता चल सकेगा।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
यह घटना इसलिए भी अधिक गंभीर मानी जा रही है क्योंकि पश्चिम बंगाल विधानसभा एक अत्यंत संवेदनशील सरकारी इमारत है, जहाँ बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैनात रहती है। गौरतलब है कि इतने कड़े पहरे वाले परिसर में किसी कर्मचारी का शव मिलना — और वह भी बिना किसी तत्काल सूचना के — सुरक्षा प्रोटोकॉल की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। आलोचकों का कहना है कि यह घटना विधानसभा प्रशासन द्वारा परिसर के भीतर कार्यरत कर्मचारियों की निगरानी और कल्याण व्यवस्था की समीक्षा की माँग करती है।
पुलिस ने अभी तक जाँच में सामने आई किसी भी जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद इस मामले में अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है।