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कोलकाता उच्च न्यायालय में पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष चुनावों की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर

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कोलकाता उच्च न्यायालय में पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष चुनावों की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर

सारांश

कोलकाता उच्च न्यायालय में पेश की गई जनहित याचिका में मांग की गई है कि आगामी विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष और हिंसामुक्त चुनाव सुनिश्चित किए जाएं। क्या चुनाव आयोग इस बार हिंसा पर नियंत्रण रख पाएगा?

मुख्य बातें

जनहित याचिका में निष्पक्ष चुनाव की मांग की गई है।
पश्चिम बंगाल में चुनावों के दौरान हिंसा पर रोक लगाने का प्रयास।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने जीरो टॉलरेंस नीति की घोषणा की है।

कोलकाता, 11 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कोलकाता उच्च न्यायालय की एक डिवीजन बेंच में बुधवार को एक जनहित याचिका प्रस्तुत की गई, जिसमें इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष और हिंसामुक्त चुनाव कराए जाने की मांग की गई।

यह याचिका कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायाधीश पार्थसारथी सेन की डबल बेंच द्वारा स्वीकार की गई, और इसकी सुनवाई बुधवार के दूसरे भाग में होने की संभावना है।

यह याचिका उस दिन के बाद दायर की गई, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ने मंगलवार को कोलकाता में मीडिया से कहा कि इस बार भारत निर्वाचन आयोग मतदान से संबंधित हिंसा के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाएगा, चाहे वह मतदान से पहले, मतदान के दौरान या मतदान के बाद हो।

आयोग ने कहा, "हम कठोर कदम उठाने और इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया है।"

याचिका में पिछले चुनावों में मतदान से संबंधित हिंसा के मामलों का उल्लेख किया गया, जिसमें मतदाताओं और विपक्षी दल के एजेंटों को डराना, और यहां तक कि राज्य में राजनीतिक गुंडों द्वारा महिलाओं की गरिमा पर आघात के मामले शामिल थे।

जनहित याचिका में अन्य मांगों में राज्य के संवेदनशील क्षेत्रों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की तत्काल तैनाती, सीसीटीवी की स्थापना और सभी बूथों में वीडियोग्राफी की व्यवस्था शामिल हैं।

याचिकाकर्ता ने पश्चिम बंगाल में तीन-स्तरीय पंचायत प्रणाली के चुनावों में 2018 और 2023 में हुई हिंसा का भी उल्लेख किया, जिससे दोनों वर्षों में कई लोगों की जान गई।

इस बार चुनाव आयोग विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में मतदान से पहले और मतदान के बाद की हिंसा को रोकने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसने 2021 के विधानसभा चुनावों को प्रभावित किया था।

हाल ही में, राज्य के कई स्थानों पर तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा भारतीय जनता पार्टी की 'परिवर्तन यात्रा' पर हमले की घटनाएँ सामने आई थीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। जनहित याचिका के माध्यम से न्यायालय से अपेक्षा की जा रही है कि वह चुनावों में निष्पक्षता बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगा। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो चुनाव आयोग की जिम्मेदारियों को और बढ़ाता है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या यह जनहित याचिका चुनावों में वास्तविक बदलाव ला सकेगी?
यह जनहित याचिका चुनाव आयोग को निष्पक्षता बनाए रखने के लिए एक दबाव के रूप में कार्य कर सकती है, जिससे चुनावों में सुधार की संभावना बढ़ सकती है।
इस याचिका में क्या-क्या मांगे गई हैं?
याचिका में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती, सीसीटीवी की स्थापना और बूथों पर वीडियोग्राफी की व्यवस्था की मांग की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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