महिला आरक्षण विधेयक पर मेघालय के मुख्यमंत्री संगमा का बयान: महिलाओं की भागीदारी से होगा समाज को लाभ
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण विधेयक का स्वागत
- महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा
- परिसीमन प्रक्रिया के संभावित लाभ
- सामाजिक ढांचे में महिलाओं की भूमिका
- संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता
शिलांग, १७ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने महिला आरक्षण विधेयक का स्वागत करते हुए इसे लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने यह भी जताया कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया के परिणामस्वरूप मेघालय को संसद में और अधिक सीटें मिल सकती हैं।
सीएम संगमा ने इसे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने की पुरानी मांग के लिए एक स्वागत योग्य कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह सुधार बहुत पहले होना चाहिए था, लेकिन इस साहसिक पहल का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया जाना चाहिए।
महिलाओं के विधान मंडलों में कम प्रतिनिधित्व पर उन्होंने कहा कि यह विधेयक इस अंतर को समाप्त करने और निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं को सशक्त बनाने में मदद करेगा।
उन्होंने कहा कि मेघालय में मातृसत्तात्मक सामाजिक ढांचा है, जहां महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाती हैं, फिर भी औपचारिक राजनीतिक संस्थाओं में उनकी उपस्थिति अभी भी सीमित है।
यह एक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक सुधार होगा जो उच्चतम स्तरों पर महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देगा। नीति निर्माण में उनकी भागीदारी से समग्र समाज को लाभ होगा। सीएम संगमा ने मेघालय जैसे छोटे और भौगोलिक चुनौतियों से भरे राज्यों पर परिसीमन के संभावित प्रभाव की ओर भी ध्यान दिलाया।
उन्होंने आशा जताई कि राज्य के अनूठे भूभाग और जनसांख्यिकीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, संसदीय प्रतिनिधित्व में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि मेघालय के लिए सीटों की संख्या बढ़ेगी, और मैं आशा करता हूं कि भारत सरकार और परिसीमन आयोग दोनों इस मामले में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएंगे।"
मुख्यमंत्री संगमा ने आरक्षण और परिसीमन प्रक्रियाओं को लागू करते समय एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की बाधा से बचने के लिए, इन दोनों प्रक्रियाओं को सावधानीपूर्वक विचार-विमर्श के साथ चलाना चाहिए।