विश्व मलेरिया दिवस 2025: 'अब हम कर सकते हैं, अब करना ही होगा' — उन्मूलन की राह पर बड़ी उम्मीद

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विश्व मलेरिया दिवस 2025: 'अब हम कर सकते हैं, अब करना ही होगा' — उन्मूलन की राह पर बड़ी उम्मीद

सारांश

विश्व मलेरिया दिवस 2025 पर WHO का ऐतिहासिक अभियान — 47 देश मलेरिया-मुक्त, 25 देशों में 1 करोड़ बच्चों को टीके, फिर भी 2024 में 28.2 करोड़ मामले। विज्ञान, नीति और इच्छाशक्ति के संगम पर मलेरिया उन्मूलन का सपना अब हकीकत बन सकता है।

Key Takeaways

  • 25 अप्रैल 2025 को विश्व मलेरिया दिवस पर WHO ने 'अब हम कर सकते हैं, अब करना ही होगा' अभियान लॉन्च किया।
  • 47 देश आधिकारिक रूप से मलेरिया-मुक्त घोषित हो चुके हैं और 25 देशों में 1 करोड़ बच्चों को सालाना टीके लगाए जा रहे हैं।
  • 2024 में 28.2 करोड़ मलेरिया मामले और 6.10 लाख मौतें दर्ज हुईं — पिछले वर्ष की तुलना में मामूली वृद्धि।
  • ग्रेटर मेकांग उपक्षेत्र में मलेरिया मामलों में 90 प्रतिशत तक की गिरावट हासिल की गई।
  • अफ्रीका में आर्टेमिसिनिन के प्रति आंशिक दवा प्रतिरोध और कीटनाशक प्रतिरोध बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं।
  • नई पीढ़ी की मच्छरदानियां अब 84 प्रतिशत वितरण में शामिल, मौसमी रोकथाम कार्यक्रम करोड़ों बच्चों तक पहुंचे।

नई दिल्ली, 25 अप्रैलविश्व मलेरिया दिवस 2025 पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक ऐतिहासिक वैश्विक अभियान की शुरुआत की है, जिसका नारा है — 'मलेरिया उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध: अब हम कर सकते हैं, अब हमें करना ही होगा।' यह महज एक स्वास्थ्य संदेश नहीं, बल्कि दशकों की वैज्ञानिक मेहनत और वैश्विक इच्छाशक्ति का परिणाम है। पहली बार ऐसा भरोसा बना है कि हमारे ही जीवनकाल में मलेरिया का पूर्ण उन्मूलन संभव है।

मलेरिया उन्मूलन की दिशा में वैज्ञानिक प्रगति

नई पीढ़ी के मलेरिया टीके, उन्नत उपचार पद्धतियां और मच्छरों के आनुवंशिक संशोधन जैसी अत्याधुनिक तकनीकें इस लड़ाई को नया आयाम दे रही हैं। 25 देशों में प्रतिवर्ष एक करोड़ से अधिक बच्चों को टीकाकरण के माध्यम से मलेरिया से सुरक्षित किया जा रहा है।

अगली पीढ़ी की मच्छरदानियां (नेक्स्ट जेनरेशन मॉस्क्विटो नेट) अब 84 प्रतिशत वितरण में शामिल हो चुकी हैं। इंजेक्शन आधारित नए नवाचार विकास के अंतिम चरण में हैं। राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम जमीनी स्तर पर ठोस बदलाव ला रहे हैं।

दो दशकों की उपलब्धियां — आंकड़े जो उम्मीद जगाते हैं

वर्ष 2000 से अब तक लाखों मलेरिया मामलों और करोड़ों संभावित मौतों को टाला जा चुका है। अब तक 47 देशों को आधिकारिक रूप से मलेरिया-मुक्त घोषित किया जा चुका है, जिनमें हाल के वर्षों में भी नए देश जुड़े हैं।

ग्रेटर मेकांग उपक्षेत्र ने यह सिद्ध कर दिखाया है कि दवा प्रतिरोध और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद लगभग 90 प्रतिशत तक मामलों में गिरावट हासिल की जा सकती है। कई देशों में वार्षिक मामले एक हजार से नीचे आ गए हैं।

चुनौतियां अभी भी गंभीर — 2024 के आंकड़े चेतावनी दे रहे हैं

विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2025 के अनुसार, वर्ष 2024 में अनुमानित 28 करोड़ 20 लाख (282 मिलियन) मलेरिया मामले दर्ज किए गए और 6 लाख 10 हजार मौतें हुईं — जो पिछले वर्ष की तुलना में मामूली वृद्धि है। यह संकेत है कि प्रगति के बावजूद खतरा अभी टला नहीं है।

अफ्रीका के कई देशों में आर्टेमिसिनिन के प्रति आंशिक दवा प्रतिरोध सामने आया है और इसके फैलने का गंभीर खतरा बना हुआ है। कीटनाशकों के प्रति मच्छरों की प्रतिरोधक क्षमता भी तेजी से बढ़ रही है।

इसके अलावा, वैश्विक स्वास्थ्य सहायता में कटौती, वित्तीय संसाधनों की भारी कमी और जलवायु परिवर्तन, सशस्त्र संघर्ष तथा मानवीय संकट जैसी परिस्थितियां इस लड़ाई को और जटिल बना रही हैं।

भारत और वैश्विक रणनीति — आगे की राह

भारत भी मलेरिया उन्मूलन की दिशा में सक्रिय है। राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत देशभर में मौसमी और बारहमासी रासायनिक रोकथाम कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जो करोड़ों बच्चों तक पहुंच चुके हैं। पहले की तुलना में अधिक बच्चों का समय पर परीक्षण और प्रभावी उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।

गौरतलब है कि WHO ने यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत नेतृत्व, स्थानीय जरूरतों के अनुसार रणनीति और वैश्विक साझेदारों के बीच समन्वित सहयोग ही दीर्घकालिक सफलता की कुंजी है। अनुसंधान और नवाचार में निवेश नई चुनौतियों से निपटने का रास्ता खोलता है, जबकि सामुदायिक सशक्तिकरण इस अभियान की रीढ़ है।

आज जब साधन, तकनीक और ज्ञान सब मौजूद हैं, तो यह सवाल और भी तीखा हो जाता है — आखिर मलेरिया से किसी की जान क्यों जाए? विश्व मलेरिया दिवस 2025 यही संदेश देता है कि अगर अभी एकजुट होकर कदम न उठाए गए, तो यह ऐतिहासिक अवसर हाथ से निकल सकता है। आने वाले वर्षों में WHO और वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों की प्रगति रिपोर्टें यह तय करेंगी कि यह संकल्प वास्तविकता बन पाता है या नहीं।

Point of View

पर राजनीतिक इच्छाशक्ति और फंडिंग पीछे रह जाती है। 2024 में 28.2 करोड़ मामले तब आए जब दुनिया के पास टीके, उन्नत मच्छरदानियां और प्रभावी दवाएं मौजूद थीं — यह विफलता वैज्ञानिक नहीं, प्रशासनिक और वित्तीय है। अफ्रीका में आर्टेमिसिनिन प्रतिरोध का फैलना और वैश्विक स्वास्थ्य सहायता में कटौती एक खतरनाक संयोग है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नजरअंदाज करती है। भारत के लिए यह सबक है कि उन्मूलन की घोषणाएं तब तक अधूरी हैं जब तक जमीनी स्वास्थ्य ढांचा, सामुदायिक भागीदारी और निरंतर निवेश सुनिश्चित न हो।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

विश्व मलेरिया दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
विश्व मलेरिया दिवस हर वर्ष 25 अप्रैल को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मलेरिया की रोकथाम, नियंत्रण और उन्मूलन के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना और सरकारों व संगठनों को ठोस कदम उठाने के लिए प्रेरित करना है।
2025 में विश्व मलेरिया दिवस की थीम क्या है?
WHO के नेतृत्व में इस वर्ष की थीम है — 'मलेरिया उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध: अब हम कर सकते हैं, अब हमें करना ही होगा।' यह थीम वैज्ञानिक प्रगति और तत्काल वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
2024 में दुनियाभर में मलेरिया के कितने मामले दर्ज हुए?
विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2025 के अनुसार, 2024 में अनुमानित 28 करोड़ 20 लाख (282 मिलियन) मलेरिया मामले दर्ज हुए और 6 लाख 10 हजार मौतें हुईं, जो पिछले वर्ष की तुलना में मामूली वृद्धि दर्शाती हैं।
कितने देश अब तक मलेरिया-मुक्त घोषित हो चुके हैं?
अब तक 47 देशों को आधिकारिक रूप से मलेरिया-मुक्त घोषित किया जा चुका है। इनमें हाल के वर्षों में भी नए देश शामिल हुए हैं, जो इस वैश्विक अभियान की सफलता का प्रमाण है।
मलेरिया उन्मूलन में सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं?
मलेरिया उन्मूलन की राह में दवा प्रतिरोध (विशेषकर आर्टेमिसिनिन के प्रति), कीटनाशक प्रतिरोध, वैश्विक स्वास्थ्य फंडिंग में कटौती, जलवायु परिवर्तन और सशस्त्र संघर्ष प्रमुख बाधाएं हैं। ये सभी कारक मिलकर प्रगति को धीमा कर रहे हैं।
Nation Press