'यादव जी की लव स्टोरी' पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की सुनवाई से किया इंकार

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'यादव जी की लव स्टोरी' पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की सुनवाई से किया इंकार

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने 'यादव जी की लव स्टोरी' फिल्म के टाइटल और रिलीज पर रोक की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि टाइटल से यादव समुदाय की छवि को कोई नुकसान नहीं है। फिल्म 27 फरवरी को रिलीज होगी।

Key Takeaways

सुप्रीम कोर्ट ने 'यादव जी की लव स्टोरी' की याचिका को खारिज किया। फिल्म का टाइटल विवादित नहीं है। फिल्म 27 फरवरी को रिलीज होगी। यादव समुदाय का विरोध जारी है। प्रगति तिवारी ने फिल्म को लेकर स्पष्टीकरण दिया।

नई दिल्ली, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रगति तिवारी, विशाल मोहन, अंकित बढ़ाना और सुखविंदर विक्की की अभिनीत फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' के टाइटल और रिलीज पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

हालांकि, कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि फिल्म का टाइटल यादव समुदाय की छवि को नुकसान नहीं पहुंचाता।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से याचिका पर सुनवाई से मना करते हुए कहा कि टाइटल में ऐसी कोई विवादित बात नहीं है, जैसा कि 'घूसखोर पंडित' में था। यह मामला घूसखोर पंडित से अलग है और फिल्म का टाइटल यादव समुदाय की प्रतिष्ठा को प्रभावित नहीं करता। जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि किसी फिल्म के टाइटल को केवल इस आधार पर असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता कि उससे किसी समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से फिल्म की रिलीज पर लगे संशय अब समाप्त हो चुके हैं। फिल्म २७ फरवरी को, यानी २ दिन बाद, सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी। फिल्म का टाइटल और ट्रेलर में यादव समुदाय की लड़की का एक विशेष वर्ग के व्यक्ति के साथ प्रेम संबंध होने के कारण विरोध हो रहा है। उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में फिल्म के खिलाफ नारेबाजी की गई और फिल्म के पोस्टर भी जलाए गए थे। यादव समुदाय का मानना है कि टाइटल और फिल्म की कहानी से उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई जा रही है।

सोशल मीडिया पर भी फिल्म के बैन की मांग उठ रही है और लीड किरदारों को भी निशाना बनाया गया है। फिल्म में लीड रोल अदा करने वाली प्रगति तिवारी ने भी इस संबंध में स्पष्टीकरण दिया कि फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है जो किसी समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचाए। अब कोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि फिल्म में कुछ भी असंवैधानिक नहीं है। फिल्म को सेंसर बोर्ड ने पहले ही सर्टिफिकेट प्रदान कर दिया था और रिलीज का आदेश जारी किया था।

Point of View

जिसमें कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी फिल्म का टाइटल केवल आशंका के आधार पर असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता। यह निर्णय फिल्म उद्योग में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मजबूत करता है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर क्यों सुनवाई नहीं की?
कोर्ट ने कहा कि फिल्म का टाइटल यादव समुदाय की छवि को नुकसान नहीं पहुंचाता।
फिल्म कब रिलीज होगी?
फिल्म 27 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
क्या फिल्म को सेंसर बोर्ड ने मंजूरी दी थी?
हाँ, फिल्म को सेंसर बोर्ड ने पहले ही सर्टिफिकेट प्रदान किया था।
फिल्म के खिलाफ किस तरह का विरोध हो रहा है?
फिल्म के पोस्टर जलाने और नारेबाजी के माध्यम से विरोध हो रहा है।
प्रगति तिवारी ने फिल्म के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है जो किसी समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचाए।
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