योगेन्द्र उपाध्याय का आदेश: परीक्षा शुल्क में अनधिकृत वसूली पर होगा ऑडिट
सारांश
Key Takeaways
- योगेन्द्र उपाध्याय ने परीक्षा शुल्क पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
- अधिक शुल्क वसूली पर ऑडिट और कार्रवाई की जाएगी।
- छात्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
- विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए परीक्षा शुल्क निर्धारित किया गया है।
- सरकार शिक्षा को सुलभ, सस्ता और पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
लखनऊ, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने राज्य के विश्वविद्यालयों को आदेश दिए हैं कि वे केवल शासनादेश में निर्धारित परीक्षा शुल्क की सीमा के अनुसार ही शुल्क लें। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसी विश्वविद्यालय ने निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली की, तो उसका ऑडिट कराया जाएगा और उचित कार्रवाई की जाएगी।
सोमवार को विधानसभा में आयोजित समीक्षा बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री ने लखनऊ विश्वविद्यालय और उससे जुड़े महाविद्यालयों द्वारा शासनादेश के खिलाफ फीस वसूलने के मामलों की गहराई से जांच की।
बैठक में विश्वविद्यालयों की शुल्क संरचना, परीक्षा शुल्क और वित्तीय प्रबंधन पर चर्चा की गई। मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा को सुलभ, सस्ता और पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। यदि किसी विश्वविद्यालय ने निर्धारित शुल्क से अधिक परीक्षा शुल्क लिया, तो उसकी वित्तीय ऑडिट कराई जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार छात्रहित को प्राथमिकता दे रही है। फीस में अव्यवस्थित बढ़ोतरी से गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने में मुश्किल होती है, इसलिए विश्वविद्यालयों को निर्णय लेते समय छात्रहित को ध्यान में रखना चाहिए।
शासन द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, राज्य विश्वविद्यालयों में परीक्षा शुल्क की समानता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए प्रति सेमेस्टर शुल्क तय किया गया है। इसके अनुसार बीए, बीएससी, बीकॉम, बीबीए, बीसीए, बीएड, बीपीएड, बीजेएमसी, बीएफए और बीवोक जैसे पाठ्यक्रमों के लिए ₹800, एलएलबी, बीएससी एग्रीकल्चर (ऑनर्स), बीटेक और बायोटेक जैसे पाठ्यक्रमों के लिए ₹1000 तथा बीडीएस, नर्सिंग, बीएएमएस और बीयूएमएस जैसे पाठ्यक्रमों के लिए ₹1500 प्रति सेमेस्टर परीक्षा शुल्क निर्धारित किया गया है।
उच्च शिक्षा मंत्री ने विश्वविद्यालयों को आदेश दिया कि वे शासनादेशों का अनुपालन सुनिश्चित करें और वित्तीय अनुशासन बनाए रखें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने संसाधनों को मजबूत करने, नए पाठ्यक्रम शुरू करने और वित्तीय प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में कार्य करना चाहिए, ताकि संस्थान आत्मनिर्भर बन सकें। बैठक में अधिकारियों और विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति, परीक्षा संचालन से जुड़ी चुनौतियों और संभावित समाधानों पर अपने सुझाव भी दिए।
मंत्री ने कहा कि सरकार विश्वविद्यालयों की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है, लेकिन शासनादेशों का पालन सभी संस्थानों के लिए अनिवार्य रहेगा।