क्या योगी सरकार दिव्यांग महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है?
सारांश
Key Takeaways
- योगी सरकार ने दिव्यांग महिलाओं के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है।
- प्रदेश में 1403 विशेष स्कूल दिव्यांगों के लिए चलाए जा रहे हैं।
- दिव्यांग महिलाओं के लिए डिजिटल साक्षरता का महत्व बढ़ा है।
- उत्तर प्रदेश में 271 सरकारी भवन दिव्यांगों के अनुकूल हैं।
- उद्देश्य है 2026 तक सभी दिव्यांग महिलाओं को सशक्त बनाना।
लखनऊ, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में दिव्यांग महिलाओं का सशक्तिकरण एक नई दिशा में बढ़ रहा है। प्रदेश में केंद्र सरकार की 'सुगम्य भारत अभियान' और 'डिजिटल इंडिया' की संयुक्त पहल ने दिव्यांगजनों, विशेषकर महिलाओं के सशक्तिकरण और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके साथ ही, योगी सरकार का डिजिटल साक्षरता अभियान और समावेशी अवसरों ने उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 में दिव्यांगों के लिए बढ़े हुए 4 प्रतिशत आरक्षण को लागू किया, जिससे 3 लाख से अधिक नौकरियों के अवसर उपलब्ध हुए, जिसमें दिव्यांग महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण रही है।
वर्ष 2017 से पहले, दिव्यांगजनों की स्थिति दयनीय थी। पूर्व सरकारों में 1995 के अधिनियम के आधार पर केवल 3 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण ही उपलब्ध था, जिससे सरकारी नौकरियों में दिव्यांगजनों के लिए अवसर सीमित थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यभार ग्रहण करते ही, प्रदेश में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत 4 प्रतिशत आरक्षण को लागू किया, जिससे सरकारी नौकरियों में दिव्यांगों, विशेषकर दिव्यांग महिलाओं के लिए अवसरों में वृद्धि हुई। इसके परिणामस्वरूप, राज्य में 3 लाख से अधिक सरकारी नौकरियों का सृजन हुआ, जो अपने आप में एक कीर्तिमान है।
पिछली सरकारों में दिव्यांगजनों के लिए समावेशी योजनाओं पर ध्यान नहीं दिया गया। वर्तमान में, सीएम योगी के मार्गदर्शन में प्रदेश में दिव्यांगजनों के लिए 1403 विशेष स्कूल चलाए जा रहे हैं, जहां 50 प्रतिशत नामांकन लड़कियों का है। ये विद्यालय शिक्षा के साथ-साथ डिजिटल कौशल जैसे कंप्यूटर, मोबाइल ऐप्स और ऑनलाइन लर्निंग का प्रशिक्षण भी प्रदान करते हैं। चित्रकूट जिले के एक विशेष स्कूल में दिव्यांग लड़कियां अब ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से आईटी कोर्स कर रही हैं, जो पहले केवल एक सपना था।
दिव्यांगों के लिए भवनों की सुगम्यता पर भी ध्यान दिया गया है। दिसंबर 2015 में शुरू हुए केंद्र सरकार के सुगम्य भारत अभियान के बावजूद, अधिकांश सरकारी भवन दिव्यांगों के लिए अनुकूल नहीं थे। योगी सरकार में इस दिशा में तेजी से कार्य किया गया है। वर्तमान में, राज्य के 278 सरकारी भवनों में से 271 अब पूरी तरह से दिव्यांग मित्रवत हैं।
डिजिटल मोर्चे पर, प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने 44 वेबसाइट्स को डब्ल्यू सीएजी-2.1 मानक पर पुनः डिज़ाइन किया है, जिससे दृष्टिबाधित महिलाएं स्क्रीन रीडर्स के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें। दिव्यांग पेंशन पोर्टल अब वॉयस कमांड सपोर्टेड है, जिससे ग्रामीण दिव्यांग महिलाएं भी आसानी से पेंशन प्राप्त कर पा रही हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ये प्रयास प्रदेश में दिव्यांगजनों, विशेषकर दिव्यांग महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बना रहे हैं। लखनऊ के एक डिजिटल ट्रेनिंग सेंटर में 200 से अधिक महिलाएं ई-कॉमर्स और फ्रीलांसिंग सीख रही हैं। सरकार का लक्ष्य 2026 तक सभी दिव्यांग महिलाओं को डिजिटल साक्षर बनाना है। प्रदेश में पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी तक, यह यात्रा समावेशी समाज की नींव रख रही है।