भारत का सर्विसेज पीएमआई जुलाई में 53.3 पर स्थिर, निर्यात और भर्तियों ने दिया सहारा
सारांश
मुख्य बातें
भारत का सर्विसेज पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) जुलाई में 53.3 पर रहा, जो सेवा क्षेत्र में लगातार विस्तार का संकेत देता है। एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई के बुधवार को जारी आँकड़ों के अनुसार, निर्यात माँग और नई भर्तियों ने इस वृद्धि को टिकाए रखा। उल्लेखनीय है कि 50 से ऊपर का पीएमआई विस्तार और उससे नीचे का आँकड़ा संकुचन दर्शाता है।
मुख्य घटनाक्रम
सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों ने बताया कि उन्हें यूएई, यूके और अमेरिका स्थित ग्राहकों से नए ऑर्डर मिल रहे हैं, और निर्यात ऑर्डर कुल नए कारोबार की तुलना में अधिक तेज़ गति से बढ़ रहे हैं। हालाँकि, नए कारोबार की समग्र वृद्धि दर फरवरी 2022 के बाद के सबसे कमज़ोर स्तर पर आ गई। इसके पीछे कमज़ोर घरेलू माँग, कड़ी प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों की कम पूछताछ को ज़िम्मेदार बताया गया।
भर्तियों और रोज़गार पर असर
जून में छह महीने के निचले स्तर पर पहुँचने के बाद भर्तियों की रफ़्तार में सुधार दर्ज किया गया। सर्विस प्रोवाइडर्स ने अपने कार्यबल का विस्तार जारी रखा, हालाँकि रोज़गार वृद्धि मामूली रही। विशेषज्ञों के अनुसार, सेवा क्षेत्र में यह भर्ती-गतिविधि निजी क्षेत्र में कुल रोज़गार बढ़ाने में सहायक रही।
लागत और मार्जिन की स्थिति
ईंधन, श्रम, सामग्री, प्रौद्योगिकी और परिवहन पर खर्च बढ़ने के बावजूद इनपुट लागत महंगाई छह महीने के निचले स्तर पर आ गई और दीर्घकालिक औसत से नीचे बनी रही। इसके साथ ही, कंपनियों ने अप्रैल के बाद सबसे तेज़ गति से अपनी बिक्री कीमतें बढ़ाईं, जिससे प्रॉफिट मार्जिन को सहारा मिला।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, 'जुलाई में भारत के सर्विस सेक्टर में बढ़ोतरी जारी रही, हालाँकि इसकी रफ़्तार थोड़ी धीमी थी। कई महीनों के शानदार प्रदर्शन के बाद घरेलू और निर्यात, दोनों बाज़ारों में नए कारोबार की वृद्धि में थोड़ी कमी आई। भर्तियों में हल्की रिकवरी दिखी, जबकि इनपुट लागत कम होने और कंपनियों द्वारा बिक्री कीमत बढ़ाने से प्रॉफिट मार्जिन में सुधार हुआ।'
कंपोजिट पीएमआई की स्थिति
मैन्युफैक्चरिंग और सेवाओं, दोनों पर नज़र रखने वाला एचएसबीसी इंडिया कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स जुलाई में 54.3 पर रहा। यह आँकड़ा निजी क्षेत्र की गतिविधियों में निरंतर विस्तार को रेखांकित करता है। आगामी महीनों में निर्यात माँग और घरेलू खपत की दिशा यह तय करेगी कि यह विस्तार टिकाऊ बनेगा या नहीं।