भारत का सर्विसेज PMI जुलाई में 53.3 पर स्थिर, निर्यात और भर्तियों ने थामी रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
भारत का सर्विसेज पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) जुलाई 2026 में 53.3 पर रहा, जो सेवा क्षेत्र में लगातार विस्तार का संकेत देता है। एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज PMI के ताज़ा आँकड़े बुधवार, 5 अगस्त को जारी किए गए, जिनमें निर्यात माँग और नई भर्तियों को विस्तार का प्रमुख आधार बताया गया। उल्लेखनीय है कि PMI का 50 से ऊपर रहना सेक्टर में वृद्धि का संकेत माना जाता है।
मुख्य घटनाक्रम
PMI सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों ने बताया कि यूएई, यूके और अमेरिका के ग्राहकों से नए निर्यात ऑर्डर मिल रहे हैं और ये ऑर्डर कुल नए बिजनेस की तुलना में अधिक तेज़ गति से बढ़ रहे हैं। हालाँकि, नए बिजनेस के प्रवाह की रफ्तार फरवरी 2022 के बाद सबसे कमज़ोर स्तर पर आ गई — जिसकी वजह कमज़ोर घरेलू माँग, कड़ी प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों की घटती पूछताछ रही।
जून में छह महीने के निचले स्तर पर पहुँचने के बाद भर्तियों की स्थिति में सुधार देखा गया। सर्विस प्रोवाइडर्स ने अपना वर्कफोर्स बढ़ाना जारी रखा, हालाँकि रोज़गार में बढ़ोतरी मामूली रही। सर्विस सेक्टर में तेज़ भर्तियों ने प्राइवेट सेक्टर में कुल रोज़गार विस्तार को सहारा दिया।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, 'जुलाई में भारत के सर्विस सेक्टर में बढ़ोतरी जारी रही, हालाँकि इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी थी। कई महीनों के शानदार प्रदर्शन के बाद घरेलू और एक्सपोर्ट मार्केट, दोनों में नए बिजनेस की ग्रोथ में थोड़ी कमी आई। भर्तियों में हल्की रिकवरी दिखी, जबकि इनपुट लागत कम होने और कंपनियों द्वारा अपनी बिक्री कीमत बढ़ाने से प्रॉफिट मार्जिन में सुधार हुआ।'
लागत और मूल्य निर्धारण
आँकड़ों के अनुसार, ईंधन, श्रम, सामग्री, तकनीक और परिवहन पर खर्च बढ़ने के बावजूद इनपुट लागत महंगाई छह महीने के निचले स्तर पर आ गई और दीर्घकालिक औसत से नीचे बनी रही। साथ ही, कंपनियों ने अप्रैल के बाद सबसे तेज़ गति से बिक्री कीमतें बढ़ाईं, जिससे प्रॉफिट मार्जिन को सहारा मिला।
कंपोजिट PMI की स्थिति
मैन्युफैक्चरिंग और सेवाओं, दोनों को एकसाथ मापने वाला एचएसबीसी इंडिया कंपोजिट PMI आउटपुट इंडेक्स जुलाई में 54.3 पर रहा। यह प्राइवेट सेक्टर की गतिविधियों में निरंतर विस्तार को दर्शाता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद भारत की सेवा अर्थव्यवस्था सापेक्षिक मज़बूती बनाए हुए है।
आगे की राह
गौरतलब है कि नए बिजनेस की वृद्धि दर का फरवरी 2022 के बाद सबसे कमज़ोर स्तर पर आना एक संकेत है कि घरेलू माँग को और प्रोत्साहन की ज़रूरत हो सकती है। निर्यात ऑर्डरों की मज़बूती इस कमी की आंशिक भरपाई कर रही है, और आने वाले महीनों में वैश्विक माँग की दिशा सर्विसेज PMI की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।