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भारत का सर्विसेज पीएमआई जुलाई में 53.3 पर स्थिर, निर्यात और भर्तियों ने थामी रफ्तार

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भारत का सर्विसेज पीएमआई जुलाई में 53.3 पर स्थिर, निर्यात और भर्तियों ने थामी रफ्तार

सारांश

जुलाई में भारत का सर्विसेज पीएमआई 53.3 पर टिका रहा — विस्तार जारी है, लेकिन रफ्तार फरवरी 2022 के बाद सबसे धीमी। यूएई, यूके और अमेरिका से निर्यात ऑर्डरों ने सहारा दिया, जबकि घरेलू माँग में नरमी चिंता का विषय बनी हुई है।

मुख्य बातें

एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई जुलाई 2025 में 53.3 पर रहा — लगातार विस्तार का संकेत।
नए बिज़नेस की वृद्धि दर फरवरी 2022 के बाद सबसे कमज़ोर स्तर पर आई।
यूएई , यूके और अमेरिका से निर्यात ऑर्डर कुल कारोबार से तेज़ रफ्तार से बढ़े।
जून में छह महीने के निचले स्तर के बाद भर्तियों में सुधार; रोज़गार वृद्धि मामूली रही।
इनपुट लागत महंगाई छह महीने के निचले स्तर पर; कंपनियों ने अप्रैल के बाद सबसे तेज़ बिक्री मूल्य वृद्धि दर्ज की।
एचएसबीसी इंडिया कंपोजिट पीएमआई जुलाई में 54.3 पर रहा।

एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, भारत के सेवा क्षेत्र ने जुलाई 2025 में 53.3 का पीएमआई दर्ज किया — जो लगातार विस्तार की स्थिति दर्शाता है। 5 अगस्त को जारी इस डेटा में निर्यात माँग और नई भर्तियों को सेक्टर की स्थिरता का मुख्य आधार बताया गया है। उल्लेखनीय है कि 50 से ऊपर का पीएमआई सेक्टर में वृद्धि का संकेत होता है।

नए बिज़नेस का प्रवाह और निर्यात माँग

सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों ने बताया कि यूएई, यूके और अमेरिका स्थित ग्राहकों से नए ऑर्डर मिल रहे हैं, जो कुल नए कारोबार की तुलना में तेज़ रफ्तार से बढ़ रहे हैं। हालाँकि जुलाई में नए बिज़नेस का प्रवाह बढ़ा, लेकिन वृद्धि की गति फरवरी 2022 के बाद से अपने सबसे कमज़ोर स्तर पर आ गई। कमज़ोर घरेलू माँग, कड़ी प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों की घटती पूछताछ को इसके प्रमुख कारण बताया गया।

भर्तियों में सुधार, रोज़गार पर असर

जून में छह महीने के निचले स्तर पर पहुँचने के बाद भर्तियों की स्थिति में सुधार दर्ज किया गया और सेवा प्रदाताओं ने अपने कार्यबल का विस्तार जारी रखा। रोज़गार में बढ़ोतरी मामूली रही, लेकिन सेवा क्षेत्र में तेज़ भर्तियों ने निजी क्षेत्र में कुल रोज़गार वृद्धि को सहारा दिया।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, 'जुलाई में भारत के सर्विस सेक्टर में बढ़ोतरी जारी रही, हालाँकि इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी थी। कई महीनों के शानदार प्रदर्शन के बाद घरेलू और एक्सपोर्ट मार्केट, दोनों में नए बिज़नेस की ग्रोथ में थोड़ी कमी आई। भर्तियों में हल्की रिकवरी दिखी, जबकि इनपुट लागत कम होने और कंपनियों द्वारा अपनी बिक्री कीमत बढ़ाने से प्रॉफिट मार्जिन में सुधार हुआ।'

लागत और मूल्य निर्धारण की स्थिति

ईंधन, श्रम, सामग्री, तकनीक और परिवहन पर बढ़े खर्च के बावजूद इनपुट लागत महंगाई छह महीने के निचले स्तर पर आ गई और दीर्घकालिक औसत से नीचे बनी रही। इसके साथ ही कंपनियों ने अप्रैल के बाद सबसे तेज़ रफ्तार से बिक्री मूल्य बढ़ाए, जिससे मार्जिन को राहत मिली।

कंपोजिट पीएमआई और आगे की राह

मैन्युफैक्चरिंग और सेवाओं, दोनों पर नज़र रखने वाला एचएसबीसी इंडिया कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स जुलाई में 54.3 पर रहा, जो निजी क्षेत्र की गतिविधियों में निरंतर विस्तार को रेखांकित करता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक माँग में अनिश्चितता के बीच भारतीय सेवा निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता एक महत्त्वपूर्ण संकेतक बनी हुई है। आने वाले महीनों में घरेलू माँग की बहाली और निर्यात बाज़ारों में ऑर्डर प्रवाह की दिशा इस क्षेत्र की गति तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नए बिज़नेस की रफ्तार का फरवरी 2022 के बाद सबसे कमज़ोर होना एक सतर्क करने वाला संकेत है। असली चिंता यह है कि विस्तार का आधार धीरे-धीरे घरेलू माँग से खिसककर निर्यात पर टिकता जा रहा है — जो वैश्विक अनिश्चितता के दौर में एक कमज़ोर नींव है। इनपुट लागत में राहत और मार्जिन सुधार सकारात्मक हैं, लेकिन यदि घरेलू खपत में नरमी बनी रही तो अगले तिमाही के आँकड़े और दबाव में आ सकते हैं।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का सर्विसेज पीएमआई जुलाई 2025 में कितना रहा?
एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई जुलाई 2025 में 53.3 रहा, जो सेवा क्षेत्र में निरंतर विस्तार का संकेत देता है। 50 से ऊपर का पीएमआई वृद्धि और 50 से नीचे संकुचन दर्शाता है।
पीएमआई में गिरावट की वजह क्या रही?
नए बिज़नेस की वृद्धि दर फरवरी 2022 के बाद सबसे कमज़ोर स्तर पर आई। कमज़ोर घरेलू माँग, कड़ी प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों की घटती पूछताछ को इसके प्रमुख कारण बताया गया।
भारत के सर्विस सेक्टर में भर्तियों की क्या स्थिति है?
जून में छह महीने के निचले स्तर पर पहुँचने के बाद जुलाई में भर्तियों में सुधार दर्ज हुआ। रोज़गार वृद्धि मामूली रही, लेकिन सेवा क्षेत्र की भर्तियों ने निजी क्षेत्र में कुल रोज़गार को सहारा दिया।
एचएसबीसी इंडिया कंपोजिट पीएमआई जुलाई में कितना रहा?
मैन्युफैक्चरिंग और सेवाओं दोनों को मापने वाला एचएसबीसी इंडिया कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स जुलाई 2025 में 54.3 पर रहा, जो निजी क्षेत्र में लगातार विस्तार को दर्शाता है।
भारत के सर्विस सेक्टर को निर्यात से कितना फायदा हो रहा है?
यूएई, यूके और अमेरिका के ग्राहकों से मिले निर्यात ऑर्डर कुल नए कारोबार की तुलना में तेज़ रफ्तार से बढ़ रहे हैं। हालाँकि घरेलू माँग में नरमी के बीच निर्यात पर बढ़ती निर्भरता एक जोखिम कारक भी बन सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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