PMAY-U 2.0: 18.77 लाख घरों को मंजूरी, 20 लाख के माइलस्टोन के करीब; 92% घर महिलाओं को आवंटित
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री आवास योजना अर्बन 2.0 (PMAY-U 2.0) तेज़ रफ़्तार से 20 लाख घरों की मंजूरी के ऐतिहासिक पड़ाव की ओर बढ़ रही है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) के अनुसार, अब तक 18.77 लाख घरों को स्वीकृति दी जा चुकी है, जिससे शहरी गरीब परिवारों को किफायती, सुरक्षित और पक्का मकान मिलने का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। 12 सितंबर 2026 को जारी सरकारी बयान में इसे 'सभी के लिए घर' के लक्ष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया गया।
योजना की प्रमुख उपलब्धियाँ
मंजूर किए गए 18.77 लाख घरों में से 17.19 लाख घर — यानी कुल का 92 प्रतिशत — महिलाओं को आवंटित किए गए हैं। यह आँकड़ा योजना के लैंगिक समावेश की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए, बुजुर्गों को 1.80 लाख घर आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति (SC) लाभार्थियों के लिए लगभग 3.25 लाख, अनुसूचित जनजाति (ST) लाभार्थियों के लिए 1.02 लाख और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) लाभार्थियों के लिए 8.22 लाख घरों को स्वीकृति दी गई है।
PMAY-U और PMAY-U 2.0 की संयुक्त प्रगति
गौरतलब है कि PMAY-U और PMAY-U 2.0 दोनों चरणों को मिलाकर 1.25 करोड़ से अधिक घरों को मंजूरी दी जा चुकी है, जबकि 1 करोड़ से अधिक घर पूरी तरह निर्मित होकर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं। यह आँकड़ा शहरी आवास के क्षेत्र में देश के अब तक के सबसे बड़े सरकारी कार्यक्रमों में से एक का प्रमाण है।
लाभार्थियों को मिलने वाले विकल्प
PMAY-U 2.0 के अंतर्गत पात्र EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग), LIG (निम्न आय वर्ग) और MIG (मध्यम आय वर्ग) परिवारों को कई आवासीय विकल्प उपलब्ध कराए जाते हैं। लाभार्थी स्वयं पक्का घर बना सकते हैं, योजना के तहत विकसित परियोजनाओं में घर खरीद सकते हैं, किफायती किराये के आवास का लाभ उठा सकते हैं, अथवा पात्र गृह ऋण पर ब्याज सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और निगरानी तंत्र
MoHUA के शहरी विकास विभाग के सचिव सतेंद्र सिंह ने कहा कि योजना को समय पर और प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि इसका लाभ सभी पात्र लाभार्थियों तक पहुँच सके। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी तरह की बाधाओं की तत्काल पहचान कर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय के ज़रिये उन्हें दूर किया जाए।
यह ऐसे समय में आया है जब शहरी प्रवासन की दर बढ़ रही है और छोटे व मझोले शहरों में किफायती आवास की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। केंद्र की यह पहल उन शहरी परिवारों के लिए विशेष महत्व रखती है जो वर्षों से किराये के मकानों या अनधिकृत बस्तियों में रहने को मजबूर थे।
आगे की राह
20 लाख घरों के माइलस्टोन के निकट पहुँचने के साथ, सरकार का ध्यान अब स्वीकृत घरों के शीघ्र निर्माण और लाभार्थियों तक वास्तविक हस्तांतरण पर केंद्रित है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय को और मजबूत किए जाने की उम्मीद है, ताकि मंजूरियाँ केवल कागज़ों तक सीमित न रहकर ज़मीन पर घर के रूप में साकार हों।