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क्या अद्भुत अजीत अगरकर ने विश्व क्रिकेट में स्विंग के महारथी के रूप में अपनी छाप छोड़ी?

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क्या अद्भुत अजीत अगरकर ने विश्व क्रिकेट में स्विंग के महारथी के रूप में अपनी छाप छोड़ी?

सारांश

अजीत अगरकर, भारतीय क्रिकेट के तेज गेंदबाज, ने अपनी अद्वितीय स्विंग गेंदबाजी और बल्ले से योगदान से विश्व क्रिकेट में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया। उनके करियर के कुछ दिलचस्प क्षणों पर नजर डालते हैं।

मुख्य बातें

अजीत अगरकर ने तेज गेंदबाजी में अपनी पहचान बनाई।
उन्होंने वनडे में सबसे तेज अर्धशतक बनाया।
उनकी गेंदबाजी ने भारतीय टीम को कई जीत दिलाई।
बीसीसीआई ने उन्हें मुख्य चयनकर्ता के रूप में नियुक्त किया।
अजीत अगरकर का करियर प्रेरणा का स्रोत है।

नई दिल्ली, 3 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस) – भारतीय क्रिकेट टीम के सम्मानित पूर्व खिलाड़ी अजीत अगरकर ने तेज गेंदबाजी के क्षेत्र में विश्व क्रिकेट पर एक अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने महत्वपूर्ण क्षणों में बल्ले से भी अपनी भूमिका निभाई है। अगरकर को व्हाइट बॉल क्रिकेट में नई गेंद से स्विंग कराने की अपनी अद्वितीय क्षमता के लिए जाना जाता है।

सटीक लाइन-लेंथ के साथ, अजीत अगरकर प्रारंभिक ओवरों में महत्वपूर्ण विकेट निकालकर मैच का रुख बदलने में सक्षम थे। उनकी सीम मूवमेंट और तेज गेंदबाजी उनकी विशिष्ट ताकत रही।

4 दिसंबर 1977 को बॉम्बे (मुंबई) में जन्मे अजीत बालचंद्र अगरकर ने 1996/97 में फर्स्ट क्लास और लिस्ट-ए क्रिकेट में अपने करियर की शुरुआत की। अपनी शानदार प्रदर्शनी के चलते उन्होंने जल्दी ही भारतीय सीनियर टीम में जगह बनाई।

उन्होंने 1 अप्रैल 1998 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने पहले वनडे मैच में कदम रखा। छह महीनों बाद, उन्हें टेस्ट फॉर्मेट में भी खेलने का अवसर मिला।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करते हुए, दुबले-पतले और जोशीले अगरकर ने अपनी प्रतिभा से सभी का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने 1998 में वनडे फॉर्मेट में 30 मैच खेले, जिसमें 23.75 की औसत से 58 विकेट लिए।

30 सितंबर 1998 को हरारे में, अगरकर ने मात्र 23 गेंदों में अर्धशतक बनाकर उस समय का सबसे तेज वनडे अर्धशतक बनाया। वर्तमान में भी, वह सबसे तेज वनडे अर्धशतक लगाने वाले खिलाड़ियों में तीसरे स्थान पर हैं।

जुलाई 2002 में लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर उनका प्रदर्शन शायद ही कोई भुला सके। उस टेस्ट की दूसरी पारी में उन्होंने 190 गेंदों में 16 चौकों के साथ नाबाद 109 रन बनाए। हालांकि, भारत इस मैच को नहीं बचा सका। कुछ प्रशंसकों को उनमें कपिल देव की छवि दिखाई दी।

दिसंबर 2003 में, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में खेले गए टेस्ट में उन्होंने 8 विकेट लिए, जिससे भारत ने 4 विकेट से जीत हासिल की।

अगरकर की आक्रामकता उनकी विशेषता थी। धीरे-धीरे, वह एक वनडे विशेषज्ञ बन गए और 2005-06 के बीच, उन्होंने भारत के सबसे प्रभावी वनडे गेंदबाजों की सूची में जगह बनाई।

अजीत अगरकर ने भारत के लिए 26 टेस्ट मैचों में 47.32 की औसत से 58 विकेट प्राप्त किए। इस फॉर्मेट में, उनके नाम एक शतक के साथ कुल 571 रन हैं।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने 191 वनडे मैचों में 288 विकेट लिए और 3 अर्धशतकों की मदद से 1,269 रन बनाए। अगरकर ने भारत के लिए 4 T20 मैच भी खेले, जिसमें 3 विकेट लिए।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने जून 2023 में अजीत अगरकर को भारतीय क्रिकेट टीम का मुख्य चयनकर्ता नियुक्त किया। उनके कार्यकाल को जून 2026 तक बढ़ा दिया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अजीत अगरकर का जन्म कब हुआ?
अजीत अगरकर का जन्म 4 दिसंबर 1977 को बॉम्बे (मुंबई) में हुआ था।
अजीत अगरकर ने कब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया?
उन्होंने 1 अप्रैल 1998 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने पहले वनडे में डेब्यू किया।
अगरकर की प्रमुख उपलब्धियां क्या हैं?
उन्होंने 191 वनडे में 288 विकेट और 26 टेस्ट में 58 विकेट लिए।
अजीत अगरकर ने कब मुख्य चयनकर्ता के रूप में कार्यभार संभाला?
बीसीसीआई ने उन्हें जून 2023 में मुख्य चयनकर्ता के रूप में नियुक्त किया।
क्या अजीत अगरकर को कपिल देव की तरह देखा जाता है?
कुछ प्रशंसक उन्हें कपिल देव की छवि के रूप में देखते हैं, विशेष रूप से उनकी बल्लेबाजी के लिए।
राष्ट्र प्रेस
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