अनूप श्रीधर: बैडमिंटन के दिग्गज से कोचिंग के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों की ओर
सारांश
Key Takeaways
- अनूप श्रीधर का बैडमिंटन करियर अद्वितीय रहा है।
- उन्होंने कोचिंग में युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने का निर्णय लिया।
- उनकी उपलब्धियों से भारतीय बैडमिंटन को पहचान मिली।
- अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
- सिंगापुर की राष्ट्रीय टीम के कोच के रूप में कार्य किया।
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अनूप श्रीधर को भारतीय बैडमिंटन के महान एकल खिलाड़ियों में गिना जाता है। एक लंबे और सफल करियर के बाद, श्रीधर अब कोचिंग क्षेत्र में नई पारी की शुरुआत कर रहे हैं।
अनूप श्रीधर का जन्म 11 अप्रैल 1983 को बेंगलुरु में हुआ। उन्होंने बैडमिंटन की बारीकियां मशहूर खिलाड़ी और कोच प्रकाश पादुकोण से सीखी हैं। इसके साथ ही, विमल कुमार के मार्गदर्शन में भी उन्होंने प्रशिक्षण लिया।
श्रीधर ने 2000 के दशक की शुरुआत में भारत के प्रमुख एकल खिलाड़ियों में अपनी पहचान बनाई। 2006 में मेलबर्न में मिश्रित टीम के साथ उन्होंने कांस्य पदक जीता। इसके अलावा, 2007 में मलेशिया में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में पुरुष एकल में कांस्य पदक जीता। उन्होंने 2008 के बीजिंग ओलंपिक्स में भाग लेकर भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान किया। उस समय भारत के लिए ओलंपिक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी।
उनकी सबसे बड़ी और प्रसिद्ध जीत 2004 के एथेंस ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले और 2005 के विश्व चैंपियन, इंडोनेशिया के पूर्व नंबर एक खिलाड़ी तौफिक हिदायत के खिलाफ मानी जाती है।
श्रीधर ने अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ विश्व रैंकिंग (24) जनवरी 2010 में हासिल की थी। 1.89 मीटर लंबे इस खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन में उनके दमदार स्मैश के लिए भी जाना जाता है।
बैडमिंटन में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2008 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था।
अनूप श्रीधर ने बैडमिंटन से संन्यास लेने के बाद कोचिंग के क्षेत्र में कदम रखा है। उन्होंने अनूप श्रीधर बैडमिंटन एकेडमी की स्थापना की है, जो युवा खिलाड़ियों को बुनियादी तकनीक, फुटवर्क और मानसिक मजबूती सिखाने पर केंद्रित है।
उनकी क्षमता को देखते हुए 2025 में उन्हें सिंगापुर राष्ट्रीय बैडमिंटन टीम के एकल कोच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनके नेतृत्व में टीम ने दक्षिण-पूर्व एशियाई खेलों में पदक जीता। जनवरी 2026 में उन्होंने इस पद से इस्तीफा देकर भारत लौटने का निर्णय लिया।
अब वह भारत में युवा खिलाड़ियों को बैडमिंटन में दक्ष बनाने में निरंतर योगदान दे रहे हैं और एक खिलाड़ी के बाद एक मास्टर के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।