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दिलीप ट्रॉफी में अर्शदीप सिंह के 4 विकेट, टेस्ट डेब्यू की दावेदारी हुई मज़बूत

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दिलीप ट्रॉफी में अर्शदीप सिंह के 4 विकेट, टेस्ट डेब्यू की दावेदारी हुई मज़बूत

सारांश

व्हाइट-बॉल विशेषज्ञ की छवि से बाहर निकलने की कोशिश में अर्शदीप सिंह ने दिलीप ट्रॉफी को अपना मंच बनाया। बेंगलुरु में 4 विकेट और 52 रनों की जीत — यह सिर्फ टूर्नामेंट का नतीजा नहीं, बल्कि टेस्ट टीम के दरवाज़े पर एक दस्तक है।

मुख्य बातें

अर्शदीप सिंह ने दिलीप ट्रॉफी क्वार्टर-फाइनल में वेस्ट जोन के खिलाफ दोनों पारियों में 4 विकेट (3/53 और 1/40) लिए।
नॉर्थ जोन ने बेंगलुरु में 52 रनों से जीत दर्ज की।
अर्शदीप 18 वनडे और 91 टी20 इंटरनेशनल खेल चुके हैं, लेकिन अभी तक टेस्ट डेब्यू नहीं हुआ।
उनके 22वें और 23वें फर्स्ट-क्लास मैच के बीच लगभग एक साल का अंतर रहा।
2023 में अर्शदीप ने इंग्लैंड के केंट के लिए 5 काउंटी मैच खेले थे।
नॉर्थ जोन के हेड कोच अजय शर्मा ने उन्हें रेड-बॉल क्रिकेट में धैर्य और दूसरे स्पेल की अहमियत समझाई।

तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने दिलीप ट्रॉफी के क्वार्टर-फाइनल में बेंगलुरु में वेस्ट जोन के खिलाफ दोनों पारियों में कुल 4 विकेट लेकर नॉर्थ जोन को 52 रनों से जीत दिलाई। 18 वनडे और 91 टी20 इंटरनेशनल मैचों का अनुभव रखने वाले अर्शदीप अभी भी अपने टेस्ट डेब्यू की प्रतीक्षा में हैं और इस प्रदर्शन के ज़रिए उन्होंने चयनकर्ताओं को अपनी लाल-गेंद क्षमता का संदेश देने की कोशिश की है।

मैच में अर्शदीप का प्रदर्शन

बेंगलुरु के क्वार्टर-फाइनल में अर्शदीप ने पहली पारी में 3 विकेट 53 रन देकर और दूसरी पारी में 1 विकेट 40 रन देकर लगातार दबाव बनाए रखा। उनकी गेंदबाज़ी की बदौलत नॉर्थ जोन ने वेस्ट जोन को 52 रनों से पराजित किया। यह प्रदर्शन इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि बेंगलुरु की पिच स्पिनरों के अनुकूल थी और तेज गेंदबाज़ों के लिए परिस्थितियाँ आसान नहीं थीं।

टेस्ट डेब्यू की तैयारी और लाल-गेंद पर फोकस

27 वर्षीय अर्शदीप ने स्वीकार किया कि व्हाइट-बॉल क्रिकेट में व्यस्तता के कारण उनके 22वें और 23वें फर्स्ट-क्लास मैच के बीच लगभग एक साल का अंतर आ गया। उन्होंने बताया कि दिलीप ट्रॉफी से पहले उन्होंने जानबूझकर रेड-बॉल बॉलिंग पर ध्यान केंद्रित किया।

क्रिकइन्फो के अनुसार अर्शदीप ने कहा, 'मुझे लाल-गेंद की क्रिकेट खेलने का मौका बहुत कम मिलता है, और यह एक ऐसा ही मौका था। मैं अपनी काबिलियत दिखाना चाहता था और यह देखना चाहता था कि मैं कितने ओवर फेंक सकता हूँ। लय अच्छी लग रही है। शरीर में दर्द है, लेकिन यह अच्छा दर्द है क्योंकि हमें जीत मिली है।'

उन्होंने आगे कहा, 'इस बार मुझे पता था कि दिलीप ट्रॉफी आने वाली है, इसलिए मैं रेड बॉल से प्रैक्टिस कर रहा था। जब व्हाइट-बॉल सीजन आने वाला होता है, तो आप व्हाइट बॉल से प्रैक्टिस करते हैं — यह सीजन की ज़रूरत पर आधारित ट्रेनिंग होती है।'

कोच की सलाह और रेड-बॉल की खासियत

नॉर्थ जोन के हेड कोच अजय शर्मा ने अर्शदीप को रेड-बॉल क्रिकेट की एक अहम विशेषता समझाई। अर्शदीप के अनुसार, 'कोच ने कहा कि अगर नई गेंद से विकेट नहीं भी मिलते, तो दूसरे स्पेल में वापसी का मौका होता है — रेड-बॉल क्रिकेट की यही खासियत है।' यह सोच उनकी गेंदबाज़ी में साफ दिखी, जहाँ उन्होंने धैर्यपूर्वक अपनी लेंथ बनाए रखी।

काउंटी अनुभव और व्यस्त शेड्यूल की चुनौती

अर्शदीप 2023 में इंग्लैंड के केंट के लिए 5 काउंटी मैच खेल चुके हैं और उनका मानना है कि इंग्लिश परिस्थितियों में रेड-बॉल क्रिकेट का अनुभव बेशकीमती है। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आईपीएल, घरेलू व्हाइट-बॉल सीजन और घरेलू क्रिकेट के चलते दोबारा काउंटी खेलना फिलहाल संभव नहीं है।

उन्होंने कहा, 'यहाँ भी अहम मैच खेले जा रहे हैं। हम अपने घरेलू क्रिकेट को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उसका स्तर न गिरे।'

पिच की चुनौती और रणनीतिक सोच

बेंगलुरु की पिच स्पिनरों के लिए मददगार थी, जिससे तेज गेंदबाज़ों को रणनीति बदलनी पड़ी। अर्शदीप ने बताया, 'जब पिच से मदद मिलती है तो धैर्य रखकर सही लेंथ पर गेंदबाज़ी करते हैं। लेकिन जब केवल वेरिएबल बाउंस हो, तो फील्ड के हिसाब से खेलना होता है और अलग-अलग चीजें आज़मानी पड़ती हैं।' यह परिपक्वता उनके टेस्ट क्रिकेट के प्रति गंभीर रवैये को दर्शाती है।

दिलीप ट्रॉफी में यह प्रदर्शन अर्शदीप के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है — अब नज़रें अगले दौर और संभावित टेस्ट चयन पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और दो फर्स्ट-क्लास मैचों के बीच एक साल का अंतराल, यह BCCI के शेड्यूलिंग की उस प्राथमिकता को उजागर करता है जो घरेलू लाल-गेंद क्रिकेट को अक्सर पीछे धकेलती है। दिलीप ट्रॉफी में एक अच्छा प्रदर्शन ज़रूरी है, लेकिन पर्याप्त नहीं — जब तक चयनकर्ता व्हाइट-बॉल दबाव के बावजूद खिलाड़ियों को नियमित लाल-गेंद अवसर देने की संरचनात्मक प्रतिबद्धता नहीं दिखाते, तब तक ऐसे प्रदर्शन अपवाद बनकर रह जाएंगे, नीति नहीं।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिलीप ट्रॉफी में अर्शदीप सिंह का प्रदर्शन कैसा रहा?
अर्शदीप सिंह ने बेंगलुरु में वेस्ट जोन के खिलाफ क्वार्टर-फाइनल में पहली पारी में 3/53 और दूसरी पारी में 1/40 के आँकड़े हासिल किए। उनकी गेंदबाज़ी की बदौलत नॉर्थ जोन ने 52 रनों से जीत दर्ज की।
अर्शदीप सिंह ने अभी तक टेस्ट डेब्यू क्यों नहीं किया?
अर्शदीप मुख्य रूप से व्हाइट-बॉल क्रिकेट में व्यस्त रहे हैं, जिससे उन्हें लाल-गेंद मैचों में कम मौके मिले। उनके 22वें और 23वें फर्स्ट-क्लास मैच के बीच लगभग एक साल का अंतर रहा, जो उनके टेस्ट डेब्यू में देरी का प्रमुख कारण रहा है।
अर्शदीप सिंह का काउंटी क्रिकेट का अनुभव कैसा रहा है?
अर्शदीप 2023 में इंग्लैंड के केंट के लिए 5 काउंटी मैच खेल चुके हैं। उनका मानना है कि इंग्लिश परिस्थितियों में रेड-बॉल क्रिकेट का अनुभव बेहद उपयोगी है, लेकिन आईपीएल और घरेलू व्यस्त शेड्यूल के कारण दोबारा काउंटी खेलना फिलहाल संभव नहीं।
अर्शदीप सिंह ने दिलीप ट्रॉफी के लिए कैसे तैयारी की?
अर्शदीप ने बताया कि दिलीप ट्रॉफी से पहले उन्होंने जानबूझकर रेड-बॉल बॉलिंग पर ध्यान केंद्रित किया, जबकि व्हाइट-बॉल सीजन में वे व्हाइट बॉल से अभ्यास करते हैं। नॉर्थ जोन के हेड कोच अजय शर्मा ने उन्हें रेड-बॉल क्रिकेट में धैर्य और दूसरे स्पेल की अहमियत के बारे में मार्गदर्शन दिया।
क्या अर्शदीप सिंह भारतीय टेस्ट टीम में जगह बना सकते हैं?
दिलीप ट्रॉफी में उनके प्रदर्शन ने टेस्ट दावेदारी को मज़बूत किया है। हालाँकि, अंतिम निर्णय चयनकर्ताओं पर निर्भर करेगा और इसके लिए नियमित लाल-गेंद प्रदर्शन की ज़रूरत होगी।
राष्ट्र प्रेस
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