अरुणाचल प्रदेश का रणजी ट्रॉफी 2026-27 का पहला मैच फॉर्फिट, एसोसिएशन विवाद से नागालैंड के खिलाफ उतरी नहीं टीम
सारांश
मुख्य बातें
अरुणाचल प्रदेश को रणजी ट्रॉफी 2026-27 सीजन की शुरुआत में ही बड़ा झटका लगा है — राज्य की सीनियर पुरुष क्रिकेट टीम नागालैंड के खिलाफ प्लेट ग्रुप का पहला मैच नहीं खेल पाई, क्योंकि अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन (ACA) में चल रहे कानूनी विवाद के चलते राज्य के पास टीम चयन करने वाली कोई कार्यकारी संस्था ही नहीं बची है। यह मैच रविवार, 11 अक्टूबर को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में होना था।
मुख्य घटनाक्रम
संकट की शुरुआत सितंबर 2026 में ACA के विवादास्पद चुनावों से हुई, जिसमें नबम विवेक को अध्यक्ष चुना गया था। इसके बाद लोअर सियांग, अपर सुबनसिरी, कामले, तवांग, वेस्ट सियांग और पापुम पारे — कुल छह जिला एसोसिएशनों ने चुनाव प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और नए सिरे से चुनाव कराने की माँग की।
गुवाहाटी हाई कोर्ट की ईटानगर बेंच ने इस मामले में अंतरिम आदेश देकर ACA के कामकाज पर रोक लगा दी। मामले की सुनवाई सितंबर के पहले सप्ताह में हुई, लेकिन बेंच का फैसला अभी तक सुरक्षित रखा गया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद दोनों प्रतिस्पर्धी गुट बिना किसी मान्यता-प्राप्त प्रशासनिक ढाँचे के अपनी-अपनी वैधता का दावा कर रहे हैं।
बीसीसीआई की सीमाएँ और सैकिया का बयान
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सचिव देवजीत सैकिया ने पहले ही स्पष्ट किया था कि चूँकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए BCCI कोई वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था बनाने में दखल नहीं दे सकता। उन्होंने कहा था, 'अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन में दो गुट हैं, और गुवाहाटी हाई कोर्ट की ईटानगर बेंच में उनके बीच कानूनी विवाद चल रहा है। हाई कोर्ट ने कुछ महीने पहले बोर्ड के कामकाज पर रोक लगाने का आदेश दिया था।'
सैकिया ने आगे कहा था, 'नतीजतन, वे जूनियर पुरुष स्तर पर टीम नहीं उतार पाए। मुझे नहीं पता कि 11 अक्टूबर से शुरू होने वाली रणजी ट्रॉफी में उनके खेलने को लेकर क्या होगा। चूँकि मामला कोर्ट में है, इसलिए बीसीसीआई भी दखल नहीं दे सकता।' उनकी यह आशंका सही साबित हुई और रणजी ट्रॉफी का पहला मैच फॉर्फिट हो गया।
खिलाड़ियों पर असर
यह नुकसान केवल एक मैच तक सीमित नहीं है। इससे पहले अरुणाचल प्रदेश भुवनेश्वर में सिक्किम के खिलाफ वीनू मांकड़ ट्रॉफी मैच के लिए भी टीम नहीं उतार पाया था। इसके अलावा राज्य अंडर-19 महिला टी20 ट्रॉफी में भी भाग नहीं ले सका। गौरतलब है कि यह विवाद सभी आयु वर्गों के खिलाड़ियों को प्रभावित कर रहा है — पुरुष और महिला, दोनों कार्यक्रमों में युवा प्रतिभाओं के विकास पर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब अरुणाचल प्रदेश पिछले रणजी ट्रॉफी सीजन में प्लेट ग्रुप के सभी पाँचों मैच हारकर अंतिम स्थान पर रहा था। प्लेट ग्रुप में नागालैंड, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और सिक्किम भी शामिल हैं।
आगे की राह
फिलहाल सब कुछ गुवाहाटी हाई कोर्ट की ईटानगर बेंच के फैसले पर निर्भर है। जब तक अदालत का आदेश नहीं आता, ACA में कोई कार्यकारी प्रशासन नहीं बन सकता और BCCI के लिए भी हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं है। यदि यह गतिरोध जारी रहा, तो घरेलू सीजन के बाकी मैचों में भी अरुणाचल प्रदेश की भागीदारी संदेह के घेरे में बनी रहेगी, और राज्य के क्रिकेट ढाँचे को दीर्घकालिक नुकसान का खतरा है।