11 अक्टूबर 2026
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अरुणाचल प्रदेश का रणजी ट्रॉफी 2026-27 का पहला मैच फॉर्फिट, एसोसिएशन विवाद से नागालैंड के खिलाफ उतरी नहीं टीम

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अरुणाचल प्रदेश का रणजी ट्रॉफी 2026-27 का पहला मैच फॉर्फिट, एसोसिएशन विवाद से नागालैंड के खिलाफ उतरी नहीं टीम

सारांश

ACA के चुनाव विवाद और कोर्ट की अंतरिम रोक ने अरुणाचल प्रदेश को रणजी ट्रॉफी 2026-27 का पहला मैच नागालैंड के खिलाफ फॉर्फिट करने पर मजबूर किया। BCCI का हस्तक्षेप भी कानूनी कारणों से संभव नहीं — राज्य के युवा खिलाड़ी सबसे बड़े भुक्तभोगी।

मुख्य बातें

अरुणाचल प्रदेश ने 11 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में नागालैंड के खिलाफ रणजी ट्रॉफी प्लेट ग्रुप का पहला मैच फॉर्फिट किया।
अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन (ACA) में सितंबर 2026 के चुनावों को लेकर कानूनी विवाद के चलते कोई कार्यकारी संस्था नहीं बची है।
गुवाहाटी हाई कोर्ट की ईटानगर बेंच ने ACA के कामकाज पर अंतरिम रोक लगाई है; फैसला अभी सुरक्षित है।
BCCI सचिव देवजीत सैकिया के अनुसार मामला कोर्ट में होने के कारण BCCI प्रशासनिक हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
अरुणाचल प्रदेश वीनू मांकड़ ट्रॉफी और अंडर-19 महिला टी20 ट्रॉफी में भी टीम नहीं उतार पाया।
पिछले सीजन में राज्य प्लेट ग्रुप के सभी पाँचों मैच हारकर अंतिम स्थान पर रहा था।

अरुणाचल प्रदेश को रणजी ट्रॉफी 2026-27 सीजन की शुरुआत में ही बड़ा झटका लगा है — राज्य की सीनियर पुरुष क्रिकेट टीम नागालैंड के खिलाफ प्लेट ग्रुप का पहला मैच नहीं खेल पाई, क्योंकि अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन (ACA) में चल रहे कानूनी विवाद के चलते राज्य के पास टीम चयन करने वाली कोई कार्यकारी संस्था ही नहीं बची है। यह मैच रविवार, 11 अक्टूबर को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में होना था।

मुख्य घटनाक्रम

संकट की शुरुआत सितंबर 2026 में ACA के विवादास्पद चुनावों से हुई, जिसमें नबम विवेक को अध्यक्ष चुना गया था। इसके बाद लोअर सियांग, अपर सुबनसिरी, कामले, तवांग, वेस्ट सियांग और पापुम पारे — कुल छह जिला एसोसिएशनों ने चुनाव प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और नए सिरे से चुनाव कराने की माँग की।

गुवाहाटी हाई कोर्ट की ईटानगर बेंच ने इस मामले में अंतरिम आदेश देकर ACA के कामकाज पर रोक लगा दी। मामले की सुनवाई सितंबर के पहले सप्ताह में हुई, लेकिन बेंच का फैसला अभी तक सुरक्षित रखा गया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद दोनों प्रतिस्पर्धी गुट बिना किसी मान्यता-प्राप्त प्रशासनिक ढाँचे के अपनी-अपनी वैधता का दावा कर रहे हैं।

बीसीसीआई की सीमाएँ और सैकिया का बयान

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सचिव देवजीत सैकिया ने पहले ही स्पष्ट किया था कि चूँकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए BCCI कोई वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था बनाने में दखल नहीं दे सकता। उन्होंने कहा था, 'अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन में दो गुट हैं, और गुवाहाटी हाई कोर्ट की ईटानगर बेंच में उनके बीच कानूनी विवाद चल रहा है। हाई कोर्ट ने कुछ महीने पहले बोर्ड के कामकाज पर रोक लगाने का आदेश दिया था।'

सैकिया ने आगे कहा था, 'नतीजतन, वे जूनियर पुरुष स्तर पर टीम नहीं उतार पाए। मुझे नहीं पता कि 11 अक्टूबर से शुरू होने वाली रणजी ट्रॉफी में उनके खेलने को लेकर क्या होगा। चूँकि मामला कोर्ट में है, इसलिए बीसीसीआई भी दखल नहीं दे सकता।' उनकी यह आशंका सही साबित हुई और रणजी ट्रॉफी का पहला मैच फॉर्फिट हो गया।

खिलाड़ियों पर असर

यह नुकसान केवल एक मैच तक सीमित नहीं है। इससे पहले अरुणाचल प्रदेश भुवनेश्वर में सिक्किम के खिलाफ वीनू मांकड़ ट्रॉफी मैच के लिए भी टीम नहीं उतार पाया था। इसके अलावा राज्य अंडर-19 महिला टी20 ट्रॉफी में भी भाग नहीं ले सका। गौरतलब है कि यह विवाद सभी आयु वर्गों के खिलाड़ियों को प्रभावित कर रहा है — पुरुष और महिला, दोनों कार्यक्रमों में युवा प्रतिभाओं के विकास पर सवाल खड़े हो गए हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब अरुणाचल प्रदेश पिछले रणजी ट्रॉफी सीजन में प्लेट ग्रुप के सभी पाँचों मैच हारकर अंतिम स्थान पर रहा था। प्लेट ग्रुप में नागालैंड, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और सिक्किम भी शामिल हैं।

आगे की राह

फिलहाल सब कुछ गुवाहाटी हाई कोर्ट की ईटानगर बेंच के फैसले पर निर्भर है। जब तक अदालत का आदेश नहीं आता, ACA में कोई कार्यकारी प्रशासन नहीं बन सकता और BCCI के लिए भी हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं है। यदि यह गतिरोध जारी रहा, तो घरेलू सीजन के बाकी मैचों में भी अरुणाचल प्रदेश की भागीदारी संदेह के घेरे में बनी रहेगी, और राज्य के क्रिकेट ढाँचे को दीर्घकालिक नुकसान का खतरा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रशासक नहीं। BCCI की 'कोर्ट में मामला है तो हम कुछ नहीं कर सकते' वाली स्थिति तकनीकी रूप से सही हो सकती है, लेकिन यह उन युवा खिलाड़ियों के लिए पर्याप्त नहीं है जिनका सीजन बिना खेले ही खत्म हो रहा है। सवाल यह है कि क्या BCCI के पास ऐसे आकस्मिक प्रावधान होने चाहिए जो न्यायिक गतिरोध के दौरान भी खिलाड़ियों की भागीदारी सुनिश्चित कर सकें — जैसा कि अन्य खेल महासंघ कभी-कभी तदर्थ प्रशासक नियुक्त करके करते हैं।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरुणाचल प्रदेश का रणजी ट्रॉफी मैच क्यों फॉर्फिट हुआ?
अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन (ACA) में सितंबर 2026 के चुनावों को लेकर कानूनी विवाद के चलते गुवाहाटी हाई कोर्ट की ईटानगर बेंच ने एसोसिएशन के कामकाज पर रोक लगा दी है। इस कारण राज्य के पास टीम चयन करने वाली कोई कार्यकारी संस्था नहीं है और 11 अक्टूबर को नागालैंड के खिलाफ मैच फॉर्फिट करना पड़ा।
अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन का विवाद क्या है?
सितंबर 2026 में ACA के चुनाव हुए जिसमें नबम विवेक को अध्यक्ष चुना गया। इसके बाद लोअर सियांग, अपर सुबनसिरी, कामले, तवांग, वेस्ट सियांग और पापुम पारे — छह जिला एसोसिएशनों ने नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कोर्ट में याचिका दायर की और नए सिरे से चुनाव कराने की माँग की।
BCCI इस मामले में दखल क्यों नहीं दे रहा?
BCCI सचिव देवजीत सैकिया के अनुसार, चूँकि यह मामला गुवाहाटी हाई कोर्ट की ईटानगर बेंच के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए BCCI के लिए कोई वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था बनाना संभव नहीं है। कोर्ट का फैसला आने तक BCCI का हस्तक्षेप कानूनी रूप से जटिल है।
इस विवाद से अरुणाचल प्रदेश के कितने क्रिकेट टूर्नामेंट प्रभावित हुए हैं?
अब तक राज्य वीनू मांकड़ ट्रॉफी (सिक्किम के खिलाफ, भुवनेश्वर में), अंडर-19 महिला टी20 ट्रॉफी, और अब रणजी ट्रॉफी 2026-27 के पहले मैच में टीम नहीं उतार पाया है। इससे पुरुष और महिला, दोनों आयु वर्गों के खिलाड़ी प्रभावित हो रहे हैं।
क्या अरुणाचल प्रदेश रणजी ट्रॉफी के बाकी मैच खेल पाएगा?
यह गुवाहाटी हाई कोर्ट की ईटानगर बेंच के आगामी फैसले पर निर्भर करेगा। जब तक कोर्ट का आदेश नहीं आता और ACA में कोई वैध कार्यकारी संस्था नहीं बनती, तब तक राज्य की भागीदारी अनिश्चित बनी रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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