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बेबी सहाना रवि का एशियन पैरा गेम्स में ऐतिहासिक ब्रॉन्ज, स्टैंडिंग कैटेगरी में भारत का पहला पदक

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बेबी सहाना रवि का एशियन पैरा गेम्स में ऐतिहासिक ब्रॉन्ज, स्टैंडिंग कैटेगरी में भारत का पहला पदक

सारांश

नागोया में बेबी सहाना रवि ने वो कर दिखाया जो पहले किसी भारतीय ने नहीं किया — स्टैंडिंग कैटेगरी में एशियन पैरा गेम्स का पहला पदक। रोज़ाना 6-8 घंटे की ट्रेनिंग और NIOS के ज़रिए पढ़ाई करते हुए पले इस जज़्बे ने आज इतिहास लिख दिया।

मुख्य बातें

बेबी सहाना रवि ने नागोया एशियन पैरा गेम्स में पैरा टेबल टेनिस महिला सिंगल्स क्लास 9 में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
स्टैंडिंग कैटेगरी में एशियन पैरा गेम्स के इतिहास में यह भारत का पहला पदक है।
सेमीफाइनल में सहाना को चीन की माओ जिंगडियन से 0-3 से हार का सामना करना पड़ा।
प्राची पांडे (क्लास 6), सोनलबेन पटेल (क्लास 3) और भाविना पटेल (क्लास 4-5) ने भी ब्रॉन्ज मेडल जीते।
सहाना ने 2024 वर्ल्ड एबिलिटीस्पोर्ट यूथ गेम्स और 2025 दुबई यूथ एशियन पैरा गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था।
वह चेन्नई में कोच मुरलीधर राव की देखरेख में प्रशिक्षण लेती हैं, जो अचंता शरत कमल के पूर्व कोच भी हैं।

भारत की बेबी सहाना रवि ने नागोया में जारी एशियन पैरा गेम्स में पैरा टेबल टेनिस महिला सिंगल्स क्लास 9 स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। स्टैंडिंग कैटेगरी (खड़े होकर खेलने वाली श्रेणी) में एशियन पैरा गेम्स के मंच पर यह भारत का पहला पदक है। तमिलनाडु के होसुर की इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी की यह उपलब्धि वर्षों की अथक मेहनत और अदम्य जज़्बे की परिणति है।

मुख्य घटनाक्रम

महिला सिंगल्स क्लास 9 के सेमीफाइनल में सहाना को चीन की माओ जिंगडियन के हाथों 0-3 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बावजूद उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल मुकाबला जीतकर भारत की झोली में एक यादगार पदक डाला। यह पदक इसलिए भी विशेष है क्योंकि स्टैंडिंग कैटेगरी में एशियन पैरा गेम्स के इतिहास में भारत ने पहले कभी कोई पदक नहीं जीता था।

सहाना का सफर — संघर्ष से शिखर तक

सहाना ने 2014 में जब वह 5वीं कक्षा में थीं, टेबल टेनिस से पहला परिचय किया। 2015 में वह कोरोनेशन क्लब से जुड़ीं, जहाँ उनके पहले कोच राज अरविंदन अलगार ने उनकी प्रतिभा को तराशा। 9वीं कक्षा के बाद उन्होंने नियमित स्कूल छोड़ नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) के माध्यम से पढ़ाई जारी रखी और प्रतिदिन 6 से 8 घंटे की कठोर ट्रेनिंग को अपनी दिनचर्या बनाया।

सितंबर 2022 में वह चेन्नई के एसडीएटी-एकेजी टेबल टेनिस डेवलपमेंट सेंटर चली गईं, जहाँ वह वर्तमान में कोच मुरलीधर राव — जो अचंता शरत कमल के पूर्व कोच भी रहे हैं — की देखरेख में प्रशिक्षण ले रही हैं। उनके बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में सीनियर मल्टी-स्पोर्ट डेब्यू और हांगझोऊ एशियन पैरा गेम्स 2022 में 5वें स्थान से आज के ब्रॉन्ज तक का सफर उनके निरंतर विकास को दर्शाता है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर सहाना की चमक

गौरतलब है कि सहाना ने 2024 वर्ल्ड एबिलिटीस्पोर्ट यूथ गेम्स और 2025 में दुबई में हुए यूथ एशियन पैरा गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर पहले ही अपनी विश्वस्तरीय काबिलियत साबित कर दी थी। उनके माता-पिता ने हर कदम पर उनके पैरालिंपियन बनने के सपने को सहयोग दिया, जो उनकी सफलता की आधारशिला रहा।

अन्य भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन

इसी स्पर्धा में प्राची पांडे ने महिला सिंगल्स क्लास 6 में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। सेमीफाइनल में उन्हें मिस्र की अल-दयेनी से 0-3 से हार झेलनी पड़ी। वहीं, सोनलबेन पटेल ने महिला सिंगल्स क्लास 3 में साउथ कोरिया की यूं जियू से सेमीफाइनल में 7-11, 5-11, 6-11 से हारने के बाद ब्रॉन्ज पर कब्ज़ा किया।

पैरालिंपिक मेडलिस्ट भाविना पटेल महिला सिंगल्स क्लास 4-5 में ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रहीं। सेमीफाइनल में उन्हें चीन की झांग बियान ने 7-11, 5-11, 7-11 के स्कोर से पराजित किया था। यह ऐसे समय में आया है जब भारत पैरा खेलों में अपनी उपस्थिति को वैश्विक स्तर पर मज़बूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

आगे की राह

इन पदकों के साथ भारतीय पैरा टेबल टेनिस टीम ने नागोया एशियन पैरा गेम्स में अपना मज़बूत प्रदर्शन दर्ज किया है। सहाना की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के पैरा एथलीटों के लिए एक प्रेरणास्रोत बनने का माद्दा रखती है और भविष्य में पैरालिंपिक पदक की उम्मीदें और प्रबल हो गई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की पैरा एथलेटिक्स नीति की उस खाई को उजागर करता है जहाँ स्टैंडिंग कैटेगरी के खिलाड़ियों को व्हीलचेयर श्रेणी के मुकाबले पारंपरिक रूप से कम संसाधन और ध्यान मिला है। यह उपलब्धि NIOS और निजी कोचिंग के सहारे तैयार हुई — न कि किसी बड़े सरकारी ढाँचे की देन। सवाल यह है कि जब ऐसे एथलीट बिना पर्याप्त संस्थागत सहयोग के भी इतिहास रच सकते हैं, तो सही निवेश और ढाँचागत समर्थन से क्या संभव हो सकता है।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेबी सहाना रवि ने एशियन पैरा गेम्स में कौन-सा मेडल जीता?
बेबी सहाना रवि ने नागोया एशियन पैरा गेम्स में पैरा टेबल टेनिस महिला सिंगल्स क्लास 9 स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता। यह स्टैंडिंग कैटेगरी में एशियन पैरा गेम्स के इतिहास में भारत का पहला पदक है।
स्टैंडिंग कैटेगरी में यह भारत का पहला मेडल क्यों है?
पैरा टेबल टेनिस की स्टैंडिंग कैटेगरी उन खिलाड़ियों के लिए है जो खड़े होकर खेलते हैं। इससे पहले एशियन पैरा गेम्स में भारत के सभी टेबल टेनिस पदक व्हीलचेयर श्रेणियों में आए थे, इसलिए सहाना का यह ब्रॉन्ज ऐतिहासिक माना जा रहा है।
बेबी सहाना रवि की ट्रेनिंग और पृष्ठभूमि क्या है?
तमिलनाडु के होसुर की रहने वाली सहाना ने 2014 में 5वीं कक्षा में टेबल टेनिस शुरू किया। 9वीं के बाद NIOS के ज़रिए पढ़ाई जारी रखी और रोज़ाना 6-8 घंटे ट्रेनिंग की। वर्तमान में वह चेन्नई के एसडीएटी-एकेजी सेंटर में कोच मुरलीधर राव की निगरानी में प्रशिक्षण लेती हैं।
भाविना पटेल का नागोया एशियन पैरा गेम्स में क्या प्रदर्शन रहा?
पैरालिंपिक मेडलिस्ट भाविना पटेल ने महिला सिंगल्स क्लास 4-5 में ब्रॉन्ज मेडल जीता। सेमीफाइनल में उन्हें चीन की झांग बियान ने 7-11, 5-11, 7-11 से हराया।
नागोया एशियन पैरा गेम्स में भारत ने पैरा टेबल टेनिस में कुल कितने पदक जीते?
नागोया एशियन पैरा गेम्स में भारत ने पैरा टेबल टेनिस में कम से कम चार ब्रॉन्ज मेडल जीते — बेबी सहाना रवि (क्लास 9), प्राची पांडे (क्लास 6), सोनलबेन पटेल (क्लास 3) और भाविना पटेल (क्लास 4-5)।
राष्ट्र प्रेस
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