टी20 विश्व कप 2026 से बाहर होने का फैसला आसिफ नजरुल का था: बांग्लादेश जांच रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश सरकार की तीन सदस्यीय जांच समिति ने 16 सितंबर 2026 को अपनी रिपोर्ट जारी करते हुए खुलासा किया कि अंतरिम सरकार में खेल सलाहकार रहे आसिफ नजरुल ने अकेले ही टी20 विश्व कप 2026 से बांग्लादेश की टीम को हटाने का फैसला लिया था। रिपोर्ट के अनुसार यह निर्णय उस समय लिया गया जब बांग्लादेश के खिलाड़ी भारत में विश्व कप मैच खेलने के लिए तैयार थे।
मुख्य घटनाक्रम
मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल से बाहर किए जाने के बाद, तत्कालीन खेल सलाहकार नजरुल ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि बांग्लादेश टीम टी20 विश्व कप के मैच भारत में नहीं खेलेगी। इसके बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने अपने मैच भारत से श्रीलंका में स्थानांतरित करने का अनुरोध अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) से किया, जिसे अस्वीकार कर दिया गया।
24 जनवरी को आईसीसी और बीसीबी के बीच हुई बातचीत के बाद आईसीसी बोर्ड के अधिकांश सदस्यों ने बांग्लादेश की भागीदारी के विरुद्ध मतदान किया, क्योंकि बीसीबी ने भारत में मैच खेलने से इनकार किया था। परिणामस्वरूप आईसीसी ने बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को विश्व कप में शामिल किया।
जांच समिति का गठन और प्रक्रिया
नई सरकार में खेल मंत्री अमीनुल हक के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय समिति की अध्यक्षता यूथ एंड स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री के एडिशनल सेक्रेटरी डॉ. एकेएम ओली उल्लाह ने की। बांग्लादेश के पूर्व कप्तान हबीबुल बशर और बैरिस्टर फैसल दस्तगीर भी इस समिति में शामिल थे।
जांच के दौरान टी20 कप्तान लिटन दास और टेस्ट कप्तान नजमुल हुसैन शांतो सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों और खिलाड़ियों के बयान दर्ज किए गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग हर इंटरव्यू में नजरुल को ही इस अहम फैसले का एकमात्र जिम्मेदार बताया गया।
खिलाड़ियों की राय और नजरुल का बदला बयान
शांतो और लिटन दास दोनों ने समिति के सामने स्पष्ट किया कि खिलाड़ी भारत में मैच खेलने को तैयार थे, लेकिन नजरुल ने उनकी सकारात्मक भावना की अनदेखी करते हुए यह फैसला ले लिया। जांच समिति की रिपोर्ट में यह भी नोट किया गया है कि उस समय बीसीबी के पास इस उच्च-प्रोफाइल संकट से निपटने के लिए स्वतंत्र रणनीतिक नेतृत्व, संकट प्रबंधन क्षमता और दीर्घकालिक योजना का अभाव था।
गौरतलब है कि नजरुल ने बांग्लादेश चुनाव से ठीक दो दिन पहले सार्वजनिक रूप से कहा था कि भारत में न खेलने का निर्णय बीसीबी और खिलाड़ियों का था, सरकार का नहीं। हालाँकि, मंगलवार को उन्होंने अपना पूर्व बयान बदलते हुए स्वीकार किया कि यह फैसला उन्होंने खुद लिया था।
भारत-बांग्लादेश क्रिकेट संबंधों पर असर
यह पूरा विवाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की पृष्ठभूमि में उठा, जिसके बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल से बाहर करने का आदेश दिया था। कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) ने बीसीसीआई के निर्देश का पालन करते हुए रहमान को लीग से बाहर किया, जिससे दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंध तनावपूर्ण हो गए।
क्या होगा आगे
जांच रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद अब बांग्लादेश में इस निर्णय की जवाबदेही तय करने की माँग तेज हो सकती है। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब बांग्लादेश क्रिकेट अपनी अंतर्राष्ट्रीय साख को पुनर्स्थापित करने की कोशिश में है। बीसीबी और नई सरकार के लिए यह तय करना अनिवार्य होगा कि भविष्य में ऐसे रणनीतिक और राजनयिक निर्णय किस प्रक्रिया से लिए जाएँगे।