भारत के 5 विश्व कप खिताब: हर बार केरल का अद्वितीय योगदान
सारांश
Key Takeaways
- भारत ने 5 वर्ल्ड कप खिताब जीते हैं।
- हर बार टीम में एक मलयाली खिलाड़ी होता है।
- 1983 में सुनील वाल्सन का योगदान महत्वपूर्ण था।
- श्रीसंत ने 2007 में जीत में अहम भूमिका निभाई।
- संजू सैमसन ने 2026 में शानदार प्रदर्शन किया।
तिरुवनंतपुरम, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसमें आंकड़ों के अलावा कई दिलचस्प संयोग देखने को मिलते हैं। भारत ने अब तक कुल 5 बार क्रिकेट वर्ल्ड कप अपने नाम किया है, और इन सभी खिताबों में केरल का विशेष कनेक्शन रहा है। जब भी भारत पुरुषों का वर्ल्ड कप जीतता है, टीम में हमेशा एक मलयाली खिलाड़ी होता है।
यह अनोखा पैटर्न 1983 के क्रिकेट वर्ल्ड कप में शुरू हुआ, जब कपिल देव की अगुवाई में भारत ने ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। उस टीम में सुनील वाल्सन, केरल के तेज गेंदबाज, भी शामिल थे। भले ही उन्हें एक भी मैच खेलने का अवसर नहीं मिला, लेकिन उन्होंने विश्व कप विजेता का खिताब जीता।
इसके बाद, भारत ने टी20 वर्ल्ड कप 2007 जीतकर लगभग ढाई दशक का सूखा समाप्त किया। उस टीम में श्रीसंत जैसे मलयाली खिलाड़ी थे, जिन्होंने न केवल विजेताओं की सूची में अपना नाम दर्ज किया, बल्कि खिताब जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई। फैंस आज भी खिताबी मुकाबले की अंतिम गेंद पर उनके शानदार कैच को नहीं भूल सकते।
केरल का यह खिलाड़ी वनडे वर्ल्ड कप 2011 की विजेता टीम का भी हिस्सा था, जिसके बाद फैंस ने उन्हें 'मलयाली लकी चार्म' कहना शुरू कर दिया।
साल 2024 में, भारत ने एक बार फिर टी20 वर्ल्ड कप अपने नाम किया, जिसमें केरल के विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन भी शामिल थे। हालांकि, उस संस्करण में सैमसन को एक भी मैच खेलने का अवसर नहीं मिला।
संजू सैमसन ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 के दौरान अपनी प्रारंभिक दो पारियों से फैंस को प्रभावित नहीं किया, लेकिन अंतिम तीन मैचों में वह भारत के लिए नायक बने।
सैमसन ने वेस्टइंडीज के खिलाफ निर्णायक मुकाबले में नाबाद 97 रन की पारी खेलकर भारत को सेमीफाइनल में पहुँचाया। इसके बाद, इंग्लैंड के खिलाफ 89 रन की पारी खेलकर फाइनल में भारत को पहुँचाया। सैमसन ने खिताबी मैच में भी उतने ही रन बनाते हुए भारत को ट्रॉफी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।