ईस्ट बंगाल ने आईएसएल 2025-26 खिताब जीता, इंटर काशी को 2-1 से हराकर 22 साल का सूखा खत्म
सारांश
मुख्य बातें
ईस्ट बंगाल एफसी ने 22 मई 2026 को कोलकाता के किशोर भारती क्रीड़ांगन में इंटर काशी को 2-1 से पराजित कर इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) 2025-26 का खिताब अपने नाम किया। यह ऐतिहासिक जीत क्लब के लिए 22 साल के राष्ट्रीय लीग सूखे का अंत है — ईस्ट बंगाल ने इससे पहले अपना आखिरी बड़ा खिताब 2004 में जीता था।
मैच का मुख्य घटनाक्रम
मुकाबले की शुरुआत ईस्ट बंगाल के पक्ष में नहीं रही। 14वें मिनट में इंटर काशी के अल्फ्रेड प्लानास ने डेविड मुनोज की लंबी गेंद पर शानदार वॉली से गोल दागते हुए अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। गेंद गोलकीपर प्रभसुखन सिंह गिल के ऊपर से निकलकर नेट में समाई और स्टेडियम में पल भर के लिए सन्नाटा छा गया।
पहले हाफ में इंटर काशी ने दबाव बनाए रखा। 24वें मिनट में प्लानास ने अनवर अली को छकाते हुए बढ़त दोगुनी करने की कोशिश की, लेकिन गिल ने शानदार बचाव किया। 35वें मिनट में भी गिल ने प्लानास के दूर से लगाए शॉट को रोका और रिबाउंड साइड नेटिंग में चली गई। हाफटाइम तक ईस्ट बंगाल एक गोल से पीछे था।
ईस्ट बंगाल की शानदार वापसी
ब्रेक के बाद मैदान पर उतरी ईस्ट बंगाल की टीम बिल्कुल बदली हुई नजर आई। 50वें मिनट में अनवर अली के डिफेंस-स्प्लिटिंग पास पर मोरक्को के यूसुफ एज्जारी ने मार्कर मुनोज को पीछे छोड़ा, गोलकीपर शुभम धास से आगे निकले और गेंद को गोल में पहुँचाकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इस गोल ने स्टेडियम में जोश भर दिया।
61वें मिनट में सब्स्टीट्यूट नंदकुमार की जोरदार स्ट्राइक पर धास को तेज बचाव करना पड़ा। आखिरकार 72वें मिनट में बिपिन सिंह ने दाएं किनारे से खतरनाक क्रॉस दिया और मोहम्मद राशिद ने बूट निकालकर गेंद को दूर कोने में डालते हुए 2-1 की निर्णायक बढ़त दिला दी। यह गोल मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
खिताब कैसे तय हुआ
अंतिम सीटी से पहले ईस्ट बंगाल के डिफेंस ने इंटर काशी को बराबरी का कोई मौका नहीं दिया। 13 मैचों में 26 अंकों के साथ ईस्ट बंगाल आईएसएल तालिका में शीर्ष पर रहा। उल्लेखनीय है कि मोहन बागान सुपर जायंट ने भी अपना अंतिम मैच स्पोर्टिंग क्लब दिल्ली के खिलाफ 2-1 से जीतकर अंकों में बराबरी हासिल की, लेकिन ईस्ट बंगाल का 5 गोल का बेहतर गोल अंतर अंततः खिताब का फैसला करने वाला कारक बना।
जश्न और भावनाओं का सैलाब
अंतिम सीटी बजते ही किशोर भारती क्रीड़ांगन में दृश्य अविस्मरणीय था। खिलाड़ी मैदान पर गिर पड़े, बेंच खाली हो गई और समर्थक बैरिकेड्स फाँदकर मैदान में कूद पड़े। पूरा स्टेडियम 'ईस्ट बंगाल, ईस्ट बंगाल' के नारों से गूँज उठा। कोच ऑस्कर ब्रुजोन की टीम ने पूरे सीजन में आक्रामक फुटबॉल खेलते हुए यह खिताब हासिल किया।
आगे क्या
यह खिताब ईस्ट बंगाल के लिए महज एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि भारतीय फुटबॉल के सबसे पुराने और जुनूनी क्लबों में से एक की पुनर्वापसी का प्रतीक है। गौरतलब है कि यह वही क्लब है जिसने दशकों तक एशियाई फुटबॉल में भारत का परचम लहराया था। आईएसएल चैंपियन के रूप में ईस्ट बंगाल अब एएफसी क्लब प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने की दौड़ में होगा।