एशियन गेम्स 2026: ईशान किशन की 46 गेंदों में 80 रन की पारी, भारत फाइनल में; 'मेडल के लिए खेलना अलग एहसास'
सारांश
मुख्य बातें
विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने एशियन गेम्स 2026 के सेमीफाइनल में श्रीलंका के खिलाफ 46 गेंदों में 5 छक्कों और 4 चौकों की बदौलत 80 रन की विस्फोटक पारी खेली, जिससे भारत ने कोरोगि स्पोर्ट्स पार्क में 7 विकेट पर 169 रन का स्कोर खड़ा किया। इसके जवाब में श्रीलंका महज 45 रन पर सिमट गई और भारत ने एकतरफा जीत दर्ज कर गोल्ड मेडल मैच में जगह पक्की की।
मुख्य घटनाक्रम
कोरोगि स्पोर्ट्स पार्क में खेले गए इस सेमीफाइनल में ईशान किशन ने टीम के सबसे अहम बल्लेबाज की भूमिका निभाई। पिच में दरारें थीं, जिससे बल्लेबाजी करना बेहद मुश्किल था। ऐसी परिस्थितियों में 80 रन की पारी खेलना किशन की मानसिक दृढ़ता और तकनीकी समझ का प्रमाण है।
श्रीलंका की पूरी टीम 45 रन पर ढेर हो गई, जो टूर्नामेंट में किसी भी टीम का सबसे कम स्कोर रहा। भारत के स्पिनरों ने दरारों वाली पिच का पूरा फायदा उठाया।
ईशान किशन के अनुसार: मेडल के लिए खेलना अलग
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईशान किशन ने भारत के लिए मेडल इवेंट में खेलने के भावनात्मक पहलू पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, "जब आप भारत के लिए खेलते हैं, खासकर जब बात मेडल की हो, तो यह आपके दिल पर असर डालता है। यह सिर्फ बीसीसीआई से जुड़े होने की बात नहीं है — यहां हमेशा भारत की बात होती है। चारों ओर इतने सारे झंडे लहरा रहे होते हैं और इतने सारे लोग आपका उत्साह बढ़ा रहे होते हैं। तो आपको अंदर से वह एहसास होता है, भले ही आप उसे बाहर न दिखाएं — मुझे लगता है कि आपको महसूस होता है कि यह कुछ अलग है, फिर भी सच कहूं तो मुझे लगता है कि यहां थोड़ा ज्यादा दबाव होता है।"
यह बयान इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि एशियन गेम्स में क्रिकेट एक ओलिंपिक स्तरीय मल्टी स्पोर्ट्स इवेंट का हिस्सा है, जहाँ खिलाड़ियों पर देश का झंडा थामने का एक विशेष दायित्व होता है — जो आईपीएल या द्विपक्षीय सीरीज़ से अलग किस्म का होता है।
मुश्किल पिच पर टीम की रणनीति
किशन ने दरारों वाली पिच पर टीम की रणनीति का खुलासा करते हुए कहा कि मीटिंग में तय किया गया था कि जो भी बल्लेबाज क्रीज पर जम जाए, वह 20 ओवर तक टिका रहे। उन्होंने कहा, "जो भी बल्लेबाज क्रीज पर जम गया हो, उसे 20 ओवर तक खेलना चाहिए क्योंकि यही बड़े रन बनाने और टीम को एक अच्छे स्कोर तक पहुंचाने का सबसे अच्छा तरीका है।"
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टीम का लक्ष्य कम से कम 150 रन बनाना था, ताकि स्पिनरों को पर्याप्त स्कोर का बचाव करने का मौका मिले। किशन के अनुसार, 'मकसद स्पष्ट था — बस किसी तरह 150 रन तक पहुंचना था।'
किस्मत नहीं, समझदारी: किशन का जवाब
जब पूछा गया कि ऐसी अनिश्चित पिचों पर क्या फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में किस्मत का रोल ज्यादा हो जाता है, तो किशन ने इसे सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा, "नहीं, असल में ऐसा नहीं है। खासकर ऐसी पिचों पर, व्यक्तिगत लक्ष्यों के बजाय टीम के लक्ष्यों पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।" यह नजरिया एक परिपक्व खिलाड़ी की सोच को दर्शाता है।
पाकिस्तान के खिलाफ गोल्ड मेडल मैच की तैयारी
शनिवार को होने वाले पाकिस्तान के खिलाफ गोल्ड मेडल मैच के बारे में किशन ने कहा कि टीम 'चीजों को आसान' रखने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, "आप बस शांत रहते हैं, अपने शॉट्स खेलते हैं, उस पल में जीते हैं और उन अहम पलों का मजा लेते हैं।" गौरतलब है कि भारत पाकिस्तान का यह मुकाबला एशियन गेम्स के इतिहास में क्रिकेट का सबसे प्रतीक्षित फाइनल होगा। दोनों टीमों के बीच किसी बड़े मल्टी स्पोर्ट्स इवेंट के फाइनल में यह मुकाबला दर्शकों और प्रशंसकों के लिए असाधारण महत्व रखता है।