क्या खो-खो महाभारत काल से जुड़ा खेल है, जिसमें फुर्ती, रणनीति और टीमवर्क का मिश्रण है?

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क्या खो-खो महाभारत काल से जुड़ा खेल है, जिसमें फुर्ती, रणनीति और टीमवर्क का मिश्रण है?

सारांश

खो-खो, जो महाभारत काल से जुड़ा एक पारंपरिक खेल है, न केवल फुर्ती और रणनीति का खेल है, बल्कि यह टीमवर्क को भी बढ़ावा देता है। आइए जानते हैं इस खेल की जड़ों और विकास के बारे में।

Key Takeaways

  • खो-खो एक पारंपरिक भारतीय खेल है।
  • खेल में फुर्ती, रणनीति और टीमवर्क की आवश्यकता होती है।
  • इस खेल की उत्पत्ति महाभारत काल में हुई थी।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खो-खो की प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं।
  • खो-खो को अल्टीमेट खो खो जैसी पेशेवर लीगों में भी खेला जाता है।

नई दिल्ली, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के प्राचीन खेल खो-खो में फुर्ती, रणनीति और टीमवर्क का महत्वपूर्ण योगदान होता है। सीमित क्षेत्र में खेले जाने वाला यह खेल फिटनेस और अनुशासन को बढ़ावा देता है और खिलाड़ियों की गति, संतुलन और निर्णय क्षमता में सुधार करता है।

खो-खो की उत्पत्ति महाराष्ट्र से मानी जाती है, लेकिन इसका उल्लेख महाभारत काल में भी मिलता है, जहाँ रथों पर खेले जाने वाले 'राठेरा' जैसे खेल ने इसे प्रेरित किया। 1914 में पुणे के डेक्कन जिमखाना क्लब ने खो-खो के आधुनिक स्वरूप का निर्माण किया, जिसमें खेल के नियम भी बनाए गए।

1936 के बर्लिन ओलंपिक में खो-खो को प्रदर्शनी खेल के रूप में शामिल किया गया, हालांकि यह आधिकारिक प्रतिस्पर्धा नहीं थी। 1955 में खो खो फेडरेशन ऑफ इंडिया (केकेएफआई) की स्थापना हुई। 1959-60 में पहली ऑल इंडिया खो-खो चैंपियनशिप का आयोजन किया गया। विमेंस नेशनल चैंपियनशिप 1960-61 में आयोजित हुई।

इस खेल को एशियन गेम्स 1982 में शामिल किया गया था और गुवाहाटी में आयोजित साउथ एशियन गेम्स 2016 में इसे मेडल वाले खेल के रूप में मान्यता दी गई। वर्तमान में लगभग 25 देशों में खो-खो टीमें सक्रिय हैं।

खो-खो का खेल आयताकार मैदान (27 मीटर x 16 मीटर) पर खेला जाता है, जिसमें दोनों छोर पर लकड़ी के खंभे होते हैं। प्रत्येक टीम में 12 खिलाड़ी होते हैं, लेकिन खेल के दौरान केवल 9 खिलाड़ी ही भाग ले सकते हैं। 27 मीटर की रेखाओं को साइड लाइन्स और 16 मीटर की रेखाओं को ड्यू रेखा एंड लाइन्स कहा जाता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खो-खो की प्रतियोगिताएं दो पारियों में होती हैं। हर पारी में 9 मिनट के 2 टर्न होते हैं, जिसमें एक टीम पीछा करती है और दूसरी बचाव करती है। पीछा करने वालों का लक्ष्य बचाव करने वालों को हथेली से छूकर टैग करना होता है, जबकि बचाव करने वाले टैग से बचने और समय समाप्त होने तक भागने का प्रयास करते हैं।

टॉस जीतने वाला कप्तान चेज या डिफेंस में से एक का चयन करता है। चेज करने वाली टीम के 8 खिलाड़ी बैठ जाते हैं। चेज करने वाले खिलाड़ी एक दिशा में लगातार नहीं जा सकते, बल्कि उन्हें साइड लाइन्स के विपरीत पोजीशन लेनी होती है। नौवां चेजर मुकाबले का प्रारंभ फ्री जोन से करता है।

दोनों पारियों के अंत में सबसे अधिक अंक जुटाने वाली टीम को विजेता घोषित किया जाता है। यदि दोनों टीमों के अंक समान हों, तो एक अतिरिक्त पारी के साथ विजेता का निर्धारण किया जाता है। यदि अंत में भी कोई विजेता नहीं होता, तो दोनों टीमें एक-एक टर्न लेती हैं और सबसे कम समय में अंक प्राप्त करने वाली टीम विजेता कहलाती है।

भारत में खो-खो का एक विशाल फैन बेस और समर्पित अनुयायी हैं, और इस खेल के लिए कई टूर्नामेंट और इवेंट्स का आयोजन किया जाता है, जो जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक फैले हुए हैं।

पेशेवर लीग अल्टीमेट खो खो (यूकेके) इस खेल में एक नए युग का प्रतीक है, जिसे केकेएफआई के सहयोग से प्रारंभ किया गया है। इस लीग का उद्देश्य खो-खो को आधुनिक प्रतिस्पर्धात्मक रूप में प्रस्तुत करना और इसे नई ऊंचाइयों तक पहुँचाना है।

Point of View

बल्कि इसे आज भी युवा पीढ़ी द्वारा पसंद किया जाता है। यह खेल अनुशासन, टीमवर्क और रणनीति का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करता है।
NationPress
11/01/2026

Frequently Asked Questions

खो-खो का इतिहास क्या है?
खो-खो की जड़ें महाराष्ट्र से जुड़ी हैं और इसका उल्लेख महाभारत काल में भी मिलता है।
खो-खो खेल की नियम क्या हैं?
इस खेल में 12 खिलाड़ियों की टीम होती है, लेकिन एक समय में केवल 9 खिलाड़ी ही खेल सकते हैं।
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