मुकुल चौधरी का क्रिकेट सफर: एमएस धोनी से प्रेरणा लेकर बनना चाहते हैं महान फिनिशर

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मुकुल चौधरी का क्रिकेट सफर: एमएस धोनी से प्रेरणा लेकर बनना चाहते हैं महान फिनिशर

सारांश

कोलकाता में हुए आईपीएल 2026 के मुकाबले में मुकुल चौधरी ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 27 गेंदों पर 54 रन बनाकर अपनी टीम को जीत दिलाई। जानिए उनकी प्रेरणा और संघर्ष की कहानी।

Key Takeaways

  • मुकुल चौधरी ने 27 गेंदों पर 54 रन बनाकर अपनी टीम को जीत दिलाई।
  • उन्होंने एमएस धोनी को अपने आदर्श के रूप में रखा है।
  • उनके पिता ने उन्हें क्रिकेट में आगे बढ़ाने के लिए कई त्याग किए।
  • सपनों की सच्चाई के लिए संघर्ष करना जरूरी है।
  • क्रिकेट अकादमी में दाखिला लेने के लिए उन्होंने बहुत मेहनत की।

कोलकाता, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आईपीएल 2026 में कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) और लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) के बीच हुए मैच में मुकुल चौधरी ने अपनी अद्भुत प्रतिभा का परिचय दिया। 21 वर्षीय इस विकेटकीपर बल्लेबाज ने सिर्फ 27 गेंदों में 7 छक्के और 1 चौके की सहायता से नाबाद 54 रन बनाकर एलएसजी को 3 विकेट से जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मैच के बाद जियोहॉटस्टार पर मुकुल चौधरी ने कहा, "मैं हमेशा एमएस धोनी को देखता हूं क्योंकि मैं भी एक फिनिशर हूं। मैं उनसे प्रेरणा लेता हूं। उनका हेलीकॉप्टर शॉट, जो कि बहुत प्रसिद्ध है, मेरा पसंदीदा है। जिस तरह से उन्होंने 2011 वर्ल्ड कप में भारत को जीत दिलाई, वह सभी को याद है। मैं उनके जैसा बनना चाहता हूं और मैच खत्म करके अपनी टीम को जीत दिलाने में मदद करना चाहता हूं।"

अपने पिता के त्याग और क्रिकेट के प्रति अपने सफर पर मुकुल ने कहा, "मेरे पिता का सपना था कि मैं बड़े स्तर पर क्रिकेट खेलूं। हम एक गरीब परिवार से हैं और वह चाहते थे कि परिवार में से कोई क्रिकेट खेले। आजकल क्रिकेट में बहुत पैसा और नाम है। क्रिकेट उनके लिए पसंदीदा खेल है, लेकिन हमारे परिवार की स्थिति उन्हें पेशेवर क्रिकेट खेलने की अनुमति नहीं देती थी। शादी से पहले ही उन्होंने तय कर लिया था कि जब उनका बेटा होगा, तो उसे क्रिकेट सिखाना है। जब मैं छोटा था, तब हमारे परिवार के हालात ठीक नहीं थे, और उनके लिए मुझे क्रिकेट एकेडमी में भर्ती कराना संभव नहीं था। उस समय वह एक कॉलेज में पढ़ाते थे और आरएएस की तैयारी भी कर रहे थे।"

चौधरी ने कहा, "उनके पिता को यह समझ में आया कि या तो वह राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) की तैयारी कर सकते हैं या मुझे प्रोफेशनल क्रिकेट सिखा सकते हैं। इसलिए, उन्होंने अपनी आरएएस की तैयारी छोड़ दी, कुछ प्रॉपर्टी का काम किया और पैसे कमाए। जब मैं 12 साल का हुआ, तो उन्होंने मुझे पहली बार सीकर शहर में एसबीएस क्रिकेट एकेडमी में भर्ती कराया।"

मुकुल ने कहा, "हमारे सामने चुनौती यह थी कि प्रोफेशनल स्तर पर खेलने से पहले मुझे क्रिकेट के बारे में कुछ नहीं पता था। मेरे परिवार में क्रिकेट से कोई संबंध नहीं था। हमारे क्षेत्र का कोई भी क्रिकेट खिलाड़ी नहीं था। मुझे इस खेल के बारे में कुछ नहीं पता था। मुझे याद है कि 2015 में, मेरे जन्मदिन के दिन, मैं और मेरे पापा सुबह एकेडमी की तलाश में निकले थे। आस-पास तीन जिले थे - चूरू, झुंझुनू और सीकर। हमने उन तीन जिलों में एकेडमी खोजने का प्रयास किया। उस समय, सीकर में एसबीएस क्रिकेट एकेडमी अभी-अभी खुली थी। हमने वहां देखा और उस एकेडमी में दाखिला लेने का निर्णय लिया। वह एक नई एकेडमी थी और वहां के चलाने वाले लोग क्रिकेट के प्रति बहुत उत्साही और पैशनेट थे। इसलिए हमें अपनी क्रिकेट यात्रा शुरू करने के लिए सही स्थान मिला।

Point of View

जो न सिर्फ क्रिकेट प्रेमियों के लिए बल्कि हर युवा के लिए है। उन्होंने साबित किया है कि कठिनाइयों के बावजूद सपनों को साकार किया जा सकता है।
NationPress
10/04/2026

Frequently Asked Questions

मुकुल चौधरी का क्रिकेट सफर कैसे शुरू हुआ?
मुकुल चौधरी का क्रिकेट सफर उनके पिता के सपनों के साथ शुरू हुआ, जिन्होंने उन्हें पहली बार एकेडमी में दाखिला दिलाया।
मुकुल को किस खिलाड़ी से प्रेरणा मिलती है?
मुकुल चौधरी को महेंद्र सिंह धोनी से प्रेरणा मिलती है और वह उनके फिनिशर के तौर-तरीकों को अपनाना चाहते हैं।
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