एशियन पैरा गेम्स 2026: पैरा शूटर्स की मांग — मुख्य कोच जेपी नौटियाल को जापान भेजो
सारांश
मुख्य बातें
भारत के पैरा शूटर्स ने 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में यह मांग उठाई कि एशियन पैरा गेम्स 2026 के लिए जापान जाने वाले शूटिंग दल के साथ मुख्य कोच जेपी नौटियाल को भी भेजा जाए। अंतिम समय में नौटियाल का नाम दल से हटाए जाने पर खिलाड़ियों और सहयोगी कोचों ने कड़ी नाराज़गी जाहिर की है। खिलाड़ियों का कहना है कि शूटिंग एक मानसिक खेल है और इस निर्णय से उनकी तैयारी पर सीधा असर पड़ रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
जापान में होने वाले एशियन पैरा गेम्स के लिए भारतीय शूटिंग दल की घोषणा हो चुकी थी, लेकिन आखिरी वक्त पर मुख्य कोच जेपी नौटियाल का नाम सूची से हटा दिया गया। कथित तौर पर उन पर कुछ आरोप लगाए गए हैं, हालाँकि अभी तक कोई भी आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। इस फैसले के विरोध में खिलाड़ी सोमवार को भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) भी पहुँचे, लेकिन वहाँ से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
खिलाड़ियों की आवाज़
पैरा राइफल शूटर राकेश ने कहा, 'मुख्य कोच के होने से पूरी टीम को काफी सपोर्ट रहता है। हम उनके साथ इतने दिनों से मेहनत कर रहे हैं और मेरे लिए तो खासतौर पर वह मेंटर हैं। हम मानसिक तौर पर उनके साथ जुड़े हुए हैं। शूटिंग एक मेंटल गेम है। हम इस फैसले के चलते मानसिक तौर पर परेशान हो रहे हैं।' उन्होंने माँग की कि मुख्य कोच को टीम के साथ जाने दिया जाए ताकि टीम का हित हो सके।
पैरा शूटर सृष्टि अरोड़ा ने बताया, 'कैंप अच्छा चल रहा था, लेकिन अचानक अंतिम समय में यह बदलाव करना कि मुख्य कोच नहीं जाएँगे, हमारे लिए निराशाजनक है। मुख्य कोच जेपी नौटियाल के पास पहले पैरा एशियन गेम्स और कई बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स का काफी अनुभव है, जो हमारे काम आएगा।'
बधिर शूटर के लिए विशेष चुनौती
बोलने और सुनने में असक्षम पैरा शूटर भक्ति शर्मा की बहन सुधा शर्मा ने बताया कि जेपी नौटियाल भक्ति की सांकेतिक भाषा को समझते हैं। उनके अनुसार, कोच की गैरमौजूदगी में फाइनल के दौरान भक्ति को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है और इससे भारत की मेडल संख्या पर भी असर पड़ेगा। सुधा ने माँग की कि कम से कम पैरा एशियन गेम्स के लिए मुख्य कोच को जाने की अनुमति दी जाए।
कोचों की एकजुटता और नौटियाल का जज़्बा
पैरा शूटिंग कोच पवित्र ने भी नौटियाल को दल के साथ भेजने की माँग का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'नौटियाल जी के नेतृत्व में सभी खिलाड़ी अच्छी ट्रेनिंग कर रहे हैं। आज उनकी माताजी आईसीयू में भर्ती हैं, इसके बावजूद वह खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देकर गए हैं। उन्होंने हमारा हौसला बढ़ाया और कहा कि मैं जाऊं या न जाऊं, हमें भारत के लिए मेडल लेकर आना है।' पवित्र ने बताया कि नौटियाल के पास 12 साल का अनुभव है जो खिलाड़ियों और कोचों दोनों के लिए अमूल्य है।
क्या होगा आगे
पैरा शूटर्स और कोचों ने सरकार तथा भारतीय पैरालंपिक समिति से अपील की है कि इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए। गौरतलब है कि SAI की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह मामला ऐसे समय में उठा है जब भारत बड़े अंतरराष्ट्रीय पैरा खेल आयोजनों में अपनी उपस्थिति और मेडल तालिका को मज़बूत करने की दिशा में काम कर रहा है। अगले कुछ दिनों में SAI या पैरालंपिक समिति का रुख इस विवाद की दिशा तय करेगा।