क्या आरसीबी जैसी बड़ी फ्रेंचाइजी के लिए लीग में डेब्यू करना बड़ी बात है: गौतमी नायक?
सारांश
Key Takeaways
- गौतमी नायक की यात्रा प्रेरणादायक है।
- आरसीबी में डेब्यू करना एक बड़ी उपलब्धि है।
- महिला क्रिकेट में महिलाओं की भूमिका बढ़ रही है।
- गौतमी ने फिटनेस पर ध्यान केंद्रित किया।
- क्रिकेट में संस्कृति का महत्व है।
नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आरसीबी महिला प्रीमियर लीग में अद्वितीय प्रदर्शन कर रही है। टीम वर्तमान में अंकतालिका में शीर्ष पर है। दो युवा खिलाड़ियों ने आरसीबी का हिस्सा बनने को एक रोमांचक अनुभव बताया है।
आरसीबी की ऑलराउंडर गौतमी नायक ने राष्ट्र प्रेस के साथ अपनी टीम और घरेलू क्रिकेट की यात्रा को साझा किया।
उन्होंने कहा, "महिला प्रीमियर लीग में खेलना मेरे लिए एक सपने के सच होने जैसा था। यूपी वॉरियर्ज के खिलाफ डेब्यू करना बेहद रोमांचक था। अभ्यास सत्र के दौरान मुझे हेड कोच ने यूपी के खिलाफ मेरे डेब्यू के बारे में बताया था। आरसीबीमेहनत कर रही थी।"
नायक ने कहा, "आरसीबी में ग्रेस हैरिस, राधा यादव और श्रेयांका यादव से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। वे योजना के अनुसार प्रशिक्षण लेती हैं। मैं टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन करना चाहती हूं।"
गौतमी ने कहा, "मेरे करियर की शुरुआत एक तेज गेंदबाज के रूप में हुई थी, लेकिन मुझे बल्लेबाजी हमेशा से पसंद थी। प्रशिक्षण शिविर में, मैं गेंदबाजी से पहले बल्लेबाजी करना पसंद करती थी। मेरे कोच ने मेरी बल्लेबाजी क्षमता को पहचाना और मेरी तकनीक पर काम किया, जिसका परिणाम मेरी बल्लेबाजी पर दिखाई देता है।"
एक तेज गेंदबाज के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाली गौतमी अब ऑफ स्पिनर बन चुकी हैं। इसकी शुरुआत नगालैंड के लिए खेलते हुए बिहार के खिलाफ मैच में हुई थी। अपने कोच के कहने पर मैंने उस मैच में ऑफ स्पिन गेंदबाजी की थी और 5 विकेट झटके थे। उसी मैच के बाद बतौर ऑफ स्पिनर मेरी यात्रा शुरू हुई।
घरेलू क्रिकेट की अपनी यात्रा पर गौतमी ने कहा, "मेरा चयन घरेलू क्रिकेट में महाराष्ट्र क्रिकेट टीम में हुआ था, लेकिन टीम पहले से ही संतुलित थी, इसलिए मुझे खेलने का मौका नहीं मिला। इसलिए मैं नागालैंड चली गई। उस समय नागालैंड में क्रिकेट की शुरुआत हो रही थी और यह अपने प्रारंभिक चरण में था। वहां मुझे अपनी फिटनेस और तकनीक पर काम करने का मौका मिला। वहां मुझे किरण मोरे सर मिले। उन्होंने मुझे मुंबई इंडियंस के लिए ट्रायल दिलवाया और वडोदरा की तरफ से घरेलू क्रिकेट खेलने का प्रस्ताव दिया।"
उन्होंने कहा, "वडोदरा के साथ दो साल की अवधि में मुझे अपने खेल, फिटनेस और विशेष तौर पर माइंडसेट पर काम करने का मौका मिला। दो साल इस टीम के साथ खेलने के बाद मैंने अपनी घरेलू टीम महाराष्ट्र के साथ फिर से खेलने का फैसला किया। तीनों जगह खेलने का अलग-अलग और रोमांचक अनुभव रहा। तीनों जगह की संस्कृति काफी अलग थी जिसने मुझे बहुत कुछ सिखाया।"
आरसीबी में बतौर विकेटकीपर बल्लेबाज जुड़ी प्रत्यूषा कुमार ने कहा, "महिला प्रीमियर लीग की शुरुआत से ही ट्रायल को फॉलो कर रही हूं और इसके माध्यम से लीग क्रिकेट को समझने का प्रयास कर रही हूं। मैं प्रशिक्षण के दौरान अलग-अलग शॉट खेलने की कोशिश कर रही हूं ताकि ज्यादा से ज्यादा रन बना सकूं।"
ऋचा घोष के रहते टीम में जगह मिलना मुश्किल है। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह सब प्रोफेशन का हिस्सा है। मैं अपने खेल पर ध्यान दे रही हूं।
उन्होंने कहा, "आर एक्स मुरलीधर के साथ मैं पिछले 5-7 साल से जुड़ी हुई हूं और क्रिकेट की बारीकियां सीख रही हूं। आरसीबी को कोचिंग टीम से जुड़ने के बाद उनकी व्यस्तता बढ़ गई है। उनके पास उनकी अकेडमी के लिए समय कम था। इस वजह से मैंने नाइस अकेडमी में अर्जुन देव की देखरेख में प्रशिक्षण शुरू किया। पिछले 2 साल से वहीं सीख रही हूं। यहां मुझे अपने खेल में सुधार करने का काफी मौका मिला है। अर्जुन देव ने हमेशा अपने खेल को एंजॉय करने की सलाह दी है।"
प्रत्यूषा ने कहा, "श्रेयांका और अरुंधति नाइस अकेडमी से ही हैं, तो आरसीबी अपने जैसा लगता है।"