एशियन गेम्स 2026: 44 साल बाद गोल्ड, रुतुजा पिसल बोलीं — 'बेटा-बेटी में फर्क मत करो'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में चीन को 1-0 से हराकर 44 साल बाद स्वर्ण पदक अपने नाम किया — एक ऐतिहासिक जीत जिसने पूरे देश को गर्व से भर दिया। विजेता दल की सदस्य रुतुजा पिसल ने कहा कि टीम ने फाइनल में बिना किसी दबाव के, पूरी तैयारी और निडरता के साथ मैदान में कदम रखा।
मैदान पर उतरने से पहले का वो भावुक पल
रुतुजा पिसल ने बताया, '44 साल बाद गोल्ड जीता, तो बहुत अच्छा लग रहा है। हॉकी महाराष्ट्र ने मुझे सपोर्ट किया इसलिए यह हो पाया।' उन्होंने बताया कि मैच से पहले उन्होंने अपने माता-पिता से बात की थी और उन्होंने कहा था — 'दबाव मत लेना बेटा, अच्छे से खेलना, जान लगा देना और भारत का नाम रोशन करना है।'
गोल्ड जीतने के बाद सबसे पहला फोन भी पिता का आया, जो रुतुजा के अनुसार काफी भावुक थे और उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ने उनका नाम रोशन किया है।
चीन के खिलाफ रणनीति और आत्मविश्वास
रुतुजा ने बताया कि टीम को पहले से अनुमान था कि फाइनल में चीन से भिड़ंत हो सकती है। उन्होंने कहा, 'हमने वर्ल्ड कप में उनके खिलाफ 2-2 से ड्रॉ खेला था और उस मुकाबले में पहला गोल हमने किया था, तो उन्हें खिताबी मुकाबले में देखकर हमें डर नहीं लग रहा था — ऐसा लग रहा था कि वह हमसे डर रहे हैं।'
उन्होंने स्वीकार किया कि एकमात्र चिंता यह थी कि कड़ी मेहनत का जो स्तर उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में बनाए रखा, वह फाइनल में भी बरकरार रह पाएगा या नहीं। टीम की एकजुटता और पूर्व-नियोजित रणनीति ने आखिरकार यह काम कर दिखाया।
समाज को संदेश: बेटा-बेटी में फर्क मत करो
स्वर्ण पदक के साथ लौटीं रुतुजा पिसल ने लड़कियों के प्रति समाज की सोच पर भी बात की। उन्होंने कहा, 'लड़का या लड़की में फर्क नहीं करना चाहिए। लड़कियाँ जो चाहती हैं उन्हें वो करने की आज़ादी देनी चाहिए, चाहे फिर खेल हो या कोई अन्य क्षेत्र।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में बालिका खेलकूद में भागीदारी को लेकर व्यापक बहस जारी है।
क्रिकेट और हॉकी की तुलना पर रुतुजा ने कहा कि हर खेल को एक ही नज़रिए से देखा जाना चाहिए।
पुरुष हॉकी टीम ने भी रचा इतिहास
भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने भी एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में मलेशिया को 5-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता और साथ ही ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई किया। टीम के गोलकीपर सूरज करकेरा ने कहा, 'हमें खुशी है कि हमने गोल्ड मेडल जीता है और ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई किया है। किसी तरह का डर या दबाव नहीं था — यह हमारी कड़ी मेहनत और तैयारी का नतीजा है।'
सूरज ने क्रिकेट से तुलना पर कहा कि क्रिकेट और हॉकी दोनों ही भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 9 अक्टूबर 2026 का यह दिन भारतीय हॉकी के इतिहास में मील का पत्थर बनकर दर्ज हो गया है — दोनों वर्गों में एक ही दिन स्वर्ण, यह उपलब्धि अपने आप में बेमिसाल है।