क्या एस बद्रीनाथ घरेलू सर्किट का बड़ा सितारा होते हुए भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में चमक नहीं सके?

सारांश
Key Takeaways
- एस बद्रीनाथ का जन्म 30 अगस्त 1980 को चेन्नई में हुआ।
- उन्होंने भारतीय टीम के लिए 2 टेस्ट, 7 वनडे और 1 टी20 मैच खेले।
- बद्रीनाथ ने 145 प्रथम श्रेणी मैचों में 10,245 रन बनाए।
- विराट कोहली के कारण उनकी राष्ट्रीय टीम में जगह कम हो गई।
- बद्रीनाथ को घरेलू क्रिकेट में एक बेजोड़ बल्लेबाज माना जाता है।
नई दिल्ली, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। वर्ष 2008 में, भारतीय क्रिकेट टीम श्रीलंका के दौरे पर जाने वाली थी। उस सीरीज में सचिन तेंदुलकर शामिल नहीं थे। टीम इंडिया को उनकी जगह एक नए बल्लेबाज की आवश्यकता थी। उस समय दिलीप वेंगसरकर मुख्य चयनकर्ता थे, और उनके पास एस बद्रीनाथ और विराट कोहली के रूप में दो विकल्प थे। वेंगसरकर ने कोहली को मौका देने का निर्णय लिया, जिसने भारतीय क्रिकेट को एक नई दिशा दी।
दिलीप वेंगसरकर 2008 में हुए अंडर-19 विश्व कप में विराट कोहली की शानदार प्रदर्शन से प्रभावित थे। इसी कारण, कप्तान एमएस धोनी और तमिलनाडु क्रिकेट संघ के अध्यक्ष श्रीनिवासन के समर्थन के बावजूद उन्होंने विराट को अवसर दिया। विराट पर उनका विश्वास ने विश्व क्रिकेट को एक महान खिलाड़ी दिया।
हालांकि, विराट को ड्रॉप कर उसी सीरीज में एस बद्रीनाथ को भी मौका मिला, लेकिन वह उस अवसर का लाभ नहीं उठा सके और धीरे-धीरे राष्ट्रीय टीम में उनकी संभावनाएं समाप्त हो गईं। वहीं, विराट ने लगातार रन बनाते हुए अपनी जगह तीनों फॉर्मेट में सुनिश्चित कर ली।
एस बद्रीनाथ को भारत की तरफ से तीनों फॉर्मेट में खेलने का अवसर मिला। उन्होंने 2 टेस्ट, 7 वनडे और 1 टी20 खेले। 2011 के बाद उन्हें कभी राष्ट्रीय टीम में मौका नहीं मिला। वह आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स का हिस्सा रहे।
बद्रीनाथ को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सफलता नहीं मिली, लेकिन उनका नाम घरेलू क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाजों में शामिल है। तमिलनाडु का यह खिलाड़ी अपने करियर में मध्यक्रम के दिग्गज बल्लेबाज के रूप में स्थापित रहा।
उन्होंने 145 प्रथम श्रेणी मैचों में 32 शतक और 45 अर्धशतक10,245 रन बनाए। वहीं, 144 प्रथम श्रेणी मैचों में 6 शतक और 28 अर्धशतक लगाते हुए 4,164 रन बनाए।
30 अगस्त 1980 को चेन्नई में जन्मे बद्रीनाथ ने 28 सालअगस्त 2018 में उन्होंने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा की।
बद्रीनाथ उन खिलाड़ियों में रहे हैं जिनके पास अपार संभावनाएं और कई प्रकार के शॉट्स थे। उनकी तकनीक भी शानदार थी और मैदान पर उनकी चपलता भी देखते ही बनती थी। हालाँकि, उनका आगमन ऐसे समय में हुआ जब भारतीय क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा अपने चरम पर थी। बद्रीनाथ सीमित अवसरों को पूरी तरह से नहीं भुना सके, लेकिन क्रिकेट के गलियारों में आज भी उन्हें एक बेजोड़ बल्लेबाज के रूप में याद किया जाता है।