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भारतीय परिवारों की बचत ने जीडीपी का 21.7 प्रतिशत किया: केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी

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भारतीय परिवारों की बचत ने जीडीपी का 21.7 प्रतिशत किया: केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी

सारांश

केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि 2024-25 में भारतीय परिवारों की बचत जीडीपी के 21.7 प्रतिशत पर पहुँच गई है। यह बढ़ोतरी पिछले वर्ष के 20 प्रतिशत से अधिक है, जो अर्थव्यवस्था में सकारात्मक संकेत है।

मुख्य बातें

भारतीय परिवारों की बचत 21.7 प्रतिशत तक पहुँच गई है।
सरकार ने आयकर में छूट दी है।
खाद्य मुद्रास्फीति में -0.98 प्रतिशत की कमी आई है।
ईंधन की कीमतें वैश्विक स्तर पर बढ़ी हैं।
बचत का अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है।

नई दिल्ली, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार ने मंगलवार को संसद में जानकारी दी कि नई जीडीपी श्रृंखला के अनुसार (बेस वर्ष 2022-23) भारतीय परिवारों की बचत वित्त वर्ष 2024-25 में जीडीपी के 21.7 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जबकि वित्त वर्ष 2022-23 में यह 20 प्रतिशत थी।

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्य सभा में कहा कि घरेलू परिवारों की बचत अर्थव्यवस्था में निवेश का एक मुख्य स्रोत है। यह परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने आगे बताया, "हाल के वर्षों में, सरकार ने व्यावसायिक सुगमता में सुधार लाने, कौशल विकास पहलों का विस्तार करने, रोजगार सृजन करने, समावेशी मानव संसाधन विकास को प्रोत्साहित करने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए नीतियाँ अपनाई हैं, जिनसे परिवारों की आय और बचत में निरंतर वृद्धि होने की उम्मीद है।"

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि हाल में उठाए गए नीतिगत कदम, जैसे कि 12 लाख रुपए तक की वार्षिक आय पर आयकर छूट और जीएसटी दरों का समन्वय, से व्यय योग्य आय में वृद्धि की उम्मीद है। इससे मध्यम अवधि में घरेलू उपभोग, बचत और निवेश को बढ़ावा मिलेगा और ऋण पर निर्भरता में कमी आएगी।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में खाद्य और ईंधन की कोई महंगाई नहीं थी।

खुदरा खाद्य कीमतों में वित्त वर्ष 2025-26 में (अप्रैल से जनवरी) की अवधि में औसत -0.98 प्रतिशत की कमी देखी गई है, जो कि वित्त वर्ष 2024-25 में 7.3 प्रतिशत थी।

मंत्री ने कहा, “नई सीपीआई श्रृंखला में ईंधन के लिए कोई अलग श्रेणी नहीं है। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल-जनवरी के दौरान औसत ईंधन मुद्रास्फीति (-)3.16 प्रतिशत रही। वैश्विक कच्चे तेल के साथ-साथ भारतीय कच्चे तेल की कीमतों में पिछले वर्ष से गिरावट आई है; हालांकि, पश्चिम एशिया में हाल के भू-राजनीतिक तनावों के कारण कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं।”

खाद्य और ईंधन की मुद्रास्फीति घरेलू और वैश्विक कारकों के संयोजन से प्रभावित होती है। खाद्य मुद्रास्फीति मुख्य रूप से कृषि उत्पादन पर निर्भर करती है, जो मानसून की स्थिति, मौसम, मौसमी आपूर्ति में उतार-चढ़ाव, उर्वरक, ऊर्जा और श्रम जैसी लागतों के साथ-साथ आपूर्ति श्रृंखला, परिवहन और भंडारण अवसंरचना पर निर्भर करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कि स्थायी आर्थिक विकास का संकेत है। सरकार की नीतियों का प्रभाव स्पष्ट है और इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय परिवारों की बचत जीडीपी में कितने प्रतिशत है?
वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीय परिवारों की बचत जीडीपी के 21.7 प्रतिशत पर पहुँच गई है।
केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने क्या कहा?
उन्होंने बताया कि घरेलू परिवारों की बचत निवेश का मुख्य स्रोत है और सरकार ने कई नीतियाँ बनाई हैं जो इस वृद्धि में सहायक हैं।
क्या खाद्य मुद्रास्फीति में बदलाव आया है?
हां, वित्त वर्ष 2025-26 में खाद्य कीमतों में औसत -0.98 प्रतिशत की कमी आई है।
क्या सरकार ने आयकर में कोई छूट दी है?
जी हां, सरकार ने 12 लाख रुपए तक की वार्षिक आय पर आयकर छूट दी है।
क्या ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव आया है?
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनावों के कारण ईंधन की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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