सलीमा टेटे का फाइनल का संकल्प: FIH महिला हॉकी विश्व कप 2026 में भारत की दावेदारी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान सलीमा टेटे ने FIH महिला हॉकी विश्व कप 2026 से पहले स्पष्ट लक्ष्य घोषित किया है — इस बार टीम फाइनल तक पहुँचना चाहती है। 15 से 30 अगस्त 2026 के बीच बेल्जियम और नीदरलैंड की संयुक्त मेजबानी में होने वाले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में भारत आत्मविश्वास और नए संकल्प के साथ उतरेगा। सलीमा के लिए यह पहला मौका होगा जब वे किसी विश्व कप में टीम की कप्तानी करेंगी।
मुख्य घटनाक्रम
भारतीय टीम को विश्व कप के पूल डी में रखा गया है। टीम अपने अभियान की शुरुआत 16 अगस्त को चीन के खिलाफ करेगी, इसके बाद 18 अगस्त को दक्षिण अफ्रीका और 20 अगस्त को इंग्लैंड से मुकाबला होगा। मुख्य कोच सोजर्ड मारिजने की देखरेख में 20 सदस्यीय दल अपनी तैयारियों के अंतिम चरण में है। गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न FIH नेशंस कप में सलीमा की अगुवाई में भारतीय टीम ने एक भी मैच गँवाए बिना खिताब जीता था, जो इस विश्व कप से पहले टीम के मनोबल के लिए बड़ा संकेत है।
कप्तान की ज़ुबानी — फाइनल का सपना
सलीमा ने कहा कि कप्तान के रूप में पहले विश्व कप में उतरना उनके लिए बेहद खास एहसास है। उन्होंने स्वीकार किया, 'बेशक, मैं उत्साहित हूँ, लेकिन थोड़ी नर्वस भी हूँ क्योंकि यह हॉकी का सबसे बड़ा टूर्नामेंट है।' उन्होंने जोड़ा कि पिछले विश्व कप में टीम का खेल अच्छा था, लेकिन नतीजे अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहे। 'इस बार हम सभी फाइनल तक पहुँचने की बात कर रहे हैं — यही सपना हम सब देखते हैं,' सलीमा ने कहा। व्यक्तिगत स्तर पर उनकी प्राथमिकता प्रदर्शन से नेतृत्व करना है, ताकि वे टीम का बेहतर तरीके से साथ दे सकें।
टीम एकजुटता और युवा प्रतिभाओं का प्रबंधन
इस टीम में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का मिश्रण है। सलीमा के अनुसार, टीम की सबसे बड़ी ताकत आपसी संवाद है — युवा खिलाड़ी सीनियर खिलाड़ियों से बेझिझक बात करती हैं और सीनियर हमेशा मार्गदर्शन के लिए तैयार रहते हैं। उन्होंने युवा खिलाड़ियों को सलाह दी है कि वे अपनी मेहनत पर भरोसा रखें और विश्व कप के दबाव को खुद पर हावी न होने दें। 'गलतियाँ खेल का हिस्सा हैं, मायने यह रखता है कि आपकी सोच सही हो और आप आत्मविश्वास से भरे हों,' उन्होंने कहा।
चीन से पहले मैच — रणनीति और जज्बा
पूल स्टेज में पहले मुकाबले में चीन के खिलाफ उतरने से पहले सलीमा का संदेश स्पष्ट है — 'आत्मविश्वास और लड़ने के जज्बे के साथ खेलें।' उन्होंने कहा कि टीम को विरोधी की वजह से अपना खेल नहीं बदलना चाहिए, बल्कि अपने स्टाइल में हॉकी खेलनी चाहिए। 'हमारा लड़ने का जज्बा पहली सीटी से लेकर आखिरी सीटी तक दिखना चाहिए,' उन्होंने जोड़ा।
प्रेरणा और कोच की भूमिका
सलीमा के अनुसार, भारतीय जर्सी पहनना ही टीम की सबसे बड़ी प्रेरणा है। कोच मारिजने का संदेश सरल रहता है — खुद पर भरोसा करो और अपनी जानी-पहचानी हॉकी खेलो। 'जब हम अपनी तैयारी पर भरोसा करते हैं और एक टीम के तौर पर एकजुट रहते हैं, तो हमें पता होता है कि हम किसी का भी मुकाबला कर सकते हैं,' सलीमा ने कहा। यह विश्व कप भारतीय महिला हॉकी के लिए एक नई ऊँचाई छूने का अवसर है और टीम इस मौके को भुनाने के लिए पूरी तरह तैयार दिखती है।