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स्कॉट बोलैंड का खुलासा: '37 की उम्र में करियर लंबा खींचने के लिए बदली ट्रेनिंग की रणनीति'

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स्कॉट बोलैंड का खुलासा: '37 की उम्र में करियर लंबा खींचने के लिए बदली ट्रेनिंग की रणनीति'

सारांश

37 साल की उम्र में स्कॉट बोलैंड 10 साल बाद साउथ अफ्रीका लौट रहे हैं — इस बार कहीं ज्यादा तैयार। उन्होंने माना कि पहले जरूरत से ज्यादा ट्रेनिंग थकान लाती थी; अब स्मार्ट वर्कलोड मैनेजमेंट उनका हथियार है।

मुख्य बातें

स्कॉट बोलैंड 10 साल बाद साउथ अफ्रीका टेस्ट सीरीज के लिए लौट रहे हैं; आखिरी बार 2016 में वनडे सीरीज खेली थी।
2016 की उस वनडे सीरीज में ऑस्ट्रेलिया को प्रोटियाज से 0-5 की हार मिली थी।
37 वर्षीय बोलैंड ने बताया कि करियर लंबा चलाने के लिए अब ट्रेनिंग के तरीके और समय की बेहतर प्लानिंग कर रहे हैं।
बांग्लादेश टेस्ट से पहले आठ हफ्ते की तैयारी के बावजूद उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला; बाद में दो हफ्ते आराम और तीन हफ्ते अभ्यास किया।
बोलैंड ने कहा — '27 की उम्र में जो जानता हूं वो अगर तब पता होता, तो शायद बेहतर प्रदर्शन कर पाता।'

ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज स्कॉट बोलैंड 10 साल बाद साउथ अफ्रीका लौट रहे हैं — इस बार वनडे नहीं, बल्कि टेस्ट सीरीज के लिए। 37 वर्षीय बोलैंड ने गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को खुलकर बताया कि उम्र बढ़ने के साथ उन्होंने अपनी ट्रेनिंग और कार्यभार-प्रबंधन में किस तरह बड़ा बदलाव किया है, ताकि उनका करियर यथासंभव लंबा चल सके।

दस साल पहले की यादें धुंधली

बोलैंड ने आखिरी बार 2016 में साउथ अफ्रीका का दौरा किया था, जब उन्होंने पाँच मैचों की वनडे सीरीज में तीन मैच खेले थे। वह सीरीज ऑस्ट्रेलिया के लिए बेहद खराब रही — 2015 की चैंपियन ऑस्ट्रेलियाई टीम को प्रोटियाज के हाथों 0-5 की शर्मनाक हार झेलनी पड़ी थी।

उस दौरे को याद करते हुए बोलैंड ने कहा, 'मुझे कुछ भी याद नहीं है। सच कहूं तो, मुझे पता है कि मैदान पर हमारा प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। हमारा बॉलिंग अटैक बहुत अनुभवहीन था। मगर उसके अलावा, मुझे कुछ भी याद नहीं है। मुझे याद नहीं कि हम कहां थे। मुझे नहीं पता कि मैंने उस याद को भुला दिया है, क्योंकि वह दौरा अच्छा नहीं रहा था। हालांकि, मुझे लगता है कि 10 साल का समय बहुत लंबा होता है।'

गौरतलब है कि उस सीरीज में मिचेल स्टार्क, जोश हेजलवुड और पैट कमिंस जैसे दिग्गज अनुपस्थित थे। बोलैंड को जॉन हेस्टिंग्स, क्रिस ट्रेमेन, जो मेनी और डैन वॉरल के साथ गेंदबाजी करनी पड़ी थी।

ट्रेनिंग में आया बड़ा बदलाव

आज के बोलैंड उस 2016 के बोलैंड से कहीं अलग हैं। उन्होंने बताया, 'मैंने अपने काम करने के तरीके या गेंदबाजी करने के तरीके में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं किया है। मगर मुझे लगता है कि सबसे बड़ा बदलाव मैचों की तैयारी, अपने शरीर को बेहतर ढंग से समझने और छोटी-छोटी चीजों को सही करने में आया है।'

बोलैंड ने स्वीकार किया कि पहले वे जरूरत से ज्यादा ट्रेनिंग करते थे, जिससे सीरीज के अंतिम चरण में थकान आ जाती थी। उन्होंने कहा, 'दस साल पहले मैंने शायद जरूरत से ज्यादा ट्रेनिंग की थी और मैचों में — खासकर सीरीज के आखिरी हिस्से में — थकान के साथ उतरता था। अब जाहिर है कि उम्र बढ़ने के साथ मैं चाहता हूं कि मेरा करियर जितना हो सके उतना लंबा चले। इसी कारण मैं अपनी ट्रेनिंग के तरीके और समय को बेहतर ढंग से प्लान कर रहा हूं, ताकि सीरीज के आखिर तक मुझमें थोड़ी एनर्जी बची रहे।'

बांग्लादेश सीरीज से मिला सबक

बोलैंड ने बांग्लादेश टेस्ट से पहले आठ हफ्ते तक गहन तैयारी की, लेकिन उन्हें उस सीरीज में खेलने का अवसर नहीं मिला। इसके बाद उन्हें दो हफ्ते का आराम दिया गया और फिर विक्टोरिया के लिए न्यू साउथ वेल्स के खिलाफ 50 ओवर के मैच से पहले उन्होंने तीन हफ्ते तक गेंदबाजी का अभ्यास किया।

बोलैंड ने बताया, 'उस सीरीज के बाद मैं दो हफ्ते तक बॉलिंग नहीं करना चाहता था। मुझे लगा कि मैं वहां नेट्स और सेंटर विकेट पर बहुत अच्छी बॉलिंग कर रहा था। जब वह मौका निकल गया और मैंने अपने री-लोड पर ध्यान दिया, तो मुझे पता था कि रवाना होने से पहले मुझे लगभग 10-12 ओवर बॉलिंग करनी होगी। इसलिए यह मैच बहुत सही रहा।'

अनुभव की कीमत

बोलैंड ने एक परिपक्व क्रिकेटर की तरह अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि कई खिलाड़ी कहते हैं कि उम्र बढ़ने पर उन्हें काश पता होता कि उन्होंने क्या किया था। 37 साल की उम्र में मेरे साथ भी ऐसा ही है। अगर मुझे 27 साल की उम्र में वो पता होता जो मुझे अब पता है, तो शायद मैं बेहतर प्रदर्शन कर पाता।'

यह ऐसे समय में आया है जब ऑस्ट्रेलिया की तेज गेंदबाजी इकाई दुनिया की सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। बोलैंड टेस्ट क्रिकेट में अपनी असाधारण सफलता दर के लिए विख्यात हैं और इस दौरे से वे अपने टेस्ट करियर को और मजबूत करने का इरादा रखते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

हेजलवुड और कमिंस को लगातार चोटों से जूझते देखा है, जबकि बोलैंड ने देर से अंतरराष्ट्रीय मंच पर कदम रखकर खुद को ताजगी से बनाए रखा। यह विडंबना है कि जो खिलाड़ी 2016 की 0-5 की हार में हाशिये पर था, वही अब टेस्ट क्रिकेट में सबसे किफायती और भरोसेमंद गेंदबाजों में गिना जाता है। उनका 'कम ट्रेनिंग, बेहतर प्रदर्शन' का फलसफा युवा तेज गेंदबाजों के लिए एक सबक हो सकता है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्कॉट बोलैंड साउथ अफ्रीका टेस्ट सीरीज 2026 में खेलेंगे?
हाँ, स्कॉट बोलैंड ऑस्ट्रेलिया की तरफ से साउथ अफ्रीका के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज के लिए चुने गए हैं। वे 2016 के वनडे दौरे के बाद पहली बार साउथ अफ्रीका जा रहे हैं।
2016 की ऑस्ट्रेलिया-साउथ अफ्रीका वनडे सीरीज में क्या हुआ था?
2016 की उस पाँच मैचों की वनडे सीरीज में ऑस्ट्रेलिया को 0-5 से करारी हार मिली थी। मिचेल स्टार्क , जोश हेजलवुड और पैट कमिंस जैसे प्रमुख गेंदबाज अनुपस्थित थे और बॉलिंग अटैक अनुभवहीन था।
स्कॉट बोलैंड ने अपनी ट्रेनिंग में क्या बदलाव किया है?
बोलैंड ने बताया कि पहले वे जरूरत से ज्यादा ट्रेनिंग करते थे जिससे सीरीज के अंतिम मैचों में थकान आ जाती थी। अब 37 साल की उम्र में वे वर्कलोड को बेहतर ढंग से प्लान करते हैं, शरीर को समझते हैं और सीरीज के अंत तक ऊर्जा बनाए रखने पर जोर देते हैं।
बांग्लादेश टेस्ट में बोलैंड को मौका क्यों नहीं मिला?
बोलैंड ने बांग्लादेश टेस्ट से पहले आठ हफ्ते तक तैयारी की थी, लेकिन उन्हें उस सीरीज में खेलने का अवसर नहीं दिया गया। इसके बाद उन्हें दो हफ्ते आराम करने और फिर 50 ओवर के घरेलू मैच में गेंदबाजी करने का मौका मिला।
स्कॉट बोलैंड की उम्र कितनी है और वे कब से टेस्ट क्रिकेट खेल रहे हैं?
स्कॉट बोलैंड की उम्र 37 साल है। वे टेस्ट क्रिकेट में देर से ब्रेक पाने के बावजूद अपनी असाधारण सफलता दर के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने खुद कहा कि काश 27 की उम्र में वो ज्ञान होता जो अब है।
राष्ट्र प्रेस
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