टी20 फील्डिंग संकट: आर. श्रीधर बोले — टीम इंडिया को कल्चर में आमूल बदलाव की दरकार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व फील्डिंग कोच आर. श्रीधर ने 12 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट चेतावनी दी कि टी20 फॉर्मेट में टीम इंडिया की फील्डिंग में आ रही गिरावट को रोकने के लिए महज तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि पूरे कल्चर में आमूल बदलाव की ज़रूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि 22 अक्टूबर से शुरू होने वाले न्यूजीलैंड दौरे से पहले टीम में शामिल नए खिलाड़ी फील्डिंग के मामले में पर्याप्त रूप से तैयार नहीं हैं।
चौंकाने वाले आँकड़े
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में टी20 मुकाबलों में भारत की फील्डिंग का स्तर चिंताजनक रूप से गिरा है। कैच पकड़ने की क्षमता के मामले में भारत टॉप 10 देशों में दूसरे-आखिरी स्थान पर है — सफलता दर महज 73.4 प्रतिशत। टीम ने इस दौरान 58 कैच छोड़े हैं। भले ही भारतीय फील्डरों ने 129 रन बचाए हों, कैच छोड़ने और ग्राउंड-फील्डिंग की गलतियों के कारण 226 रन अतिरिक्त बने — जिससे कुल मिलाकर 97 रनों का शुद्ध नुकसान हुआ।
रनआउट के मौके गँवाने के मामले में भारत सभी टीमों में सबसे आगे है — 19 मौके चूके, जबकि टीम ने 14 रनआउट किए। इसके अलावा, भारतीय विकेटकीपरों ने स्टंपिंग के पाँच मौकों में से दो मौके गँवाए।
श्रीधर का कड़ा आकलन
सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क द्वारा आयोजित एक वर्चुअल बातचीत में श्रीधर ने कहा, 'फॉर्म अच्छी नहीं है। भारतीय टीम की फील्डिंग का फॉर्म, न सिर्फ पिछले कुछ मुकाबलों में, बल्कि पिछले कुछ महीनों में भी अच्छा नहीं रहा है। हमने टी20 वर्ल्ड कप जीता, लेकिन उस टूर्नामेंट में भी हम एक अच्छी फील्डिंग यूनिट के आसपास भी नहीं थे। उस सेमीफाइनल में शायद अक्षर पटेल ने ही हमें हारने से बचाया था।'
श्रीधर ने आगे कहा कि बैटिंग और तेज गेंदबाज़ी में जो सांस्कृतिक स्पष्टता दिखती है, वह फील्डिंग में सिरे से गायब है। उनके अनुसार, 'चिंता की बात यह है कि टीम में आने वाले नए खिलाड़ियों की फील्डिंग क्षमता उतनी अच्छी नहीं है। जो भी आ रहा है, वह कोहली, सूर्यकुमार या श्रेयस जैसा फील्डर नहीं लगता — ऐसा लगता है कि उन्हें सिर्फ एक ही स्किल, यानी बैटिंग, पर तैयार किया गया है।'
न्यूजीलैंड दौरे की विशेष चुनौती
श्रीधर ने न्यूजीलैंड के मौसम को एक अलग किस्म की परीक्षा बताया। उनके अनुसार, भारत आमतौर पर जनवरी-फरवरी में न्यूजीलैंड का दौरा करता है, लेकिन इस बार टीम अक्टूबर के आखिर और नवंबर में वहाँ खेलेगी — यानी शुरुआती वसंत की कड़कड़ाती ठंड में। उन्होंने वेलिंगटन की तेज हवाओं और क्राइस्टचर्च के हैगली ओवल की ठंड का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि फील्डरों को हाथों को गर्म रखने के लिए हैंड वार्मर तक का सहारा लेना पड़ सकता है। उन्होंने जोड़ा कि 'इस साल भारत में अक्टूबर बेहद गर्म रहा है — इसकी वजह सुपर अल नीनो है। ऐसे में वहाँ के माहौल के हिसाब से ढलना खिलाड़ियों के लिए आसान नहीं होगा।'
कोहली-युग का ब्लूप्रिंट और वर्तमान कोचिंग स्टाफ की ज़िम्मेदारी
श्रीधर ने पूर्व कप्तान विराट कोहली के दौर में बनाए गए ब्लूप्रिंट का हवाला दिया, जिसमें हर सेशन में खिलाड़ियों की उपस्थिति और फील्डिंग में उनकी भूमिका की निगरानी की जाती थी। उन्होंने 2018 की साउथ अफ्रीका वनडे सीरीज का उदाहरण दिया जब गेंदबाज़ों को स्पष्ट रूप से बताया गया था कि फील्डिंग उनकी दूसरी अनिवार्य स्किल है।
उन्होंने हेड कोच गौतम गंभीर और फील्डिंग कोच सुभादीप घोष पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें कैचिंग और ग्राउंड फील्डिंग के मामले में कड़े स्टैंडर्ड और जवाबदेही तय करनी होगी। उन्होंने कहा, 'नए फील्डिंग कोच के सामने एक अहम काम है। उन्हें फील्डर्स के रोल साफ करने होंगे। वह बहुत मेहनती और अनुभवी कोच हैं। मुझे यकीन है कि जीजी और बाकी कोचिंग स्टाफ के साथ मिलकर वे साफ-सुथरी योजनाएँ बनाएँगे।'
वैभव सूर्यवंशी और युवा खिलाड़ियों पर विशेष ध्यान
15 वर्षीय बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी के बारे में श्रीधर ने कहा कि उन्हें मैच के दौरान सब्स्टिट्यूट करने की बजाय एक व्यवस्थित शेड्यूल के तहत एक भरोसेमंद फील्डर के रूप में तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, '18 या 19 साल की उम्र तक आप चाहेंगे कि वैभव एक बहुत अच्छे फील्डर के तौर पर निखरकर सामने आए। किसी को उनकी ज़िम्मेदारी लेनी होगी।'
श्रीधर ने 1983 वर्ल्ड कप फाइनल में कपिल देव के ऐतिहासिक कैच और 2024 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में सूर्यकुमार यादव के मैच-पलटने वाले कैच का स्मरण कराते हुए कहा कि एक बेहतरीन कैच न सिर्फ मैच, बल्कि पूरे युग की दिशा बदल सकता है। 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियों को देखते हुए यह संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है।