क्या उस्मान ख्वाजा ने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में नस्लीय सोच पर सवाल उठाए?
सारांश
Key Takeaways
- नस्लीय सोच पर चर्चा आवश्यक है।
- खेल के क्षेत्र में भेदभाव अस्वीकार्य है।
- ख्वाजा का अनुभव हमें समानता की दिशा में प्रेरित करता है।
सिडनी, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। एशेज सीरीज के अंतिम टेस्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई लेने की घोषणा करने वाले उस्मान ख्वाजा ने अपने विदाई भाषण में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में नस्लीय सोच पर अपने विचार व्यक्त किए।
ख्वाजा ने यह दावा किया कि उनकी जाति और धर्म के कारण उनके साथ उनके करियर के दौरान भिन्नता से व्यवहार किया गया है।
उन्होंने पर्थ टेस्ट से पहले तीन दिन तक गोल्फ खेलने के कारण उठी आलोचना का जिक्र करते हुए कहा कि पीठ में ऐंठन के कारण वह दोनों पारियों में ओपनिंग नहीं कर सके। यह एक ऐसी स्थिति थी, जिसे मैं नियंत्रित नहीं कर सकता था और जिस प्रकार से मीडिया और पूर्व खिलाड़ियों ने मुझ पर हमला किया, वह अप्रत्याशित था। मैंने इसे लगभग पांच दिन तक सहा।
ख्वाजा ने कहा, "यह वही नस्लीय सोच है, जिसके साथ मैं अपनी पूरी जिंदगी बड़ा हुआ हूं। हम इस पर पूरी तरह से विजय प्राप्त नहीं कर पाए हैं, क्योंकि मैंने पहले कभी ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट टीम में ऐसा बर्ताव नहीं देखा।"
उन्होंने कहा, "आज भी कुछ बातें हैं, जिनसे मुझे हर दिन लड़ना पड़ता है, और ये मेरे लिए बहुत निराशाजनक हैं। मैं आपको कई ऐसे लोगों के बारे में बता सकता हूं जिन्होंने (टेस्ट से) एक दिन पहले गोल्फ खेला और चोटिल हुए, लेकिन उनके बारे में कुछ नहीं कहा गया।"
ख्वाजा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, "मैं जानता हूं कि ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम में जगह बनाना कठिन है। 11 पद हैं। यह आसान नहीं है, और हम किसी को स्थान नहीं देना चाहते। अभी भी चुनौतियों का सामना करना बाकी है। मैं 'अगले उस्मान ख्वाजा' की जिंदगी को आसान बनाना चाहता हूं।