30 जुलाई 2026
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हर जगह मुसलमानों को निशाना बनाना गलत: अबू आजमी का बयान

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हर जगह मुसलमानों को निशाना बनाना गलत: अबू आजमी का बयान

सारांश

अबू आजमी ने कीर्ति आजाद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हर जगह मुसलमानों को निशाना बनाना सही नहीं है। उन्होंने सरकार के बजट में मुसलमानों की उपेक्षा और धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर भी विचार साझा किए।

मुख्य बातें

हर जगह मुसलमानों को निशाना बनाना गलत है।
समान सम्मान की आवश्यकता है।
मुसलमानों के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं है।
धर्म परिवर्तन एक व्यक्तिगत विकल्प है।
बेरोजगारी और आपराधिक गतिविधियों में वृद्धि हो सकती है।

मुंबई, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख नेता अबू आजमी ने टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद के टी-20 विश्व कप पर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हर जगह मुसलमानों को निशाना बनाना उचित नहीं है। इस देश में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और पारसी सभी एक साथ रहते हैं और सभी को समान सम्मान मिलना चाहिए।

कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया पर विश्व कप की ट्रॉफी को मंदिर में ले जाने पर आलोचना की थी। उन्होंने लिखा कि टीम इंडिया को इस पर शर्म आनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि जब हमने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में विश्व कप जीता था, तब हमारी टीम में विभिन्न धर्मों के खिलाड़ी शामिल थे। उन्होंने सवाल उठाया कि भारतीय क्रिकेट ट्रॉफी को क्यों घसीटा जा रहा है? मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे का ज़िक्र क्यों नहीं किया जा रहा?

अबू आजमी ने यह भी कहा कि सभी धर्मों का सम्मान आवश्यक है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य के मुसलमानों को आर्थिक रूप से यतीम बना दिया गया है। महाराष्ट्र का कुल बजट लगभग 7 लाख 69 हजार करोड़ है, लेकिन मुसलमानों के लिए कोई बजट आवंटित नहीं किया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि यह कहना गलत नहीं होगा कि सबका साथ, सबका विकास बस एक नारा बनकर रह गया है। क्या एक बड़ी आबादी को विकास से वंचित रखकर राज्य का विकास संभव है? बजट में मुसलमानों का कोई हिस्सा नहीं है।

धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर अबू आजमी ने कहा कि कोई भी व्यक्ति 18 साल की उम्र के बाद धर्म परिवर्तन कर सकता है। यह सब एक साजिश है और लोग अपनी मर्ज़ी से धर्म बदलते हैं। मुसलमानों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

फेरी वालों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि उनमें केवल अल्पसंख्यक ही नहीं होते, बल्कि सभी समुदाय के लोग शामिल होते हैं। लेकिन जानबूझकर अल्पसंख्यकों का नाम लिया जाता है। बांग्लादेशी लोगों का आरोप लगाया जाता है, लेकिन अगर कुछ हैं भी, तो यह सरकार की विफलता है।

उन्होंने कहा कि आज बहुत से लोग बेरोजगार हैं और खुद से सामान बेचकर अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं। अगर सरकार उन्हें बेरोजगार कर देगी, तो यह अपराध और बेरोजगारी बढ़ाएगा। सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि फेरी वालों को कहीं बैठाना चाहिए।

रमज़ान के महीने में ज़कात निकालने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह उनकी आमदनी का लगभग 2.5 प्रतिशत होता है। रमज़ान में ज़कात देने से इस्लाम में पुण्य मिलता है। उन्होंने कहा कि वे जानते हैं कि विधवा महिलाएं रमज़ान में मोहम्मद अली रोड पर स्टॉल लगाकर कमाई करती हैं। अगर यह बंद हो जाएगा, तो यह जानबूझकर बेरोज़गारी बढ़ाने की कोशिश है।

उन्होंने कहा कि रमज़ान में लोग रात को इबादत करते हैं, खाना खाते हैं। सरकार को एक महीने के लिए छूट देनी चाहिए ताकि लोग अपना छोटा-मोटा व्यापार कर सकें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अबू आजमी ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि हर जगह मुसलमानों को निशाना बनाना सही नहीं है और सभी धर्मों का सम्मान आवश्यक है।
महाराष्ट्र के बजट में मुसलमानों के लिए क्या प्रावधान है?
अबू आजमी के अनुसार, मुसलमानों के लिए बजट में कोई हिस्सा नहीं है।
धर्म परिवर्तन पर अबू आजमी का क्या कहना है?
उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति 18 साल की उम्र के बाद धर्म परिवर्तन कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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