क्या अहमदाबाद में प्रवर्तन निदेशालय ने दो अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया?
सारांश
Key Takeaways
- प्रवर्तन निदेशालय ने दो अचल संपत्तियाँ जब्त की हैं।
- इनकी कुल कीमत 53.50 लाख रुपए है।
- आरोपी प्रेम देवी लूनिया और पायल चोकसी हैं।
- जांच ओरिएंटल बैंक की शिकायत पर शुरू हुई थी।
- मामले में फंड डायवर्जन की जांच की जा रही है।
अहमदाबाद, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय के अहमदाबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने 12 जनवरी 2026 को दो अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत 53.50 लाख रुपए है, जबकि इनकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग 4.65 करोड़ रुपए है। ये संपत्तियां आरोपी प्रेम देवी लूनिया और पायल चोकसी के नाम पर हैं।
जांच की प्रक्रिया ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की शिकायत पर शुरू हुई थी। इस शिकायत के आधार पर केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 24 मई 2018 को मेसर्स श्री ओम फैब और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद 16 दिसंबर 2019 को चार्जशीट दायर की गई, जिसमें पता चला कि रंजीत लूनिया की सभी प्रोप्राइटरशिप कंपनियों को बैंक द्वारा 1.50 लाख रुपए की क्रेडिट लिमिट दी गई थी। इस लोन पर ब्याज सहित कुल 9.95 करोड़ रुपए बकाया था, जो एनपीए की तारीख तक बढ़कर लगभग 10.932 करोड़ रुपए हो गया था।
जांच में यह पाया गया कि रंजीत लूनिया ने पैनल वैल्यूअर मयूर शाह और बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर एक क्रिमिनल साजिश की। उन्होंने नकली और गलत बिजनेस रिकॉर्ड तैयार किए और लोन लेने के लिए गिरवी रखी गई संपत्तियों की झूठी वैल्यूएशन रिपोर्ट बैंक में जमा करवाई।
इसके अतिरिक्त, लोन के पैसे का उपयोग वास्तविक बिजनेस के बजाय विभिन्न बैंक खातों में डायवर्ट किया गया। बाद में यह राशि कैश में निकाली गई और बुलियन खरीदने तथा हाउस लोन चुकाने जैसी गतिविधियों में इस्तेमाल की गई।
प्रवर्तन निदेशालय ने मामले की जांच के दौरान आरोपी लोगों के ठिकानों पर तलाशी भी ली, जिससे लगभग 3.67 करोड़ रुपए मूल्य की कीमती चीजें बरामद हुईं। जांच के दौरान यह भी पता चला कि प्रयाग रेजीडेंसी और सिएस्टा ड्वेलिंग में स्थित ये दो अचल संपत्तियां हाउसिंग लोन की रिपेमेंट के लिए लोन अकाउंट के फंड से खरीदी गई थीं। इसी आधार पर 12 जनवरी 2026 को इन संपत्तियों के अस्थायी जब्ती आदेश जारी किए गए।
अधिकारियों ने बताया कि अब तक प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई जब्ती और अटैचमेंट वाली संपत्तियों की कुल मौजूदा बाजार कीमत लगभग 8.30 करोड़ रुपए है। मामले में जांच जारी है और अधिकारियों ने कहा है कि फंड डायवर्जन और अन्य संलिप्त व्यक्तियों की भूमिका की विस्तृत जांच की जाएगी।