एयर इंडिया और इंडिगो ने बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज, घरेलू उड़ानों पर ₹400–₹1,300 तक अतिरिक्त भार
सारांश
मुख्य बातें
एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस और इंडिगो — तीनों प्रमुख भारतीय एयरलाइनों ने अक्टूबर 2026 में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव के चलते एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में तेज उछाल इसकी मुख्य वजह बताई जा रही है।
एयर इंडिया के नए सरचार्ज की दरें
टाटा ग्रुप की एयरलाइन एयर इंडिया ने स्पष्ट किया कि यह बदला हुआ सरचार्ज 9 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:00 बजे IST के बाद की गई नई बुकिंग पर लागू होगा। वहीं एयर इंडिया एक्सप्रेस के लिए यह बदलाव उसी दिन रात 12:00 बजे IST से प्रभावी होगा।
घरेलू वन-वे उड़ानों पर नया सरचार्ज इस प्रकार है: 500 किलोमीटर तक की उड़ानों के लिए ₹400, 501–1,000 किलोमीटर के लिए ₹600, 1,001–1,500 किलोमीटर के लिए ₹850, और 1,501 किलोमीटर से अधिक दूरी की उड़ानों पर ₹1,200।
अंतरराष्ट्रीय रूट पर एयर इंडिया का सरचार्ज — उत्तरी अमेरिका के लिए $215, ऑस्ट्रेलिया के लिए $210, यूके और यूरोप के लिए $135, तथा पश्चिमी एशिया और मध्य पूर्व के लिए $55 निर्धारित किया गया है।
इंडिगो की नई फ्यूल चार्ज संरचना
इंडिगो ने 6 अक्टूबर 2026 को रात 00:01 बजे से नई बुकिंग पर संशोधित फ्यूल चार्ज लागू किया। एयरलाइन के अनुसार, ईंधन की कीमतें पिछले महीने की तुलना में 14 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी हैं और ATF लागत पिछले एक दशक के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच गई है।
घरेलू उड़ानों पर इंडिगो का नया सरचार्ज: 500 किलोमीटर तक — ₹375; 501–1,000 किलोमीटर — ₹600; 1,001–1,500 किलोमीटर — ₹900; 1,501–2,000 किलोमीटर — ₹1,150; और 2,000 किलोमीटर से अधिक — ₹1,300।
अंतरराष्ट्रीय रूट पर इंडिगो का सरचार्ज — सार्क क्षेत्र में 500 किलोमीटर तक के रूट पर ₹1,000 और 501 किलोमीटर से अधिक के रूट पर ₹3,000 तय किया गया है। दक्षिण-पूर्व एशिया, GCC और मध्य पूर्व, तथा उत्तर व पूर्व एशिया की उड़ानों पर ₹5,500 का शुल्क लगेगा। अफ्रीका के लिए यह ₹6,000 और यूरोप के लिए ₹10,000 होगा।
इंडिगो ने कहा कि बदले हुए चार्ज को वास्तविक ईंधन लागत में हुई बढ़ोतरी से कम रखा गया है, ताकि यात्रियों पर असर सीमित रहे।
ATF कीमतों में उछाल की पृष्ठभूमि
एयर इंडिया ने अपने बयान में कहा, 'हाल के महीनों में भू-राजनीतिक घटनाक्रम और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर लगातार दबाव के कारण ATF की कीमतें उतार-चढ़ाव वाली रही हैं। कीमतों में हालिया बढ़ोतरी से एयरलाइन की ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ गई है, जिसमें कुल खर्च का एक बड़ा हिस्सा ईंधन का है।'
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष ने वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना रखा है। भारतीय एयरलाइनों के लिए ATF की लागत कुल परिचालन व्यय का 35–40 प्रतिशत तक होती है, जो इसे किसी भी मूल्य वृद्धि के प्रति अत्यंत संवेदनशील बनाती है।
यात्रियों पर असर और आगे की राह
गौरतलब है कि दोनों एयरलाइनों ने लगभग एक साथ यह बदलाव किया है, जिससे प्रतिस्पर्धी दरों पर यात्रा करने के विकल्प सीमित हो सकते हैं। यह त्योहारी सीज़न के दौरान आया है जब हवाई यात्रा की माँग आमतौर पर अधिक रहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ATF की कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं या और बढ़ती हैं, तो अन्य एयरलाइनें भी इस दिशा में कदम उठा सकती हैं। फ्यूल सरचार्ज की संरचना सेक्टर और रूट के अनुसार अलग-अलग है, इसलिए यात्रियों को बुकिंग से पहले अपने रूट का कुल किराया ध्यान से जाँचना होगा।