13 जुलाई 2026
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जेट फ्यूल महंगा होने से इंडिगो ने जून-अगस्त में 5-7% उड़ानें घटाईं, एयर इंडिया 22% कटौती पहले ही कर चुकी

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जेट फ्यूल महंगा होने से इंडिगो ने जून-अगस्त में 5-7% उड़ानें घटाईं, एयर इंडिया 22% कटौती पहले ही कर चुकी

सारांश

जेट फ्यूल की आग में जल रही भारतीय एयरलाइंस — इंडिगो जून-अगस्त में 5-7% घरेलू उड़ानें घटाएगी, जबकि एयर इंडिया पहले ही 22% कटौती का ऐलान कर चुकी है। ईरान संघर्ष, कमज़ोर रुपया और मौसमी मांग में गिरावट ने मिलकर भारतीय विमानन क्षेत्र को गंभीर लागत संकट में धकेल दिया है।

मुख्य बातें

इंडिगो जून से अगस्त 2026 के बीच घरेलू उड़ानों की क्षमता में 5-7 प्रतिशत की कटौती करेगी।
एयर इंडिया ने इसी अवधि में घरेलू उड़ानों में 22 प्रतिशत कटौती की पहले ही घोषणा की है।
इंडिगो अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की क्षमता में पहले ही लगभग 17 प्रतिशत की कमी कर चुकी है।
एयर इंडिया की परिचालन लागत में ईंधन की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है; लगभग 20 प्रतिशत घरेलू उड़ानें रद्द होने की संभावना।
ईरान संघर्ष और रुपए की कमज़ोरी ने ईंधन लागत को और बढ़ाया है।
गर्मियों के बाद यात्री मांग में मौसमी गिरावट ने लागत संकट को और गहरा किया।

इंडिगो ने जून से अगस्त 2026 के बीच अपनी घरेलू उड़ानों की क्षमता में 5-7 प्रतिशत की कटौती करने का फैसला किया है, जो जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतों और यात्री मांग में मौसमी गिरावट के संयुक्त दबाव का नतीजा है। एयर इंडिया द्वारा इसी अवधि में घरेलू उड़ानों में 22 प्रतिशत की कटौती की घोषणा के बाद इंडिगो का यह कदम भारतीय विमानन क्षेत्र में बढ़ते लागत संकट की गंभीरता को रेखांकित करता है।

इंडिगो और एयर इंडिया की कटौती का विवरण

इंडिगो ने घरेलू कटौती से पहले ही अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की क्षमता में लगभग 17 प्रतिशत की कमी कर दी थी। अब अस्थायी शेड्यूल समायोजन के तहत घरेलू मार्गों पर भी यही रणनीति अपनाई जा रही है। वहीं, टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि पहले से घोषित अंतरराष्ट्रीय सेवाओं में कटौती की कड़ी में, जून से अगस्त 2026 के दौरान चुनिंदा घरेलू मार्गों पर भी अस्थायी रूप से परिचालन को तर्कसंगत बनाया गया है।

एयर इंडिया को कथित तौर पर लगभग 20 प्रतिशत घरेलू उड़ानें रद्द करनी होंगी, जिससे ईंधन की खपत घटेगी — जो उसकी परिचालन लागत का करीब 40 प्रतिशत है। एयरलाइन फिलहाल घाटे को कम करने के दबाव में काम कर रही है।

जेट फ्यूल की कीमतें क्यों बढ़ीं

विशेषज्ञों के अनुसार, विमानन ईंधन एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का लगभग एक चौथाई हिस्सा होता है, जिससे एयरलाइनें कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाती हैं। ईरान में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में अनिश्चितता को और गहरा किया है, जिसके चलते हाल के महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर रहकर पूरा करता है, जिससे घरेलू एयरलाइंस विशेष रूप से प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा, रुपए की कमज़ोरी ने भी डॉलर में होने वाली ईंधन खरीद को और महंगा बना दिया है।

मांग में मौसमी गिरावट का असर

गर्मियों की छुट्टियों के चरम मौसम के बाद यात्री मांग में स्वाभाविक कमी देखी जाती है। विश्लेषकों का कहना है कि घटती मांग और बढ़ती ईंधन लागत के इस दोहरे दबाव ने एयरलाइंस को अपनी क्षमता योजनाओं को पुनर्गठित करने पर मजबूर किया है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय विमानन क्षेत्र महामारी के बाद की रिकवरी के बाद एक नई चुनौती से जूझ रहा है।

यात्रियों पर असर और आगे की स्थिति

घरेलू उड़ानों में कटौती से जून-अगस्त 2026 के दौरान कुछ मार्गों पर सीटों की उपलब्धता कम होने और किराए में बढ़ोतरी की आशंका है। गौरतलब है कि यह वही अवधि है जब स्कूलों की छुट्टियों के बाद भी कॉर्पोरेट और धार्मिक यात्राएं जारी रहती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, एयरलाइंस के लिए राहत की संभावना सीमित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तभी भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रा कमज़ोरी ने मुनाफे की उम्मीदें धुंधली कर दीं। असली सवाल यह है कि सरकार एटीएफ पर करों की समीक्षा कब करेगी — जो दुनिया में सबसे ऊंचे हैं — क्योंकि बिना उस राहत के, क्षमता कटौती का यह सिलसिला यात्रियों की जेब पर सीधा बोझ बनता रहेगा।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडिगो ने घरेलू उड़ानों में कितनी कटौती की है?
इंडिगो जून से अगस्त 2026 के बीच अपनी घरेलू उड़ानों की क्षमता में 5-7 प्रतिशत की कटौती करने जा रही है। इससे पहले एयरलाइन अपनी अंतरराष्ट्रीय क्षमता में करीब 17 प्रतिशत की कमी कर चुकी है।
एयर इंडिया ने घरेलू उड़ानों में कितनी कटौती की घोषणा की है?
एयर इंडिया ने जून से अगस्त 2026 के दौरान घरेलू उड़ानों में 22 प्रतिशत की कटौती की घोषणा की है। टाटा समूह के स्वामित्व वाली यह एयरलाइन घाटे को कम करने के दबाव में है और ईंधन की खपत घटाने के लिए लगभग 20 प्रतिशत उड़ानें रद्द करने की संभावना है।
जेट फ्यूल की कीमतें क्यों बढ़ी हैं?
ईरान में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में अनिश्चितता बढ़ाई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें ऊपर गई हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और रुपए की कमज़ोरी ने इस लागत को और बढ़ा दिया है।
इन उड़ान कटौतियों का यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा?
जून-अगस्त 2026 के दौरान कुछ घरेलू मार्गों पर सीटों की उपलब्धता कम हो सकती है और हवाई किराए में बढ़ोतरी की आशंका है। जिन मार्गों पर उड़ानें घटेंगी, वहाँ यात्रियों को वैकल्पिक तारीखें या मार्ग चुनने पड़ सकते हैं।
क्या अन्य भारतीय एयरलाइंस भी उड़ानें घटा सकती हैं?
विश्लेषकों के अनुसार, मांग में मौसमी गिरावट और ईंधन की बढ़ती लागत के दोहरे दबाव में अन्य एयरलाइंस भी क्षमता समायोजन के लिए मजबूर हो सकती हैं। जब तक वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, यह दबाव बना रहने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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