क्या अखिलेश यादव ने अभ्युदय योजना को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया?
सारांश
Key Takeaways
- अखिलेश यादव ने डबल इंजन सरकारों पर गंभीर आरोप लगाए।
- अभ्युदय योजना में फर्जीवाड़े का मामला उठाया गया।
- सरकार को जनता की समस्याओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
लखनऊ, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ‘डबल इंजन सरकारों’ पर देशभर में अन्याय, भ्रष्टाचार, साम्प्रदायिकता और प्रशासनिक विफलताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि भाजपा को आंख मूंदकर समर्थन देने वालों में जरा-सी भी संवेदना और विवेक शेष है, तो उन्हें मौजूदा हालात पर आत्ममंथन करना चाहिए।
अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र और पूर्वोत्तर तक की घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा शासन में आम आदमी की सांसें सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ‘डबल इंजन सरकारों’ में कहीं बेटियों के लिए सड़कों पर न्याय की मांग की जा रही है, कहीं जहरीले सिरप और पानी से मौतें हो रही हैं, तो कहीं दलितों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की सारी हदें पार की जा रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में जीएसटी अधिकारी के घर से करोड़ों रुपए की नकदी निकलती है, जबकि सरकार ईमानदार टैक्स सिस्टम का दावा करती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में लोग प्रदूषण के बीच एक-एक सांस के लिए तरस रहे हैं। राजस्थान में किसान घातक फैक्ट्रियों के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं, जबकि गुजरात-हरियाणा में अरावली को बचाने के लिए जनता को न्यायालयों का सहारा लेना पड़ रहा है।
उन्होंने असम में साम्प्रदायिक भेदभाव और त्रिपुरा-उत्तराखंड में नफरती एजेंडे के चलते हिंसा की बात की।
अखिलेश यादव ने कहा कि इन सबके बीच सरकार जनता का ध्यान भटकाने में लगी है, जबकि बेरोजगारी, घटता कारोबार, जहरीला पर्यावरण और सामाजिक तनाव आम आदमी की जिंदगी पर भारी पड़ रहे हैं। उन्होंने भाजपा समर्थकों से साम्प्रदायिक चश्मा उतारकर अपने परिवार, भविष्य और भारत की बिगड़ती छवि पर विचार करने का आग्रह किया।
सपा अध्यक्ष ने अभ्युदय योजना में कथित फर्जीवाड़े को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि '69 में 48 फर्जी' के मामले का सामने आना बताता है कि योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। यह केवल वसूली का मामला नहीं, बल्कि उन गरीब विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ है जो इन फर्जी नामों पर भरोसा कर पढ़ाई कर रहे थे।
उन्होंने मांग की कि घोटाले की जांच इस दृष्टिकोण से भी हो कि कहीं यह पीडीए समाज के बच्चों के खिलाफ सुनियोजित साजिश न हो, ताकि उन्हें दोयम दर्जे की कोचिंग में उलझाकर नौकरियों से वंचित रखा जा सके।