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क्या अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं?

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क्या अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं?

सारांश

अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में लाखों लोगों ने "नो किंग्स" के बैनर तले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने उन पर सत्तावादी रास्ते पर ले जाने का आरोप लगाया। क्या यह विरोध प्रदर्शन ट्रंप के लिए नई चुनौतियाँ लेकर आएंगे?

मुख्य बातें

अमेरिका भर में लाखों लोगों ने नो किंग्स के बैनर तले प्रदर्शन किए।
डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन्स के बीच गतिरोध के चलते प्रदर्शन भड़के।
ट्रंप ने विरोध प्रदर्शनों पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
विरोध प्रदर्शन में सत्तावादी रुख के खिलाफ आवाज उठाई गई।
यह प्रदर्शन अमेरिकी लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है।

न्यूयॉर्क, 19 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका के सभी हिस्सों में, उत्तर से दक्षिण तक लाखों लोगों ने "नो किंग्स" के बैनर तले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने उन पर आरोप लगाया कि वे देश को सत्तावादी दिशा में ले जा रहे हैं।

इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा किया गया था और यह जून में आयोजित पहले "नो किंग्स प्रोटेस्ट" का दूसरा चरण था, जिसमें इस बार भीड़ और भी ज्यादा थी। कमला हैरिस, जो ट्रंप के खिलाफ चुनाव हार गई थीं, ने एक्स पर लिखा, "मैं आपको अपने समुदाय में नो किंग्स कार्यक्रम में शांतिपूर्ण विरोध में शामिल होने के लिए प्रेरित करती हूं। हमारे देश में, असली शक्ति जनता के हाथ में है।"

"नो किंग्स" की थीम उन ब्रिटिश-विरोधी प्रदर्शनों की याद दिलाती है, जिन्होंने अमेरिका की नींव रखी। इसने राजशाही और निरंकुशता का त्याग कर एक गणतांत्रिक शासन प्रणाली को अपनाने का मार्ग प्रशस्त किया।

राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात से इनकार किया कि उनकी कोई राजशाही महत्वाकांक्षा है या वे किसी राजा की तरह व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने फॉक्स बिजनेस टीवी पर कहा, "वे मुझे राजा कह रहे हैं। मैं राजा नहीं हूं।"

इन प्रदर्शनों का आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब सीनेट में डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन्स के बीच गतिरोध के कारण सरकार का अधिकतर हिस्सा बंद है। डेमोक्रेट्स स्वास्थ्य बीमा और कार्यक्रमों में कटौती को फिर से लागू करने की मांग कर रहे हैं, जबकि ट्रंप का कहना है कि इससे राजकोष को 1.5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान होगा।

ट्रंप द्वारा डेमोक्रेटिक शासित राज्यों में संघीय बल भेजने के बाद ये प्रदर्शन भड़क उठे हैं। उन्होंने कानून-व्यवस्था को अपने हाथ में लेने की धमकी दी है, हालांकि अमेरिकी संविधान के तहत ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर पर हजारों प्रदर्शनकारियों ने जाम लगा दिया।

लॉस एंजेलेस में भी प्रदर्शन हुए, जहां संघीय आव्रजन अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच भिड़ंत हुई। शिकागो में, जहां गवर्नर जेबी प्रित्जकर ट्रंप के सबसे कड़े आलोचकों में से एक हैं, बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए।

शहर और उपनगरों में संघीय अधिकारियों और संघीय आव्रजन प्रवर्तन का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुई हैं। 2,500 से अधिक बड़े और छोटे विरोध प्रदर्शनों की योजना बनाई गई है, जिनमें राष्ट्रीय राजधानी भी शामिल है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि अमेरिका में चल रहा यह विरोध प्रदर्शन केवल राजनीतिक असहमति नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी लोकतंत्र की नींव पर सवाल उठाता है। जनता की आवाज़ को सुनना अत्यंत महत्वपूर्ण है, और यह प्रदर्शन इस दिशा में एक कदम है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नो किंग्स विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य राष्ट्रपति ट्रंप के सत्तावादी रुख के खिलाफ आवाज उठाना है।
यह विरोध प्रदर्शन कब हुआ?
यह प्रदर्शन 19 अक्टूबर को अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में हुआ।
कौन से संगठनों ने इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया?
इसका आयोजन डेमोक्रेटिक पार्टी, अमेरिकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन, और अन्य संगठनों ने किया।
क्या ट्रंप ने इस विरोध पर प्रतिक्रिया दी?
हां, ट्रंप ने कहा है कि वे राजा नहीं हैं और उनकी कोई राजशाही महत्वाकांक्षा नहीं है।
इस विरोध का प्रभाव क्या होगा?
यह प्रदर्शन ट्रंप के भविष्य और उनकी नीतियों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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