11 जुलाई 2026
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अमित शाह ने किया जयप्रकाश नारायण पुस्तकालय का उद्घाटन, बोले — दिनकर को पढ़े बिना भारत को नहीं समझ सकते

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अमित शाह ने किया जयप्रकाश नारायण पुस्तकालय का उद्घाटन, बोले — दिनकर को पढ़े बिना भारत को नहीं समझ सकते

सारांश

गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में जयप्रकाश नारायण पुस्तकालय का उद्घाटन करते हुए कहा कि दिनकर को पढ़े बिना भारत को नहीं समझा जा सकता। 32,000 भौतिक और 1 करोड़ से अधिक डिजिटल पुस्तकों वाला यह पुस्तकालय युवाओं के लिए ज्ञान का नया केंद्र बनेगा।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह ने 11 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय का उद्घाटन किया।
पुस्तकालय में 32,000 से अधिक पुस्तकें और 1 करोड़ से अधिक डिजिटल पुस्तकें उपलब्ध हैं; पूरे परिसर में निशुल्क वाई-फाई है।
शाह ने कहा कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर को पढ़े बिना भारत की आत्मा और संस्कृति को नहीं समझा जा सकता।
गांधीनगर मॉडल के तहत गाँव-गाँव में 3,000–4,000 पुस्तकों वाले पुस्तकालय खोले गए और 4 मोबाइल वैन चलाई गईं।
शाह ने जेपी के योगदान को याद किया — चंबल में 250+ बागियों का आत्मसमर्पण और 4 राज्यों के 22 जिलों से डकैती समाप्त।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 11 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' का साहित्य पढ़े बिना भारत की आत्मा, संस्कृति और संघर्ष को पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। उन्होंने पुस्तकालय को ज्ञान और राष्ट्र निर्माण के बीच की सबसे सशक्त कड़ी बताया।

पुस्तकालय की विशेषताएँ

दो मंजिलों में फैले इस पुस्तकालय परिसर में 32,000 से अधिक पुस्तकों का संग्रह उपलब्ध है। युवाओं के लिए एक अत्याधुनिक ई-लाइब्रेरी भी स्थापित की गई है, जहाँ एक करोड़ से अधिक डिजिटल पुस्तकें ऑनलाइन उपलब्ध हैं। पूरे परिसर में निशुल्क वाई-फाई, आधुनिक मॉनिटर और डिजिटल अध्ययन सुविधाएँ मुहैया कराई गई हैं, जिनकी सहायता से विद्यार्थी नोट्स तैयार कर सकते हैं और अध्ययन सामग्री डाउनलोड कर सकते हैं। शोधार्थियों के लिए विशेष व्यवस्था और एक शांत आधुनिक रीडिंग एरिया भी बनाया गया है।

गृह मंत्री का संबोधन

शाह ने कहा, 'आज दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण दिन है; महान स्वतंत्रता सेनानी और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम पर इस पुस्तकालय की शुरुआत हुई है। राष्ट्र निर्माण करने वाली और राष्ट्र को वैभव दिलाने वाली सारी गतिविधियों का मूल ज्ञान और विवेक के व्यावहारिक रूप में ढलने से होता है, और ज्ञान पुस्तकालय से प्राप्त होता है।' उन्होंने एक विचारक का हवाला देते हुए कहा कि देश का भविष्य कृषि, बाज़ार या उद्योगों की समृद्धि से नहीं, बल्कि इस बात से तय होता है कि देश के पुस्तकालयों में कितने युवा हैं।

गांधीनगर मॉडल का उल्लेख

गृह मंत्री ने बताया कि गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र के प्रत्येक गाँव में 3,000 से 4,000 पुस्तकों वाले पुस्तकालय खोले गए और उन्हें बड़े पुस्तकालयों से जोड़ा गया। चार मोबाइल वैन भी चलाई गईं। उन्होंने बताया कि अब गाँव का बच्चा जिस पुस्तक का नाम लिख देता है, वह हर शुक्रवार को उसी गाँव में उपलब्ध करा दी जाती है। इसके साथ ही प्रत्येक पुस्तकालय को स्थानीय स्कूल से भी जोड़ा गया है। यह मॉडल ग्रामीण ज्ञान-पहुँच की दिशा में एक व्यावहारिक प्रयोग के रूप में उभरा है।

जयप्रकाश नारायण को श्रद्धांजलि

शाह ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के योगदान को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आपातकाल के अंधेरे में जब हर विपक्षी नेता जेल में था और अखबारों पर ताला था, तब 'जय प्रकाश' का नारा एकमात्र प्रकाश बना — जिसका परिणाम यह हुआ कि इंदिरा गांधी स्वयं रायबरेली से चुनाव हार गईं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जेपी ने बिहार और गुजरात के छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया, बिहार के गांधी मैदान से 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान दिया, और चंबल में 250 से अधिक बागियों का आत्मसमर्पण कराकर 4 राज्यों के 22 जिलों से डकैती की समस्या समाप्त की।

युवाओं से आह्वान

गृह मंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे अपने मन में उठने वाले विचारों को पुस्तकों में संचित ज्ञान से समृद्ध करें। उन्होंने कहा, 'जब तक आप राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर को नहीं पढ़ेंगे, तब तक भारत को पूरी तरह नहीं जान पाएंगे।' यह पुस्तकालय उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है — जहाँ डिजिटल और भौतिक ज्ञान-संसाधन एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और आज उनके नाम का उपयोग सत्तारूढ़ दल की सांस्कृतिक राजनीति का हिस्सा बन रहा है। दिनकर को 'भारत को समझने की कुंजी' बताना साहित्यिक दृष्टि से सही हो सकता है, लेकिन यह उस व्यापक प्रवृत्ति का भी हिस्सा है जिसमें राष्ट्रवादी साहित्यकारों को केंद्र में रखा जाता है। गांधीनगर मॉडल की सराहना होनी चाहिए, परंतु यह सवाल भी उठता है कि इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की कोई ठोस नीतिगत घोषणा क्यों नहीं की गई।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय का उद्घाटन कब और किसने किया?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 11 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय का उद्घाटन किया। यह पुस्तकालय महान स्वतंत्रता सेनानी और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम पर समर्पित है।
इस पुस्तकालय में क्या-क्या सुविधाएँ हैं?
पुस्तकालय में 32,000 से अधिक भौतिक पुस्तकें और 1 करोड़ से अधिक डिजिटल पुस्तकों तक ऑनलाइन पहुँच उपलब्ध है। पूरे परिसर में निशुल्क वाई-फाई, आधुनिक मॉनिटर, डिजिटल अध्ययन सुविधाएँ, शोधार्थियों के लिए विशेष व्यवस्था और एक शांत रीडिंग एरिया भी है।
अमित शाह ने रामधारी सिंह दिनकर के बारे में क्या कहा?
अमित शाह ने कहा कि जब तक आप राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' को नहीं पढ़ेंगे, तब तक भारत को पूरी तरह नहीं जान पाएंगे। उनके अनुसार, भारत की आत्मा, संस्कृति, स्वाभिमान और संघर्ष को समझने के लिए दिनकर का साहित्य अवश्य पढ़ना चाहिए।
गांधीनगर पुस्तकालय मॉडल क्या है जिसका शाह ने उल्लेख किया?
गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र के प्रत्येक गाँव में 3,000 से 4,000 पुस्तकों वाले पुस्तकालय खोले गए और उन्हें बड़े पुस्तकालयों से जोड़ा गया। चार मोबाइल वैन चलाई गईं और गाँव का बच्चा जिस पुस्तक का नाम लिखता है, वह हर शुक्रवार को उसी गाँव में उपलब्ध करा दी जाती है।
जयप्रकाश नारायण का आपातकाल में क्या योगदान था, जिसे शाह ने याद किया?
शाह ने बताया कि आपातकाल के दौरान जब विपक्षी नेता जेल में थे और अखबारों पर ताला था, तब जेपी का नारा एकमात्र प्रकाश बना — जिसके परिणामस्वरूप इंदिरा गांधी रायबरेली से चुनाव हार गईं। जेपी ने बिहार के गांधी मैदान से 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान किया और चंबल में 250 से अधिक बागियों का आत्मसमरर्पण कराकर 4 राज्यों के 22 जिलों से डकैती की समस्या समाप्त की।
राष्ट्र प्रेस
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