अनंत सिंह की सफाई: '9 लोगों की मौत' वाला बयान लालू राज में हुई कार्रवाई का संदर्भ था, नीतीश पर नहीं
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल (युनाइटेड) विधायक अनंत सिंह ने 16 अक्टूबर 2026 को अपने उस बयान पर सफाई दी, जिसमें उन्होंने नीतीश कुमार का साथ देने के दौरान अपने 9 लोगों की मौत और खुद को गोली लगने का जिक्र किया था। पटना में दी गई इस सफाई में सिंह ने स्पष्ट किया कि उनके बयान को मीडिया में गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है और असल मंशा कुछ और थी।
क्या था विवादित बयान
अनंत सिंह ने पहले एक बयान में कहा था कि नीतीश कुमार का साथ देने के दौरान उनके 9 लोगों की जान गई और उन्हें खुद भी गोली लगी थी। इस बयान को व्यापक रूप से इस अर्थ में लिया गया कि ये मौतें नीतीश कुमार की वजह से या उनके लिए हुईं। सिंह ने इस व्याख्या को सिरे से खारिज किया।
अनंत सिंह की असली बात क्या थी
सिंह ने स्पष्ट किया कि जब उन्होंने लालू प्रसाद यादव का साथ छोड़कर नीतीश कुमार का समर्थन करना शुरू किया, तब लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में उनके लोगों को निशाना बनाया गया। उनके अनुसार, उसी राजनीतिक संक्रमण के दौरान उनके 9 साथियों की मौत हुई, उन्हें खुद गोली लगी और उनके पिता का भी निधन हो गया।
सिंह ने कहा कि यह पुराने घटनाक्रम का संदर्भ था — यह बताने के लिए कि नीतीश कुमार का साथ देने की उन्हें कितनी बड़ी व्यक्तिगत कीमत चुकानी पड़ी — न कि यह आरोप लगाने के लिए कि नीतीश कुमार के कारण या उनके इशारे पर ये मौतें हुईं।
नीरज कुमार पर सवाल
अनंत सिंह ने जेडीयू नेता नीरज कुमार के 'योगदान' संबंधी बयान पर भी तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने क्षेत्र से नीतीश कुमार को समर्थन दिलाने में अहम भूमिका निभाई और इसके बदले कोई आर्थिक लाभ नहीं लिया। सिंह ने पूछा कि नीरज कुमार ने पार्टी के लिए कौन-सी कुर्बानी दी है।
पार्टी में बने रहने का दावा
जेडीयू में अनंत सिंह की नाराजगी की चर्चाओं के बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पार्टी में हैं और आज भी नीतीश कुमार के साथ खड़े हैं। उन्होंने पार्टी छोड़ने की किसी मंशा से इनकार किया और कहा कि वह अपनी बात पार्टी के मंच पर रखना चाहते हैं। सिंह ने बताया कि उन्होंने पार्टी की बैठक में अपनी भूमिका और चिंताओं को उठाने का अवसर माँगा है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि पार्टी को उनकी जरूरत नहीं है, तो उन्हें स्पष्ट रूप से बता दिया जाए। यह बयान संकेत देता है कि भले ही सिंह पार्टी नहीं छोड़ रहे, लेकिन उनकी नाराजगी सतह के नीचे धधक रही है और आंतरिक वार्ता की माँग बढ़ती जा रही है।