नीरज-अनंत विवाद: ललन सिंह की मध्यस्थता के बाद अनंत कुमार सिंह का जदयू के साथ रहने का वादा
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधान परिषद चुनाव के तहत पटना स्नातक क्षेत्र से जनता दल (यूनाइटेड) [JDU] के प्रत्याशी नीरज कुमार और मोकामा विधायक अनंत कुमार सिंह के बीच जारी आंतरिक विवाद पर केंद्रीय मंत्री व जदयू के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को मध्यस्थता की पहल की। उनके प्रयासों के बाद अनंत कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि वे जदयू के साथ थे, हैं और आगे भी रहेंगे तथा पार्टी के खिलाफ कोई सार्वजनिक बयान नहीं देंगे।
विवाद की पृष्ठभूमि
ललन सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने इस मामले में उनसे चर्चा की थी, जिसके बाद उन्होंने स्वयं अनंत कुमार सिंह से मिलकर पूरे घटनाक्रम को समझा। उन्होंने बताया कि अनंत सिंह की शिकायत है कि जब बिहार सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया था, तब जदयू के कई नेताओं ने उनसे सरकार का समर्थन करने का अनुरोध किया था।
अनंत सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति सम्मान और राज्य में विकास कार्यों को देखते हुए सरकार का समर्थन किया था। इसके बाद जब वे मुख्यमंत्री से मिले तो नीतीश कुमार ने उन्हें मोकामा से विधानसभा चुनाव लड़ने को कहा था, जिसके गवाह संजय झा समेत कई नेता हैं।
मुख्य शिकायतें और आरोप
ललन सिंह ने स्वीकार किया कि विधानसभा चुनाव के दौरान अनंत सिंह के विरुद्ध प्रचार और दुष्प्रचार की बातें सामने आईं। उन्होंने कहा, 'ताली एक हाथ से नहीं बजती' — यानी यदि किसी के खिलाफ अभियान चलाया जाता है तो प्रतिक्रिया भी स्वाभाविक है। उन्होंने माना कि प्रदेश स्तर पर चूक हुई और मामले को समय रहते संभाला नहीं गया।
पार्टी की बैठक में अनंत सिंह ने सवाल उठाया था कि उनके खिलाफ चुनाव प्रचार करने वाले, बयान देने वाले और विरोधियों के साथ मिलकर अभियान चलाने वालों के खिलाफ पार्टी अनुशासन क्यों नहीं लागू हुआ। ललन सिंह के अनुसार, उस बैठक में इन आरोपों का कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।
अनंत सिंह की शर्त और ललन की अपील
अनंत कुमार सिंह ने ललन सिंह से साफ कहा कि 'जिसने उनके लिए वोट नहीं माँगा, वे उसके लिए वोट नहीं माँगेंगे।' उनका तर्क था कि जब नीतीश कुमार ने स्वयं उन्हें उम्मीदवार बनाया था, तब उनकी उम्मीदवारी के विरोधियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इस पर ललन सिंह ने अनंत सिंह से अनुरोध किया कि वे इस मामले में आगे कोई सार्वजनिक बयान न दें ताकि पार्टी का नुकसान न हो।
सुलह और आगे की राह
अनंत कुमार सिंह ने ललन सिंह की अपील पर सहमति जताते हुए कहा कि वे जदयू के साथ थे, हैं और आगे भी रहेंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव में किसने किसे हराने का प्रयास किया, इस पर वे प्रतिक्रिया नहीं देंगे। ललन सिंह ने यह भी कहा कि विधायक ने मीडिया के दबाव के बावजूद अब सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर कुछ न कहने का संकल्प लिया है।
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब बिहार विधान परिषद चुनाव नज़दीक हैं और पार्टी के भीतर एकजुटता दिखाना जदयू के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब मोकामा सीट जदयू के लिए आंतरिक खींचतान का केंद्र बनी हो — इस क्षेत्र से जुड़े समीकरण बिहार की राजनीति में हमेशा से संवेदनशील रहे हैं। ललन सिंह की इस पहल से अभी के लिए विवाद पर विराम लगता दिख रहा है, लेकिन पार्टी के अंदर की खटास पूरी तरह मिटी है या नहीं, यह आगे के घटनाक्रम से स्पष्ट होगा।