बिहार जदयू विवाद: श्रवण कुमार बोले — संजय झा की निगरानी में बातचीत से निकलेगा नीरज-अनंत विवाद का हल
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार के मंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता श्रवण कुमार ने शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र को लेकर जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार और जदयू विधायक अनंत सिंह के बीच उभरे विवाद को पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व के स्तर पर बातचीत के ज़रिए सुलझाने की कोशिश जारी है। उन्होंने भरोसा जताया कि बहुत जल्द इस मामले का समाधान निकल आएगा।
विवाद की पृष्ठभूमि
जदयू विधायक अनंत सिंह ने सार्वजनिक रूप से जनसुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह के समर्थन में उतरकर पार्टी की आंतरिक एकता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। उन्होंने अनुज सिंह की जीत का दावा भी किया है, जो सीधे तौर पर पार्टी के अपने प्रत्याशी नीरज कुमार के विरुद्ध जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब पटना स्नातक सीट पर चुनावी सरगर्मी तेज़ हो रही है।
पार्टी की आधिकारिक प्रतिक्रिया
श्रवण कुमार ने बताया कि इस मामले को देखने की जिम्मेदारी जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा को सौंपी गई है। उन्होंने कहा, 'यदि किसी नेता के जिम्मे यह काम दिया गया है, तो थोड़ा इंतजार कीजिए। इंतजार करने के बाद सही बात सबके सामने आ जाएगी।' उन्होंने मीडिया और पार्टी कार्यकर्ताओं से प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखने की अपील की।
मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि प्रचार गतिविधियों को लेकर उन्हें व्यक्तिगत जानकारी नहीं है — समाचार पत्रों, सोशल मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में जब कोई बात आती है, तभी उन तक सूचना पहुँचती है। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरा विवाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के संज्ञान में है।
मतभेद की प्रकृति
श्रवण कुमार ने माना कि नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच कुछ मामले व्यक्तिगत स्तर से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग लोगों की अलग विचारधारा और सोच हो सकती है, और ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पार्टी के बड़े नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है।
आगे की राह
गौरतलब है कि जदयू के भीतर इस तरह का खुला मतभेद पटना स्नातक सीट पर पार्टी की संभावनाओं के लिए एक चुनौती बन सकता है। संजय झा की मध्यस्थता से उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों पक्षों के बीच समन्वय स्थापित हो सकेगा। श्रवण कुमार ने कहा कि समाधान में थोड़ा समय लग रहा है, लेकिन बहुत जल्द निपटारा हो जाएगा।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अनंत सिंह पार्टी लाइन पर वापस लौटते हैं या उनका विरोध जदयू के लिए चुनावी नुकसान की वजह बनता है।