ईरान का ऐलान: पश्चिम एशिया संकट के लिए इजरायल-अमेरिका जिम्मेदार, तेहरान रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार
सारांश
मुख्य बातें
भारत स्थित ईरानी दूतावास ने 8 अक्टूबर 2026 को एक विस्तृत बयान जारी करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट का मुख्य कारण इजरायल की आक्रामक नीतियाँ और उसे मिलने वाला अमेरिकी समर्थन है। दूतावास ने यह भी स्पष्ट किया कि तेहरान अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए 'पूरी तरह तैयार' है।
मुख्य बयान और आरोप
दूतावास की ओर से सोशल मीडिया पर जारी इस लंबे बयान में कहा गया कि क्षेत्रीय असुरक्षा और अस्थिरता के लिए इस इलाके के लोग नहीं, बल्कि इजरायल की 'कब्जा जमाने और युद्ध को बढ़ावा देने वाली नीतियाँ' जिम्मेदार हैं, जिसमें अमेरिका पूरी तरह उसकी मदद करता है।
बयान में तीखे सवाल उठाए गए — बेरूत, गाजा और कतर पर हमलों का हवाला देते हुए कहा गया: 'कतर पर हमला किसने किया? बेरूत को किसने निशाना बनाया? गाजा को खंडहर में किसने बदला? और गोलान हाइट्स समेत सीरियाई क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर कब्जा किसने कर रखा है?' दूतावास के अनुसार ये सवाल आज पूरे क्षेत्र में आम लोगों के ज़हन में हैं।
अब्राहम समझौते पर तंज
बयान में कहा गया कि जो शासन एक तरफ 'शांति', अब्राहम समझौते और संबंध सामान्यीकरण की बात करता है और दूसरी तरफ अरब देशों पर हमले करता है, अरब इलाकों पर कब्जा जमाता है और गाजा में निर्दोष नागरिकों की हत्या करता है — वह कभी भी खुद को क्षेत्रीय सुरक्षा का रक्षक नहीं कह सकता।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले की तीसरी बरसी की पूर्व संध्या पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैबिनेट बैठक में ईरान और उसके समर्थित समूहों को कड़ी चेतावनी दी थी।
गाजा और लेबनान को 'प्रॉक्सी' कहे जाने का खंडन
दूतावास ने गाजा और लेबनान के लोगों को 'प्रॉक्सी' बताने वाले बयानों को सिरे से खारिज किया। बयान में कहा गया कि 'ये लोग किसी देश के इशारे पर नहीं, बल्कि अपनी जमीन, सुरक्षा, सम्मान और जीने के अधिकार के लिए लड़ रहे हैं।' दूतावास के अनुसार, दशकों से चले आ रहे कब्जे और विस्थापन को नज़रअंदाज़ करके उनके प्रतिरोध को महज़ 'राजनीतिक लेबल' से नहीं समझा जा सकता।
अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले का संदर्भ
बयान में फरवरी में अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए कथित संयुक्त सैन्य हमले का भी उल्लेख किया गया। दूतावास ने कहा कि 47 वर्षों की पाबंदियों, दबाव और धमकियों के बावजूद ईरान 'परमाणु हथियारों से लैस दो शासनों' के सामने मजबूती से खड़ा रहा और अपनी अखंडता की रक्षा करने में सफल रहा। बयान में 'आग से निकले फीनिक्स पक्षी' की उपमा देते हुए कहा गया कि ईरान किसी भी सैन्य हमले का सामना करने के लिए तैयार है।
इजरायल और अमेरिका की प्रतिक्रिया
इससे पहले, संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत डैनी डैनन और अमेरिकी अधिकारी माइक वाल्ट्ज ने कहा था कि 7 अक्टूबर जैसा हमला दोबारा नहीं होना चाहिए और ईरान के समर्थन पर लगाम कसना जरूरी है। नेतन्याहू ने भी चेतावनी दी थी कि किसी भी 'दुस्साहस' का 'भारी खामियाजा' भुगतना पड़ेगा।
गौरतलब है कि ईरानी दूतावास का यह बयान इस संघर्ष की तीसरी बरसी के ठीक दिन सामने आया है — ऐसे में दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी का यह दौर आने वाले हफ्तों में क्षेत्रीय तनाव को और गहरा कर सकता है।