अराघची का बड़ा बयान: 'पश्चिम एशिया अब पहले जैसा नहीं रहेगा, युद्ध हो या न हो ईरान की नीति अटल'
सारांश
मुख्य बातें
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को तेहरान में आयोजित एक विशेष बैठक में स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात अब पहले जैसे नहीं रहेंगे, और इसके लिए उन्होंने इज़रायल को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, 'युद्ध फिर से शुरू हो या न हो, ईरान की नीतियाँ नहीं बदलेंगी।' यह बैठक दिवंगत राजनयिक कमाल खराज्जी की विदेश नीति में भूमिका पर केंद्रित थी।
बैठक का संदर्भ और खराज्जी को श्रद्धांजलि
रिपोर्टों के अनुसार, यह विशेष बैठक विदेश नीति पर आम सहमति बनाने में दिवंगत राजनयिक कमाल खराज्जी की विरासत को सम्मानित करने के लिए बुलाई गई थी। खराज्जी 1997 से 2005 तक ईरान के विदेश मंत्री रहे और 1989 से 1997 तक संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत एवं स्थायी प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत रहे। वे बहुपक्षवाद, अंतरराष्ट्रीय कानून और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रबल समर्थक थे।
कथित तौर पर 1 अप्रैल 2026 को अमेरिका और इज़रायल द्वारा तेहरान में खराज्जी के आवास पर किए गए संयुक्त हवाई हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनकी पत्नी की मौत हो गई थी। 9 अप्रैल 2026 को उनका भी निधन हो गया।
इज़रायल और अमेरिकी सैन्य उपस्थिति पर ईरानी रुख
अराघची ने पिछले डेढ़ साल के संघर्ष को एक 'टर्निंग पॉइंट' बताते हुए कहा कि अमेरिका-इज़रायल के आक्रामक युद्धों के बाद 'अब इस क्षेत्र में कुछ भी पहले जैसा नहीं रहेगा।' उन्होंने दावा किया, 'इज़रायल का पर्दाफाश हो चुका है; सब जान गए हैं कि इस क्षेत्र में युद्ध भड़काने वाली एकमात्र ताकत वही है।'
विदेश मंत्री ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की आलोचना करते हुए कहा कि ये ठिकाने अपने मेज़बान देशों को न शांति दे पाए हैं और न ही सुरक्षा, बल्कि 'ये खुद असुरक्षा का स्रोत बन गए हैं।' उन्होंने विदेशी ताकतों की पूरी वापसी को क्षेत्रीय शांति की अनिवार्य शर्त बताया।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और क्षेत्रीय एकता
रणनीतिक जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बारे में अराघची ने कहा कि यह दशकों से खुला रहा है और इसके तटीय देशों — ईरान और ओमान — ने समुद्री यातायात पर कभी कोई प्रतिबंध नहीं लगाया। हालाँकि उन्होंने चेतावनी दी, 'यहाँ भी अब सब कुछ पहले जैसा नहीं रहेगा।'
उन्होंने तर्क दिया कि क्षेत्रीय संघर्षों को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता — 'ऐसा नहीं हो सकता कि क्षेत्र के एक हिस्से में शांति हो, जबकि दूसरे हिस्सों में युद्ध और टकराव जारी रहे।'
अमेरिका से वार्ता और ईरान की माँग
अराघची ने खुलासा किया कि पाकिस्तान, कतर और अन्य पक्षों की मध्यस्थता में अमेरिका के साथ हुई बातचीत के दौरान ईरान ने इस बात पर जोर दिया कि सभी मोर्चों पर शत्रुता एक साथ समाप्त होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ऐसा नहीं होता, तो क्षेत्रीय स्थिरता हासिल करना संभव नहीं होगा।
ईरान ने शांति और स्थिरता पर आधारित एक ऐसी क्षेत्रीय व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिसे बाहरी हस्तक्षेप के बिना क्षेत्रीय देश स्वयं सुनिश्चित करें। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव अभी भी चरम पर बना हुआ है।
आगे क्या होगा
अराघची के इस बयान से स्पष्ट है कि ईरान अपनी क्षेत्रीय नीति में कोई ढील देने के मूड में नहीं है। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और इज़रायल की भूमिका को लेकर तेहरान का यह कड़ा रुख आने वाले महीनों में क्षेत्रीय कूटनीति को और जटिल बना सकता है। खराज्जी के निधन के बाद ईरानी विदेश नीति में जो रिक्तता आई है, उसे भरने की चुनौती भी अराघची के सामने है।