अराघची-वांग यी बैठक: ईरान ने चीन के चार-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को सराहा, पश्चिम एशिया में युद्धविराम पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 6 मई 2026 को बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बैठक की, जिसमें उन्होंने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को लेकर चीन के चार-सूत्रीय शांति प्रस्ताव की सराहना की। दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है और कूटनीतिक प्रयास तेज़ हो गए हैं।
बैठक में क्या हुआ
अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा, ''मैंने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ रचनात्मक बातचीत की। दोनों पक्षों ने राष्ट्रीय संप्रभुता और राष्ट्रीय गरिमा की रक्षा करने के ईरान के अधिकार की पुनः पुष्टि की।'' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरानी पक्ष, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बनाए रखने तथा बढ़ावा देने के संबंध में चीन की ओर से प्रस्तुत चार-सूत्रीय प्रस्ताव की सराहना करता है।
चीन की स्थिति और प्रमुख बयान
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़रायल की सैन्य कार्रवाई को 'अवैध' करार देते हुए क्षेत्र में तत्काल संघर्ष विराम की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, वांग ने कहा कि पश्चिम एशिया 'निर्णायक मोड़' पर खड़ा है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए व्यापक युद्धविराम 'अनिवार्य' है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, वांग ने तनाव कम करने के प्रयासों के प्रति चीन की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत ही समाधान का रास्ता है।
ईरान की अपेक्षाएँ और युद्धोत्तर व्यवस्था
अराघची ने कहा कि ईरानी पक्ष को चीनी पक्ष पर भरोसा है और वह उम्मीद करता है कि चीन शांति को बढ़ावा देने तथा युद्ध को रोकने में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाना जारी रखेगा। साथ ही, ईरान एक ऐसी युद्धोपरांत नई क्षेत्रीय व्यवस्था की स्थापना का समर्थन करता है जो विकास और सुरक्षा के बीच समन्वय स्थापित कर सके। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे दौर में आया है जब ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता की पृष्ठभूमि में क्षेत्रीय समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं।
ट्रंप का 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' पर फैसला
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' पर रोक लगाने की घोषणा की। ट्रंप ने मंगलवार की शाम सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह फैसला पाकिस्तान और अन्य देशों के अनुरोध पर लिया गया है, साथ ही ईरान के साथ संभावित शांति समझौते की दिशा में हो रही प्रगति को ध्यान में रखते हुए किया गया है। यह घटनाक्रम संकेत देता है कि वाशिंगटन में भी कूटनीतिक दबाव बढ़ रहा है।
आगे की राह
पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में यह बैठक एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार, चीन की मध्यस्थता की भूमिका और ट्रंप के रुख में आए बदलाव से आने वाले हफ्तों में कूटनीतिक गतिविधियाँ और तेज़ होने की संभावना है।